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बलात्कार और अश्लील विज्ञापनों में मीडिया की भूमिका : गोपाल प्रसाद

​ बलात्कार और अश्लील विज्ञापनों में मीडिया की भूमिका : गोपाल प्रसाद ................................................................................................................ मीडिया का नैतिक कर्तव्य है की समाज में फैली हुई कुरीतियों से समाज को सजग करे, देश और समाज के हित के लिए जनता को जागरूक करे ; परन्तु ऐसा लगता है की धन कमाने की अंधी दौड़ में लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ अपनी सभी मर्यादाओं को लाँघ रहा है। सभी समाचार पत्रों में संपादक प्रतिदिन  बड़ी-बड़ी पांडित्यपूर्ण सम्पादकीय लिख कर जनमानस को अपनी लेखनी की शक्ति से अवगत करते हैं परन्तु व्यावहारिक रूप में ऐसा लगता है की पैसा कमाने के लिए सभी कायदे कानूनों को तक पर रख दिया गया है . सभी समाचारपत्रों में अश्लील एवं अनैतिक विज्ञापनों की भरमार है , जिससे समाज के लोग गुमराह होते हैं . समाचारपत्र केवल एक लाइन लिखकर लाभान्वित हो जाता है . क्या कभी किसी समाचारपत्र ने ऐसे विज्ञापनों की सत्यता को जांचने की कोशिश की ? क्या ऐसे अश्लील और अनैतिक विज्ञापनों को समाचारपत्रों में छपने भर से वह अपनी जिम्मेवारी से मुक्त हो सकता है?   ऐसे बहुत से विज्…
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अमेठी का अनुभव : गोपाल प्रसाद ( आर टी आई एक्टिविस्ट )

विगत 13 अप्रैल 2014 से 07  मई  2014 तक लोकसभा  चुनाव के दौरान अमेठी में रहकर काफी अनुभव प्राप्त किया।  कुछ लोगों की आंतरिक मानसिकता एवं उनकी वास्तविकता से रूबरू हुआ।  भाजपा से टिकट  नहीं मिलने के बाद  वरिष्ठ  भाजपा नेता श्री संजय जोशी एवं राष्ट्रीय  स्वयं सेवक  संघ   के वरिष्ठ पदाधिकारी श्री इन्द्रेश जी के इच्छानुसार  मैंने अमेठी से निर्दलीय उम्मीदवारी का विचार  त्याग दिया।
            स्वामी रामदेव जी के अमेठी आगमन  की तैयारी एवं फिर स्थगित होने  के बाबजूद भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से जुड़े होने के कारण सम्पूर्ण चुनाव अवधि में उत्तरप्रदेश प्रभारी श्री सन्देश योगीजी , श्री दुर्गेशजी , श्री सुरेन्द्र सिंह जी एवं श्री शशांकजी के  सानिध्य में सैकड़ों  कार्यकर्ताओं के साथ सम्पूर्ण समय  दिया एवं श्री नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री पद पर पदासीन करने हेतु भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में प्राणपण से जुटे रहे।
   मेरा  अमेठी से चुनाव लड़ने की इच्छा  का कारण  राहुल गांधी के भाषण की एक उक्ति थी। राहुल गांधी ने  कहा  था कि बिहार  और उत्तर प्रदेश के लोग दिल्ली एवं मुम्बई में भीख मांगने का काम करते ह…

अर्थ, काम और मोक्ष पर "धर्म "का सम्पूर्ण नियंत्रण

हमारी दृष्टि भारत के सनातन मूल्यों से ऊर्जा प्राप्त करती है , न कि किसी विदेशी समाज के संरचना के सिद्धांतों से।  हमने अपनी लम्बी सांस्कृतिक परंपरा के मूल स्वरों की सरल व्याख्या किया है , ताकि गूढ़ से गूढ़ विचार भी सहज रूप से स्पष्ट हो जाय।  भारत की राष्ट्रीयता किसी राजनीतिक एकीकरण के सिद्धांत से उपजी हुई अवधारणा नहीं है , वह तो सांस्कृतिक एकता की सहज उपज है।  वह किसी मौर्य , मुग़ल , अथवा ब्रिटिश साम्राज्य की देन नहीं है , वह तो एक लम्बी हिन्दू विरासत की देन है।  राज्य आते रहे , राज्य जाते रहे किन्तु हमारी सांस्कृतिक एकता का प्रवाह अक्षुण्ण बना रहा।  वह किसी राजा का मोहताज नहीं रहा।  किसी राजा के प्रश्रय अथवा उसके विरोध के कारण उसका उदय अथवा विकास नहीं हुआ और न ही  उसके कारण उसका ह्रास ही हुआ।  भारत की सांस्कृतिक एकता राज सापेक्ष नहीं , राज निरपेक्ष रही है।  अशोक और अकबर के साम्राज्यों ने भारत की एकता को नहीं बनाया।  इनमें से किसी ने भी अर्धशताब्दी तक भी राज नहीं किया , इसकी एकता के बीज तो इसके संत महात्माओं ने निरंतर बोएं हैं , राजाओं ने तो सिर्फ फसलें काटी हैं।  यह नहीं भूलना चाहिए कि …

जदयू भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष निखिल त्यागी भाजपा में क्यों शामिल हुए?

श्री राजनाथ सिंह एवं श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में  तथा युवाओं के हरदिल अजीज श्री अनुराग ठाकुर के  उपस्थिति   में युवाओं की  ऊर्जा को  सकारात्मक दिशा देने एवं समृद्ध  राष्ट्र निर्माण के लिए आज हम हजारों साथियों के साथ भाजपा में शामिल हो रहे हैं।             आजादी के 66 बर्ष बीत जाने के बाद भी सत्ता कि बागडोर प्रायः कांग्रेस के हाथ में ही रहा परन्तु   देश में बेरोजगारी की स्थिति घटने के बजाय बढती ही चली गई। जनसँख्या  बढती गई , बेरोजगारी बढती गई परन्तु सरकारी विभागों में नियुक्तियां तथा रोजगार सृजन थप रहा।  केंद्र सरकार की सुप्रसिद्ध संस्था कपार्ट को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा , जिससे ग्रामीण विकास ठप पड़ गयी  है। हमारी केंद्र की  सरकार  देश की मूलभूत आवश्यकताओं की  पूर्ति के बजाय केवल डपोरशंखी वादों एवं दावों की घोषणाओं में ही व्यस्त रही।  अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए धर्म निरपेक्षता, साम्प्रदायिकता और आरक्षण जैसे मायावी शब्दों का सहारा लेकर देश के अवाम विशेषकर युवाओं को धोखा देने में पूरी यूपीए सरकार व्यस्त रही है।             देश को विकास के रास्ते पर ले जाने की आज परम आवश्यकता…

" हिन्दू" कोई संप्रदाय नहीं , एक " जीवनप्रणाली "

संस्कृति " स्वयं" में एक भावनात्मक संज्ञा है , जिसकी पहचान होती है उसमें पैदा हुए और उसे स्वयं जीते हुए लोगों के जीवनमूल्यों से जो उनके जीवन जीने की शैली का निर्धारण करते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि " हिन्दू" कोई संप्रदाय नहीं है। वह एक " जीवनप्रणाली " है। वह व्यक्ति की पारिवारिक और सामाजिक जीवन पद्धति का निरूपण है। व्यक्ति के जीवन का कल प्रायः सौ बर्ष है और हिन्दू धर्म अथवा हिन्दू जीवन प्रणाली को इसी कालखंड में विभाजित करके उसके आदर्शों की संरचना हमने की है। चार आश्रमों अर्थात ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ , और सन्यास को 25, 25 बर्ष का समय दिया गया है। प्रत्येक में नारी पुरुष के सम्बन्धों के आदर्शों को विस्तार दिया गया है। मन , पत्नी, बहन , भाभी , ममी , बुआ आदि कितने ही रूपों में उसके कर्तव्यों की व्याख्या की गई है। पुरुष के भी ऐसे ही सम्बन्धों के आदर्शों का निरूपण हुआ है। यही नहीं स्त्री और पुरुष के सामाजिक उत्तरदायित्वों का भी पूरा- पूरा वर्णन किया गया है। इस सबके केंद्र में है शिक्षा के स्वरुप को व्याख्यायित करना। दुर्भाग्य से आज की शिक्षा प्रणाली स…

MAMTA SHARMA SAYS "SAVE WATER , SAVE DAUGHTER" IN VISHV MITR PARIWAR PROGRAM

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान /आरटीआई जनजागरूकता अभियान

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान आरटीआई जनजागरूकता अभियान हेल्पलाइन नंबर : 09910341785 सूचना का अधिकार ( RTI) जनजागरूकता कार्यशाला ......................................................................…………………………………………। लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई का महत्वपूर्ण योगदान है। पारदर्शिता एवं जबाबदेही ही लोकतंत्र लोकतंत्र का आधार है। सरकार एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं और प्रतिष्ठानों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार अब सभी भारतवासियों को प्राप्त हो गया है. संसद में सूचना का अधिकार विधेयक 11 मई 2005 को पारित किया गया तथा 13 अक्टूबर 2005 को यह कानून के रूप में पूरे देश में लागू कर दिया गया है. इस क़ानून के दायरे में सरकारी , अर्धसरकारी संस्थाओं तथा विभागों के अतिरिक्त ऐसे और सरकारी संगठन भी आते हैं ,जिन्हे सरकार द्वारा वित्तीय सहायता मिली है। RTI द्वारा मानवाधिकार के उल्लंघन के मामलों एवं किसी जांच प्रक्रिया के पूर्ण हो जाने पर उसके बारे में सूचना प्राप्त की जा सकती है.. ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत , जिला पंचायत , नगर पंचायत , विधायक, सांसद, विधान परिषद् सदस्य इत्यादि के कार्यनिधि…