शनिवार, 28 नवंबर 2009

लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज के ‘इलेक्ट्रिक बाईक’ की धूम



लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज (एल ए आई) लोहिया समूह की पर्यावरण-अनुकूल, किफायती बिजली से चलने वाली बाईक- ओमा स्टार को बाजार में उतारा । ये कंपनी भारत में बिजली से चलने वाले दो- पहिए वाहनो का उत्पादन करने वाली औद्योगिक इकाइयों में से एक प्रमुख इकाई है ।
ओमा स्टार, सुरक्षा, स्टाईल और आराम का अद्वितीय सम्मिश्रण है । अप्ने नए रूप के साथ डिजिटल स्पीडोमीटर, एलॉए के स्टाइलिश पहियों, ज्यादा स्टोरेज क्षमता, उच्च ग्राउंड क्लीयरेंस, टेलिस्कोपिक सस्पेंशन, आदि सभी विशेषताएं इस बाइक में मौजूद हैं । हमेशा की तरह ही लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज का ये मॉडल भी अपने संभावित खरीदारों को पैसे की सही कीमत अदा करने में सक्षम है ।
ओम स्टार तीन तरह के रंगों में उपलब्ध है- मैको ब्लैक, फाइरी रीड और स्पीरीटेड सिल्वर । आम आदमी की जरूरतों के मुताबिक दिल्ली में ओमा स्टार की कीमत २५,९९९ रूपए और फेम की कीमत २४,६५० रूपए रखी गई है । २५ किमी/घंटा की रफ्तार के साथ ओ एन ए स्टार हर बार चार्ज करने पर ६० किमी की दूरी तय करती है । ये इलेक्ट्रोनिक बाइक अलाने में आसान और बेहतर है, इसका स्टाईल अनुपम है और इसके जरिए अच्छी खासी बचत की जा सकती है । इस इलेक्ट्रोनिक बाइक ई विशेषताएं और बढाने वाले कुछ अन्य गुण हैं २०ए एच की क्षमता ६ से ८ घंटे का चार्जिग समय ८० मिली मीटर और ११० मीटर के अगले और पिछले ब्रेक ड्रम ।
इस कंपनी ने आई आई टी एफ-२००८ में भी हिस्सा लिया था और अपने २ मॉडल ओमा और फेल बाजार मे उतारे थे । इन दोनों ही इलेक्ट्रोनिक बाइकों के लिए कंपनी को बेहद अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी और इस अवधि के दौरान ही कंपनी ने अपने खरीदारों को बेहतर नेटवर्क और बाइकों की उपलब्धता देने के लिए सिर्फ दिल्ली में ही १० डीलरों के माध्यम से बाइकों की बिक्री शुरू कर दी है ।
इस अवसर पर लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री आयुश लोहिया ने कहा, “हमारे द्वारा लिए जाने वाले फैसलों में से ज्यादातर के पीछे आखरी उद्देश्य यही होता है कि जीवनस्तर को बेहतर बनाया जाए । पर्यावरण से जुड़ी चिंताओ और घटते संसाधनों की पृष्ठ भूमि में यह अनिवार्य हो गया है कि जो कुछ बचा है उसे संरक्षित करें और अर्थव्यवस्था की वृद्धि के इंजन को चलाने के लिए नए विकल्प ढूंढे । हमारी इलेक्ट्रोनिक बाइकें इन सवालों और चिंताओ का जवाब हैं ।”

कंपनी के बारे में :

लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज (एल.ए.आई.) लोहिया समूह का विद्युतीय वाहन निर्माण विभाग है । सन्‌ १९७६ में मुरादाबाद में स्थापित लोहिया समूह का कारोबार भारत समेत विदेशों में फैला हुआ है, आज इस कंपनी वार्षिक राजस्व ५०० करोड़ रूपयों का है । लोहिया समूह के तहत लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज की शुरूआत वर्ष २००७ में हुई ।
लोहिया ऑटो इंडस्ट्रीज की काशीपुर (उत्तराखंड) में नए जमाने की तकनीकों से युक्‍त निर्माण इकाई है जहाँ पर उच्च तकनीक वाले विद्युतीय दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों का निर्माण किया जाता है । जर्मन तकनीक से विकसित इस कारखाने में दो किस्मों के विद्युतीय स्कूटर तैयार किए जाते हैं- फेम और ओमा । ये दोनों स्कूटर देखभाल की आवश्यकता से लगभग मुक्‍त हैं । इनमें कोई गियर, इंजिन, बैल्ट या चेन ड्राइव नहीं है, इनसे कोई उत्सर्जन नहीं होता, प्रदूषण नहीं होता ये इलैक्ट्रॉनिक स्टार्ट व ऐक्सीलिरेटर युक्‍त हैं इन सब खासियतों के अलावा ये स्कूटर केन्द्रीय वाहन पंजीकरण कानून के तहत भी नहीं आते हैं क्योंकि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ए.आए.ए.आई) ने इस प्रकार के वाहनों को ऐसी आवश्यकताओं से छूट दिलायी है । इन्हें चलाने के लिए किसी पंजीकरण या लाइसेंस की आवश्यकता भी नही होती ।
उत्तराखंड के काशीपुर में स्थित कंपनी की निर्माण इकाई में हर साल २ लाख वाहन उत्पादित करने की क्षमता है । इस वित्तीय वर्ष में कंपनी ने अपने लिए २०,००० से अधिक इलैक्ट्रिक बाइक बेचने का लक्ष्य रखा है और अगले साल इस लक्ष्य को बढ़ाकर एक लाख इकाई कर दिया जाएगा । कंपनी तत्परता के साथ पड़ोसी देशों में अपने उत्पादों को निर्यात करने की संभावनाएं भी तलाश कर‘ रही है ।
- गोपाल प्रसाद

जिनका उद्देश्य है ग्राहकों को आकर्षित करना

मेले में किसी भी उत्पाद के प्रचार के लिए कंपनी विभिन्‍न हथकंडे अपनाती है ।ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियाँ दर्शकों के भीड़ जुटाकर अपने उत्पाद हेतु प्रचार-प्रसार करना ज्यादा फायदेमंद मानती है । इसके तहत रोड शो, नुक्‍कड़ नाटक, ऑस्केस्ट्रा, लकी ड्रा, लॉटरी, पजल गेम, क्विज आदि तरीके आते हैं । ग्राहकों के मन में उत्पाद के प्रति संभावना, माँग, नकारात्मक एवं सकारात्मक पहलुओं को जानना समझना अति आवश्यक होता है । इसके लिए हर बड़ी कंपनी सर्वेक्षण एजेंसी का सहारा लेती है । देश के विभिन्‍न क्षेत्रों से ग्राहकों की मानसिकता का अध्ययन कुछ पन्‍नों में विभिन्‍न प्रश्नों को पूछकर किया जाता है । सी-४, नेल्सन, मार्ग, क्रेड आदि सर्वेक्षण कंपनियाँ उत्पाद निर्माताओं, राजनैतिक दलों, गैर सरकारी/ सरकारी संस्थाओं व व्यक्‍ति विशेष के संदर्भ में व्यापक रूप से आँकड़ा इकट्‌ठा कर पूरी योजनाओं को मूर्त्त रूप देते हैं ।
इसी के अगली कड़ी के रूप में उत्पाद निर्माता अपने उत्पादों के लांचिंग हेतु ज्यादा से ज्यादा भी जुटाने हेतु विभिन्‍न कलाकारों को भी हायर करती है । इस असायनमेंट के तहत उन कलाकारों की जिम्मेवारी भीड़ का भरपूर मनोरंजन करते हुए अपने उत्पादों का प्रचार करना तथा बिक्री बढ़ाना होता है । इवेंट से जुड़े कलाकरों में कई पहलुओं का होना आवश्यक है । पॉप गायकों, सफल गजल गायकों और कवियों का इस्तेमाल आज धड़ल्ले से दर्शकों के भरपूर मनोरंजन एवं भीड़ जुटाने में किया जा रहा है ।
दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित आईआईटीएफ में विभिन्‍न उत्पाद निर्माता ऐसे बहुमुखी कलाकारों का सहारा अपने संभावित ग्राहकों हेतु ले रही है । एक ऐसे ही प्रतिभावान एवं ओजस्वी कलाकार का नाम है- अतुल जिसका इस्तेमाल लोहिया ग्रुप ने अपने ईबाईक के प्रमोशन के लिए किया है । बहुआयामी प्रतिभा के घनी अतुल में बहुत सारी खूबियाँ हैं । ये बेस्ट एंकरिंग पॉप गायन, सवाल-जवाब और क्विज के मास्टर भी हैं । इनकी सबसे बड़ी खासियत युवाओं की धड़कनों को बखूबी परखना है । पूरे प्रगति मैदान में सबसे अधिक भीड़ जुटाने का कार्य इन्होंने किया है । दर्शकों से सवाल पूछना उन्हें अंदर तक झकझोरना, उनसे हँसी-मजाक करना उनका ज्ञानवर्द्धन करना और इस सबसे महत्वपूर्ण भीड़ के दिमाग में अपने कंपनी के ब्रांड को फिक्स कर देना इनके दाहिने हाथ का खेल है । उपर से तो यह काफी आसान लगता है परन्तु यह इतना आसान भी नहीं है । दर्शकों की मानसिकता का अध्ययन करना, कंपनी की माँग एवं संतृष्टि में संतुलन स्थापित करना ही मूल उदेश्य है इनका ।
पन्द्रह दिन के मेले में भीड़ जुटाने के लिए ऐसे कलाकारों को कंपनी से ५० हजार से १० लाख रू. तक के ऑफर मिलते हैं । खासकर मोबाइल, हर्बल उत्पाद, बाईक/ऑटो, कार, टेक्सटाईल्स, कंपनियाँ फैशन शो एवं अपने स्टॉल पर उत्तेजक वस्त्र में खूबसूरत कन्याओं को हायर करती है । जिसके जितने कम कपड़े हैं उसकी उतनी ही ज्यादा कीमत हैं । दूरी का एकमात्र उद्देश्य है आकर्षण पैदा करना, दर्शकों का मनोरंजन प्रोडक्‍ट का दिल में छा जाना और इसके माध्यम से बिक्री बढ़ाना ।
अच्छे कलाकारों, मॉडलों ने तो अपने पी.आर.ओ भी नियुक्‍त कर रखे हैं । फिल्म जगत की हस्तियाँ अब मात्र फिल्म/टीवी में शूटिंग तक ही नहीं बल्कि ऐसे उत्पादों के शोरूम एवं कार्यक्रम में उद्‌घाटन कर्त्ता के रूप में धड़ल्ले से प्रयोग किए जा रहे हैं ।
कई व्यवसायी नामी कलाकारों/हस्तियों के साथ डिनर/लंच तथा सेमिनार/गोष्ठी, प्रदर्शनी/एक्जीविशन के माध्यम से दर्शकों/ग्राहकों को जुटाने के सशक्‍त अभियान में अपनी अहम भूमिका निभा रहे है । वैश्‍वीकरण के इस युग में उद्योग जगत के इस नए ट्रेंड को समझना काफी महत्वपूर्ण है । आज उत्पाद के निर्माण में कम,उत्पाद के प्रचार-प्रसार पर अधिक बजट खर्च की जा रही है । जो सफल व्यवसायी इस तथ्य को समझता है वह बाजार को दोहन करने में सफलता प्राप्त कर रहा है । अतः यदि आप भी अपने व्यवसाय को सफल बनाना चाहते हैं तो अबिलंब इस ट्रिक को अपनाइए एवं अपने उत्पादों को बिक्री बढाइये ।
- गोपाल प्रसाद

सोमवार, 2 नवंबर 2009

अप्रवासी भारतीय वेंकटरमण को रसायनशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार

वेंकटरमन रामचंदन नोबेल से सम्मानित होनेवाले सातवें भारतीय हैं । वास्तव में इससे भारत गौरवान्वित हुआ है । उल्लास में उनका बड़ौदा वि. वि. भी है । वैसे यह गलत चलन है कि काम का महत्व पुरस्कारों से तय होता है । खुद उनके कार्य (अनेक लाइलाज बीमारियों का निदान), उनसे जुड़े वैज्ञानिकों एवं उनके साथ सम्मानित अदा योनोथ व थामस स्टीज को लख-लख बधाई ।
भले ही वह बहुत पहले अमेरिका में बस गए लेकिन रसायन विज्ञान के लिए भारतीय अमेरिकी वैंकटरमन रामाकृष्णन को नोबेल पुरस्कार मिलने की घोषणा ने करोड़ों भारतीयों को गौरवान्वित कर दिया । कोशिकीय तंत्र में प्रोटीन की रचना करने वाले अंगक राइबोजोम पर उल्लेखनीय अनुसंधान कार्य के लिए यह पुरस्कार मिला ।
मंदिरों के शहर तमिलनाडु के चिदंबरम में १९५२ में जन्में ५७ वर्षीय रामाकृष्णन ऐसे सातवें भारतीय या भारतीय मूल के व्यक्‍ति हैं जिन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है । रामाकृष्णन्‌ ने गुजरात के बड़ौदा वि. वि. से १९७१ में विज्ञान में स्नातक की उपाधि हासिल की और फिर उच्चतर अध्ययन के लिए अमेरिका चले गए । बाद में वह पूरी तरह अमेरिका में बस गए और उन्होंने वहाँ की नागरिकता हासिल कर ली । अमेरिका के ओहायो वि. वि. से उन्होंने भौतिकी में पीएचडी की उपाधि हासिल की और बाद में अमेरिका में कैलिफोर्निया वि.वि. में उन्होंने १९७६ से १९७८ तक परास्नातक के रूप में शोध कार्य किया ।
विश्‍वविद्यालय में अनुसंधान कार्य के दौरान रामाकृष्णन ने प्रतिष्ठित जैव रसायन वैज्ञानिक डॉ. मारीसियो मोंटरल के अंतर्गत काम किया । इसके बाद उन्होंने भौतिकी से जीव विज्ञान के क्षेत्र में आने का फैसला किया । इसके लिए उन्होंने दो साल तक जीवविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य किया । फिर उन्होंने येल वि.वि. में परास्नातक के रूप में ई. कोलाई वैक्टीरिया केराइबोजोम के छोटे घटक के न्यूट्रॉन प्रकीर्णन पर काम करना शुरू किया । तब से वह राइबोजोम की संरचना का अध्ययन कर रहे हैं । इस समय रामाकृष्ण कैम्ब्रिज वि.वि. में आणविक जीव विज्ञान की एम‍आरसी प्रयोगशाला में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं । उन्होंने कई शैक्षणिक पत्रिकाओं में महत्वपूर्ण अनुसंधानपरक पत्र लिखे हैं ।
क्या है विधि?
एक्स-रे क्रिस्टेलोग्राफी तकनीक की मदद से राइबोसोम में मौजूदा करोड़ों परमाणुओं की पोजीशन का पता लगाने में सफलता पाई । १९८० व १९९० में बने इनके त्रिआयामी मॉडलों से वैज्ञानिक जान पाए कि राइबोसोम कैसे डीएनए के अनुवांशिक कोड पहचान कर प्रोटीन तैयार करता है जिससे बायो केमिकल प्रक्रिया शुरू होती है ।
क्या लाभ होगा?
उनकी इस उपलब्धि से नए कारगर एंटीबायोटिक्स (रोग प्रतिरोधक) विकसित करने में मदद मिलेगी । एंटीबायोटिक्स हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करने और उनका विकास रोकने का काम करते हैं ।