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Showing posts from 2010

सूचना का अधिकार (RTI) वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ

सरकार, सरकारी योजनाएँ और तमाम सरकारी गतिविधियाँ हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं । आम आदमी से जुड़े कई मामले प्रशासन में बैठे भ्रष्ट, लापरवाह या अक्षम कर्मचारियों/अधिकारियों के कारण फलीभूत होने के बजाय कागज का पुलिंदा बनकर रह जाती है । सन्‌ १९४७ में मिली कल्पित आजादी के बाद से अब तक हम मजबूर थे । व्यवस्था को कोसने के सिवाय कुछ नहीं हैं, क्योंकि आज हमारे पास ‘सूचना का अधिकार’ (RTI) नामक औजार है, जिसका प्रयोग करके हम सरकारी विभागों में अपने रूके हुए काम आसानी से करवा सकते हैं । इस हेतु हमें ‘सूचना का अधिकार अधिनियम २००५’ की बारिकियों को ध्यानपूर्वक समझना और समझाना होगा । सामाजिक क्षेत्र में यह कानून ग्राह्य हो, इसके लिए बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं के विशेष रूप से जागरूक किए जाने की आवश्यकता है । भगत सिंह ने क्रांति को जनता के हक में सामाजिक एवं राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा था । सूचना का अधिकार (RTI) को हल्के अंदाज में न लेकर एक बड़े आंदोलन के रूप में देखें, सोंचे एवं मूल्यांकन करें तभी वास्तव में इसकी सार्थकता सिद्ध होगी । ६३ साल पूर्व मिली आ…

आर.टी.आई के अस्त्र से से करें भ्रष्टाचार रुपी रावण का अंत : श्री सनातन धर्म लीला कमेटी

पुरानी दिल्ली स्टेशन के सामने दंगल मैदान में श्री सनातन धर्म लीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के अंतिम दिन भगवान राम का राज्याभिषेक उत्सव (राजतिलक ) के अवसर पर संस्था के कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेश खंडेलवाल ने कहा की बुराईपर अच्छाई की जीत का प्रतीक मन जानेवाला त्योहार विजयादशमी भी अब प्रतीकात्मक ही रह गया है .अगर हम अपने चारों तरफ नजर डालें तो भ्रस्ताचार , महंगाई ,लालच , अपराध आदि तमाम बुराईयों के रावण प्रतिदिन सर उठा रहे हैं परन्तु उनका संहार करने कोइ राम नहीं आएगा क्योंकि जिन राजनेताओं पर भरोसा करके हमने उन्हें आदिकार संपन्न बनाया वह तो आज खुद रक्षक से भक्षक बन चुके हैं .हमलोगों को अपने बलबूते पर इससे निपटना होगा .इसके लिए देश के सभी नागरिकों को एकजुट होने की आवश्यकता है . कॉमनवेल्थ खेल के दौरान हुए तमाम भ्रष्टाचार को लीपापोती की आशंका ही ज्यादा है. इस तरह के तमाम समस्याओं को जड़ -मूल से नष्ट करने के लिए जनता को ही आगे आकर मोर्चा संभालना होगा . संस्था के प्रचार मंत्री अनिल कुमार मित्तल ने कहा की रामराज्य में भी आम लोगों को सूचना का अधिकार प्राप्त था. राम के शासनकाल में एक धोबी द्…

राष्ट्र निर्माण के परिप्रेक्ष्य में १९ वां राष्ट्रमंडल खेल ,२०१०

राष्ट्रीय विचार मंच एवं अनुव्रत महासमिति के संयुक्त तत्वावधान में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की १३५ वीं जयंती के अवसर पर आयोजित "राष्ट्र निर्माण के परिप्रेक्ष्य में १९ वां राष्ट्रमंडल खेल ,२०१० विषय के संगोष्ठी की अध्यक्षता पदमश्री श्याम सिंह शशि ,विषय प्रवर्तन राष्ट्रीय विचार मंच के संरक्षक एवं विचार दृष्टि पत्रिका के संपादक सिद्धेश्वर जी ने की. संगोष्ठी में मुख्य रूप से गाँधी प्रतिष्ठान के सचिव सुरेन्द्र कुमार ,नगरी लिपि परिषद् के मंत्री डा. परमानंद पंचाल, अनुव्रत महासमिति के संयुक्त मंत्री बी एन पाण्डेय ,लोक सभा सचिवालय के उप सचिव नवीन कुमार झा ,आर.टी. आई एक्टिविस्ट गोपाल प्रसाद ,सामाजिक कार्यकर्ता डा. प्रसून प्रमुख रूप से उपस्थित थे .समारोह का उदघाटन जयपुर के वरिष्ठ साहित्यकार डा. नरेन्द्र शर्मा "कुसुम" ने की. अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय विचार मंच के सचिव प्रो. पी. के. झा "प्रेम" तथा विचार दृष्टि पत्रिका के संपादक उपेन्द्र नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस अवसर पर विचार दृष्टि पत्रिका के "राष्ट्रमंडल खेल -2010 विशेषांक का लोकार्पण पदमश्री डा . श्याम…

नए वर्ष में ले नया संकल्प

अब हम नए वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं । नए दशक में प्रवेश के साथ ही हमें नए संकल्प भी लेने होंगे क्योंकि बगैर संकल्प लिए भारत को महाशक्‍ति बनाने का मंसूबा अधुरा ही रह जाएगा । पिछले वर्षों में हमलोगों ने बहुत सारी समस्याओं पर चिंतन-मनन किया पर नए वर्ष में हमें केवल और केवल समाधान ढूँढकर भी कहा है कि “अगर समस्या है तो उसका समाधान भी है । ” सभी क्षेत्रों में सफल देशों की सूची में भारत का नाम तभी शामिल हो सकता है जब इस देश के नागरिक नई मानसिकता, नई तकनीक, नई ऊर्जा एवं नए दृढ़संकल्प के साथ देश को अग्रणी बनाने में अपना योगदान देंगे । निश्‍चित रूप से यह कठिन है मगर असंभव नहीं । सकारात्मकता के लीक पर चलकर हम इसे निश्‍चित रूप से पूरा कर सकते हैं । राष्ट्र के सर्वागीण विकास हेतु आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक पुनर्जागरण की आवश्यकता है । आर्थिक सुधार एवं विकास का फायदा जनसंख्या के बड़े भाग को मिले, यह हमें सुनिश्‍चित करना होगा । ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर योजनाएँ सुविधा संपन्‍न वर्गों के हित में ही होती है जबकि देश के विकास में सभी वर्गों का सम्मान योगदान है । क्या सरकार के खजाने …

यामाहा ने भारत में अपनी स्पोर्टी इमेज को और पुख्ता किया

मोटो जीपी वर्ल्ड चैम्पियन वैलेन्टीना रॉसी को पहली बार यामाहा भारत लाई
-इंडिया यामाहा के ब्रांड ऐम्बैसडर जॉन अब्राहम के साथ बातचीत करते हुए वैलेन्टीनो रॉसी ने यामाहा के साथ अपने खास रिश्ते के बारे में बताया -

इंडिया यामाहा मोटर प्रा. लि. ने आज अंतरराष्ट्रीय मोटर स्पोर्ट में अपनी लीडरशिप को मजबूती से जाहिर किया । कंपनी ने इस खेल के सबसे बड़े सितारे वैलेन्टीनो रॉसी को आज पहली बार भारतीय बाइक प्रेमियों से रूबरू कराया । कंपनी ने यह ताजा कदम अपनी वैश्‍विक योजनाओं में भारत के महत्व को रेखांकित करने के लिए उठाया है । इसी दिशा में काम करते हुए इससे पहले यामाहा दुनिया भर में मशहूर अपने मॉडल वीमैक्स (१,६७९सीसी), वाईजैड‍ऐफ-आर१ (९९८सीसी) तथा ऐमटी०१ (१,६७०सीसी) को भारतीय बाजार में लांच कर चुकी है । अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मोटो जीपी वर्ल्ड चैम्पियन वैलेन्टीनो रॉसी ने भारतीय बाइकिंग आइकॉन तथा इंडिया यामाहा के ब्रांड ऐम्बैसडर जॉन अब्राहम के साथ दिलचस्प बातचीत में यामाहा के साथ अपने खास रिश्ते के बारे में बताया । रॉसी ९ जनवरी को ऑटो ऐक्सपो में अपने प्रशंसकों से मिलने आए तथा उन्होंने यामाहा के स्टॉ…

मर्सीडीज-बेंज इंडिया ने मल्टी एक्सेल कोच के लॉन्च केसाथ लग्जरी यात्रा को नये मुकाम पर पहुंचाया

* मर्सीडीज- बेंज इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ३-एक्सेल लग्जरी कोच पहली बार भारत में लॉन्च की ।
* लग्जरी कोच चेसी की बारीकियों की पेशकश मर्सीडीज-बेंज करेगी जबकि कोच की बॉडी का निर्माण मर्सीडीज-बेंज की विशिष्टताओं और मानकों के अनुरूप सतलज मोटर्स करेगी ।
* नयी ३-एक्सेल कोच के बेजोड़ सुरक्षा एवं सुकून के मानक हैं वातावरण और अर्थ व्यवस्था से मेल खाते हुए ।
नयी दिल्ली - मर्सीडीज-बेंज ने आज अपनी बहुप्रतीक्षित ३एक्सेल लग्जरी कोच को पहली बार भारत में उतारने की घोषणा की । यह कोच मर्सीडीज-बेंज की ओ५०० आरएसडी २४३६ चेसी के साथ आयी है इसकी बॉडी की एसेम्बली भारतीय सहयोगी कम्पनी सतलज लिमिटेड द्वारा की जाएगी ।
डेमलर बसों के प्रमुख श्री हर्तमुट शिक ने कहा, “मर्सीडीज-बेंज कोच में मर्सीडीज ब्रांड की तमाम खूबियां समायी हैं । इनमें सुरक्षा, सुकून और टैक्नोलॉजी के उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्‍चित किया गया है । इसके अलावा कोच की मजबूत निर्माण क्वालिटी है और स्वामित्व की लागत को नियंत्रित रखा गया है । मुझे यकीन है कि भारत के ग्राहकों को यह बहुत पसंद आएगी । ”
मर्सीडीज- बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और …

फिएट द्वारा दिल्ली ऑटो एक्सपो में नवीनतम स्टाइल एवं तकनीक का प्रदर्शन

* फिएट ५०० बाइ डीजल’द डेनिम थीम शो कार का भारत में पहली बार हंगामीखेज प्रदर्शन
* कंपनी द्वारा लीनिया ड्‌यूएलॉजिक ट्रांसमिशन, ग्रैंड पंटो तथा अन्य दिलकश भविष्यगामी वाहनों की प्रस्तुति
* इन नये वाहनों के प्रदर्शन के माध्यम से फिएट की प्रौद्योगिक, खोजपरक, युवा केन्द्रित एवं पर्यावरणीय प्रतिबद्धता उजागर हुयी ।

भारतीय ऑटो सेक्टर में वर्ष २००९ की अपरिमित सफलता के उपरान्त फिएट ने ऑटो एक्सपो २०१० में आज अपने नये वैरिएंट्‌‍स का शानदार अंदाज में प्रदर्शन किया । ऑटो एक्सपो २००८ में स्थापित उच्च स्तरीय मानदंडों के समान ही फिएट ने इस वर्ष भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया और फिएट ५०० बाइ डीजल, लीनिया ड्‌यूएलॉजिक ट्रांसमिशन, लीनिया टी-जेट, ग्रैंड पंटो नेचुरल पावर, ग्रैंड पंटो स्पोर्ट्‌स तथा ग्रैंड पंटो ट्रेंन्ड्‌ज जैसे उम्दा मॉडलों का प्रदर्शन किया ।
पहली बार भारतीय उपभोक्‍ताओं को नवीन फिएट ५०० बाइ डीजल को बेहद नजदीक से देखने का अवसर मिला, यह डेनिम ब्रांड की एक शैलीबद्ध शो कार है । सभी के आकर्षण का केंद्र यह कार उच्च स्तरीय फैशन एवं ठोस परफार्मेस का प्रतीक है । इटली के अग्रणी हॉट-कॉचर डिजाइनर रे…

ऑटो एक्सपो में पहली बार कार और बाइक के ‘रैप्स’

मुंबई स्थित भारत की प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माता कंपनी, क्लासिक स्ट्राइप्स लिमिटेड कारों और बाइकों के लिए ‘स्मार्ट रैप्स’ प्रदर्शित किया । ‘स्मार्ट रैप्स’ क्लासिक स्ट्राइप्स के रिटेल ब्रांड, ऑटोग्रेफिक्स के नाम से बाजार में आ रहे हैं ।
क्लासिक स्ट्राइप्स लिमिटेड के मुख्य संचालन अधिकारी संजय भगत कहते हैं, “बदलते सोच के साथ ही, उपभोक्‍ता भी अपने स्वचालिक वाहनों के लिए ऐसे अनूठे ही स्टाइल देखना पसंद करता है, जिसमें उसकी जेब पर कोई अतिरिक्‍त बोझ न पड़े । उपभोक्‍ताओं की इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए हम ‘स्मार्ट रैप्स’ के रूप में एक ऐसा स्टाइल बाजार में उतारने जा रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखा गया ।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “छोटा सा बाजार होने के बावजूद, हम मानते हैं कि निश्‍चितरूप से यह हर उपभोक्‍ता की एक अलग स्टाइल की जरूरत को पूरा करेगा । ”
संजय भगत कहते हैं, “ब्रआंड ऑटोमोबाइल से जुड़ी चीजों के एक विविध क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जिनमें सबसे ताजा चीजे हैं, डोर विजर्स, स्टोन चिप फिल्मस, वॉल्ट डिस्ने ग्राफिक्स तथा फेशनर्स । ”
क्लासिक स्ट्राइप्स का फुटकर विभाग, ऑटोग्रेफिक्स का बहुत व्यापक औ…

वोल्वो ट्र्क्स इंडिया ने उतारा उच्च तकनीक वाली शक्‍तिशाली ट्रक

विश्‍व में हैवी ड्‌यूटी ट्रकों के अग्रणी उत्पादक एवं सम्पूर्ण कमर्शियल समाधान देने वाली कम्पनी वोल्वो ट्रक्स ने भारतीय सड़कों के लिए अपना सबसे शक्‍तिशाली और टैक्नोलॉजी की दृष्टि से बेहद उन्‍नत ट्रक एफएच ५२० पावरट्रॉनिक भारत में अब तक का सबसे ताकतवर और टैक्नोलॉजी के लिहाज से सबसे उन्‍नत ट्रक है और यह बेहद भारी परिवहन जरूरतों को पूरा करत है ।
वोल्वो एफएच ५२० पावरट्रॉनिक में वोल्वो पीटी ६०६ गियर बॉक्स है जिसमें पूरी तरह ऑटोमेटिक एवं बिल्ट इन हाइड्रॉलिक टॉर्क कन्वर्टर है । इससे गियर लीवर बटन के जरिये मैनुअल गियर परिवर्तन की सम्भावना सामने आयी है । पीटी ६०६ भारी परिवहन के लिए उपयोगी २६०० एनएम का ईजन टॉर्क देता है । इसमें वोल्वो ट्र्क्स इंडिया ने उतारा उच्च तकनीक वाली शक्‍तिशाली ट्रक गियर आसानी से बदले जा सकते हैं और गियर बदलते समय शक्‍ति और डिलीवरी में कोई परिवर्तन नहीं आता । इससे कठिन परिस्थिति में भी सुरक्षित स्टार्ट मिलती है ।
पीटी ६०६ को ईजन टॉर्क से मेल खाते हुए डिजाइन किया गया है और इससे शानदार पुलिंग पावर और चढ़ाई की क्षमता मिलती है । इसमें बिना लदी हुई हालत में ५९ किलोमीटर प्रति घंटा…

शिक्षा में हिंदू संस्कृति का विशेष ध्यान रखते हैं आर० पी० मलिक

पूर्वी दिल्ली के ख्यातिप्राप्त लवली पब्लिक स्कूल के निदेशक आर०पी० मलिक बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति काफी गंभीर रहते हैं । गोपाल प्रसाद द्वारा लिए गए साक्षात्कार के प्रमुख अंश ः-
हमारा प्रथम प्रयास होता है कि बच्चे ठीक-ठाक आएँ और चले जाँय तथा स्वस्थ हों क्योंकि जब स्वस्थ होंगे तभी पढ़ाई करेंगे । हमलोग योग, प्राणायाम, सूर्य प्रणाम और आध्यात्मिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हैं जिससे बच्चे स्वाभाविक रूप से अच्छे होंगे । हम हिंदू संस्कृति पर विशेष जोर देते हैं । बच्चे बोर ना हों, इसके लिए शिक्षा के साथ-साथ मनोरंजन एवं खेल भी आवश्यक है । विद्यालय में आध्यात्मिक संतों एवं योगाचार्यों के संदेश का लाभ सबों को मिले, इस पर भी हमारा झुकाव रहता है । आशाराम बापू एवं सुधांशुजी हमारे यहाँ पधार भी चुके हैं । आज बच्चों को भी संस्कार एवं आस्था चैनल के कार्यक्रमों को देखने चाहिए । आज के बच्चे पहले से काफी जागृत हैं । बच्चों के जागरूक होने के कारण ही वे सुनते सबकीं है परन्तु करते अपने मन की हैं ।
हमारे देश में विद्यालय का वातावरण घर में जाता है जबकि पश्‍चिमी देशों में स्थिति ठीक इसके उल…

पूर्वी दिल्ली के वाहन व्यवसाय पर एक नजर

वाहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की जुबानी, ग्राहकों के हित में एक खोज-पड़ताल

पूर्वी दिल्ली में प्रतिष्ठित प्राईम होडा कार शोरूम के प्रबंधक शाहजी जॉर्ज के अनुसार “जापानी कंपनी इतोबो कॉरपोरेशन की सहभागी कंपनी प्राईम होंडा की मुख्य शाखा वैशाली में डाबर के पीछे है तथा दूसरी पटपड़गंज में है । वे बताते हैं कि होंडा कार में सबसे लक्जरी सेगमेंट कहलाता है । पहले हुंडई के उत्पाद ज्यादा बिकते थे परन्तु अब स्थिति बदल चुकी है । पूर्वी दिल्ली के पॉश कॉलनी आई.पी.एक्स., मयूर विहार इलाके में सबसे ज्यादा बिजनेसमैन और एमएनसी में काम करने वाले लोगों की पसंद होंडा सिटी मॉडल है । गाड़ी खरीदने में ग्राहकों का मुख्य रूप से ध्यान हमारी कंपनी के उत्पादों के प्रति ज्यादा इसलिए है क्योंकि इसका फ्यूल एफिसिएंसी १६+ का ऐवरेज देता है । इसका रीसेल वैल्यू अच्छा है । मेंटनेंस कॉस्ट बहुत कम है । वे ग्राहकों से गाड़ी खरीदने के पूर्व “टोटल कॉस्ट ऑफ ऑनरशिप” कितने साल गाड़ी रखेंगे आदि प्रश्न पूछने के बाद अपनी सलाह देते हैं ।
ड्रीजल गाड़ी में मेंटनेस का खर्चा पेट्रोल गाड़ी के बनिस्पत ज्यादा होता है । पेट्रोल गाड़ी का पिक‍अप …

पर्यावरण संरक्षण हेतु जनचेतना का सजीव चित्रण

कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन रोकने की दिशा में समझौता कहा जाने वाला मसौदा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होने, कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए बगैर लक्ष्य जैसा रहा । आश्‍चर्य की बात यह है कि विकसित देशों ने दो दशक पूर्व ही पर्यावरण असंतुलन को लेकर चिंतित थे परन्तु यह मात्र चिंता ही बनकर रह गई । विकसित देश कार्बन उत्सर्जन में आगे रहते हैं और उसे कम करने में पीछे हो जाते हैं । धीरे-धीरे पर्यावरण के समक्ष चुनौतियाँ कठिन होती जा रही है । विश्‍व के प्रमुख देशों द्वारा पर्यावरण की अनदेखी कर संसाधनों के बेतहाशा दोहन में तो संलग्न हैं ही साथ ही वे हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में पहल भी नहीं कर रहे हैं । विकास के नाम पर पर्यावरण की जान बूझकर उपएक्षा तथा विलासी जीवनशैली की प्रवृत्ति संपूर्ण विश्‍व के लिए घातक है । अंततः जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणाम सभी को भुगतने पड़ेंगे । हमारा देश भी इस प्रवृत्ति से वंचित नहीं है । हमें सर्वप्रथम पर्यावरण को क्षति पहुँचानेवाले कारणों की समीक्षा तथा जनचेतना की आवश्यकता है । एक तरफ जहाँ हिमालय पर्वत की चोटिओं के बर्फ तेजी से पिघलकर बाढ का तांडव…

मिथिला राज्य के लिए जंतर मंतर पर धरना

प्रो० उदय शंकर मिश्र, मिथिला राज्य संघर्ष समिति के केन्द्रीय महासचिव ने कहा मिथिला राज्य आन्दोलन की पहली आवाज १९०५ ई० में काशी (उ० प्र०) में म० म० पं० मुरलीधर झा ने उठाया था । उन्होंने बंगाल का बँटवारा कर बिहार राज्य के पुर्नगठन का विरोध किया था उन्होंने मिथिला राज्य के ऐतिहासिकता के आधार पर मिथिला राज्य के पुर्नगठन का विरोध किया था । उन्होंने मिथिला राज्य के एतिहासिकता के आधार पर मिथिला राज्य के पुर्नगठन की माँग की थी । १९५० के दशक में पं० जानकी नन्दन सिंह, डा० लक्ष्मण झा के नेतृत्व में राज्य पुर्नगठन आयोग के समक्ष मैथिली भाषा के आधार की सीमा की चर्चा महाविष्णु पुरआण एवं जार्ज अब्राहम ग्रीयर्सन के आधार पर नेपाल के ९ जिले एवं भारतीय क्षेत्र में दरभंगा प्रमण्डल, तिरहुत, मुँगेर, कोशी, पूर्णियाँ, भागलपुर प्रमण्डल समेत झारखण्ड के दुमका प्रमण्डल को रखा गया है । हमलोग भारतीय संविधान के अन्तर्गत भारतीय क्षेत्र में पड़नेवाले मिथिला के भाग को मिथिला राज्य के पुर्नगठन की माँग करते हैं ।
प्रो मिश्र ने कहा कि सर्वागीण विकास एवं खासकर आर्थिक विकास के लिए मिथिला राज्य के पुनर्गठन की माँग करते है…

ग्राहकों को सर्वोत्तम सेवा देना ही मुख्य मकसद

मारूति सुजूकी इंडिया लिमिटेड, सुमितोमो कॉर्पोरेशन एवं मारूति कंट्रीवाईड के संयुक्‍त उपक्रम के रूप में ‘मारूति सर्विस मास्टर्स’ नामक नई कंपनी मारूति गाड़ियों के सर्विसेज में संलग्न है । कंपनी को ऊचाई प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले व कंपनी के थिंक टैंक समझे जाने वाले प्रतिभावान डायरेक्टर एवं सीईओ ए. चौधरी से एक्सपो न्यूज पत्रिका के संपादक गोपाल प्रसाद से बातचीत के प्रमुख अंश ः

मारूति सुजुकी कंपनी को एक नए कंपनी के गठन की आवश्यकता क्यों पड़ी?
इस कंपनी का मूल उद्देश्य “मॉडल वर्कशाप सेट” स्थापित करना था था, जिसके माध्यम से सेवा से संबंधित मानकों की संस्तुति की जा सके । वास्तव में ग्राहक को सर्वोत्तम सेवा देना ही हमारा मुख्य मकसद है । हमारे डीलरों के वर्कशॉप हेतु यह एक ‘रेफरेंस प्वाइंट’ है । इसे आप मारूति सर्विस की प्रयोगशाला भी समझ सकते हैं । मारूति गाड़ियों का यह रेफरल हॉस्पिटल है । सर्विस, टाइम और एक्यूरेट फीडबैक पर ध्यान देना हमारा कर्त्तव्य है, जिससे हमारे कर्मचारी यथाशीघ्र पालन करते हैं । पहले दिल्ली के नारायणा में डिविजन मात्र था, पर १९९९ में यह कंपनी का रूप ले लिया । ग…

विकास के नाम पर बांघ निर्माण बहुत बड़ा धोखा

क्यों बन रही हैं बांघ परियोजनाएं?

* आज देश के कुल स्थापित ऊर्जा लगभग १,४०,००० मेगावाट है । इसी प्रकार लौहारीनाग-पाला (६०० मैगावाट) तथा पाला-मनेरी (४८० मैगावाट) मिलाकर भी देश की कुल ऊर्जा में एक प्रतिशत भी योगदान नहीं करेगी । जब कि इसकी कीमत देश को गंगा की बलि देकर तथा उससे जुड़े दिव्य पर्यावरण व राष्ट्रीय संस्कृति के भारी विनाश पर चुकानी पड़ेगी । आज ऊर्जा के कई विकल्प आधुनिक विज्ञान हो चुका है और ऊर्जा, पवन ऊर्जा, वायुमास, भुतापी ऊर्जा, समुद्र की लहरों से प्राप्त होने वाली ऊर्जा के साथ ही कई अन्य साधनों पर सफल खोजे हो चुकी है । यह सब जानते है इस दिव्य राष्ट्रीय नदी की उदगम घाटी में इतना बड़ा खिलवाड़ होने दिया जाना बांध परियोजनाओं एवम्‌ इससे जुड़े तंत्र के देश व्यापी भ्रष्टाचार को उजागर करत अहै ।
* चिन्ताजनक दर से गंगौत्री ग्लेशियर का पिघलना क्षेत्र का अति संवेदनशील भूंकप जो ५ में होने के बावजूद भी एक के बाद एक बांध बनाने की तैयारी है, क्योंकि बड़ी-बड़ी लोहे की मशीनें, सीमेंट, कंकीट, सरीया आदि के उद्योगों की खपत सुरंगो, बराज आदि निर्माण में आसानी से होती है तथा इस प्रकार से बांधों द्वारा एक वि…

वैचारिक क्रांति की धारा को गति दे रही है डॉ० मुक्‍ता की रचनाएँ

स्त्रियों पर विचारहीनता का आरोप लगाया जाता है, मगर यह समझने की जरूरत है कि अनुभवों से ही विचार आता है और स्त्री विमर्श में अब वैचारिक लेखन की शुरूआत हो गई है । विचार का वध संभव नही है डॉ० मुक्‍ता ने बड़े साहस के साथ पुरूषसत्ता के औचित्य और शोषण का सटीक चित्रण प्रस्तुत किया है । उनके लेखनी के अकाट्‌य सत्य के अनुभूति और वैचारिक क्रांति की धारा को गति मिले यही हमारी आकांक्षा है । इनके कविताओं के मूल्यांकन पर मैं इतना ही कहूँगा कि “डॉ० मुक्‍ता की लेखनी सच्चाई से रूबरू तो कराती ही है साथ ही साथ समाजिक व्यवस्था के प्रति विद्रोह का जनसंचार करने की पूरी क्षमता है । एक पुरूष होने के बावजूद मैं उनके अन्याय, शोषण, विकृति तथा सांस्कृतिक कुठाराघात के खिलाफ स्वर को प्रणाम करता हूँ । संग ही इस सारगर्भित पुस्तक (अस्मिता) के अतिशीघ्र द्वितीय संस्करण किसी संस्था द्वारा प्रायोजित होने की कामना करता हूँ । जिससे इसके अधिकाधिक प्रतियों का प्रकाशन हो सके और अधिकांश पाठक इनके कविताओं का रसास्वादन ले सकें । ‘अस्मिता’ वास्तव में पाठकों को अपने अस्मिता का मान कराती है । समाज में पनप रही विकृति जो वास्तव में पश्‍…
कम खर्च में ज्यादा लाभ का सुनहरा अवसर

प्रिय महोदय,

भारत की राजधानी दिल्ली में अपने व्यापारिक अनुभवों से आप अवश्य परिचित होंगे । जिन कंपनियों/संस्थाओं के यहाँ कार्यालय या प्रतिनिधि नहीं है, वे दिल्ली से प्राप्त होने वाले व्यापक व्यापारिक संभावनाओं से वंचित हैं । ऐसी कंपनियों/संस्थाओं के लिए हम अपनी सेवाएँ आपके बजट के अनुरूप दे सकते हैं ।
आज हर कंपनियों/संस्थाओं के समक्ष प्रचार-प्रसार एवं समन्वय का संकट है । इसके अभाव में आप प्रतिस्पर्धी कंपनियों को चुनौती एवं अपने अस्तित्व की रक्षा नहीं कर सकते । इस महत्वपूर्ण सच्चाई को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यवसायियों के प्रगति हेतु हम मीडिया समन्वयक ( Media Co-ordinator), कार्यक्रम समन्वयक ( Event Co-ordinator), लायजनिंग प्रतिनिधि ( Liaisoning Agent) के रूप में आपके विभिन्‍न समस्याओं का समाधान कर सकते हैं । हम आपके व्यवसाय और बाजार की संभावना के मध्य मजबूत धुरी के रूप में होंगे ।
सत्यमेव जयते जनसंपर्क एजेन्सी, औद्योगिक एवं व्यापरिक इकाइयों को विभिन्‍न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करता है तथ अव्यापार की वृद्ध…

SAVDHAN -PRITHAVI TAP RAHI HAI !

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर संपूर्ण विश्‍व में दहशत का माहौल है । एक मोटे अनुमान के मुताबिक सन्‌ २०५० तक यदि धरती के तापमान में दो डिग्री की कमी नहीं हुई तो धरती, मानव और अन्य जीवधारियों के जीवन के लिए कष्टकारी हो जाएगी । इस गंभीर चिंतन को लेकर गत दिनों विश्‍व के अनेक देश कोपेनहेगेन में चर्चा हेतु जुटे थे । ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर मुद्‌दे को लेकर बुलाया गया यह सम्मेलन दबंग देशों की राजनीति का शिकार हो गया । अनेक देशों ने जिम्मेदार ना होते हुए भी भारत को कठघरे में घेरने का प्रयास किया । हालाँकि विकासशील देशों की अग्रिम पंक्‍ति में खड़े भारत के नेताओं ने विकसित देशों के इस षडयंत्र का मुँहतोड़ जबाब दिया । परिणामस्वरूप कार्बन कटौती को लेकर अन्य देशों को भी उत्तरदायित्व उठाने पर विवश होना पड़ा । संपूर्ण मानवता के लिए बेहद खतरनाक होती जा रही ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे को सभी राजनीतिक पार्टियों को अपने घोषणापत्र में शामिल कर इसका समाधान हेतु सक्रिय होना चाहिए । ग्रीन हाउस गैसों में कटौती और कार्बन कटौती को लक्ष्य बनाकर सभी बुद्धिजीवी, मीडिया को समाचार, विचार एवं ज्ञान के द्वारा अपना भागीदारी अवश्…

स्विस ऑटो ने कहा “ओवर सोल्यूशन ड्राईव यू बेटर”

प्रगति मैदान में आयोजित ऑटो एक्सपो के हॉल नं० १८ में अंतिम दिन उत्साह व धर्म स्विस ऑटो द्वारा लकी ड्रॉ विनर को ससम्मान बाईक की चाभी सौंपी गई । जिसके प्रथम विजेता कंपनी के वरकर्र आर० वी० आटो सेन्टर, पालम डाबड़ी रोड, दिल्ली के मालिक नरेन्द्र कुमार, द्वितीय विजेता चौधरी सेल परचेज, सफीदोन जिला जींद हरियाणा के मालिक मंजीत सिंह तथा तीसरे विजेता सामान्य दर्शक वर्ग से उत्तम नगर, दिल्ली के आईटी कंसलटेंट प्रवीण शर्मा थे । कंपनी द्वारा इस अवसर पर उत्साहपूर्ण, माहौल में मिलन समारोह भी रखा गया था जिसमें कंपनी के ऊपर से नीचे स्तर के संचालनकर्मी मौजूद थे ।
स्विस ऑटो के जेनरल मैनेजर अरूण सूद के अनुसार सभी वाहनों के इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रिक पार्ट्‌स (लून असे लीलंड तक) उनकी कंपनी उत्पादित करती है, जो विस्तृत रेंज में मौजूद है । दो से तीन दिनों के अंदर ही ९०-९५% माल ऑर्डर की आपूर्त्ति भी कर दी जाती है ।
कंपनी की दिल्ली में ३ (राजस्थानी उद्योग नगर, जी० टी० करनाल रोड), तथा हिमाचल प्रदेश (कलाम, जिला सिरमौर) में १ निर्माण इकाई कार्यरत है । विशेष रूप से इनका ध्यान निर्यात पर है । ईबाईक्स की ज्यादातर कंपनियाँ …

अलग मिथिला राज्य का गठन क्यों नहीं?

[भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के द्वारा की गई विभिन्‍न भाषाओं के अध्ययन के अंतर्गत मैथिली भाषायों की संख्या (२००१ के अनुसार) भारत में कुल १२,१७९१२२ है । जबकि वास्तविक रूप में यह संख्या कई गुणा अधिक है । ]

“मिशन मिथिला” ने संयोजक गोपाल प्रसाद ने अपने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कि जब पृथक तेलंगाना राज्य का गठन हो सकता है तो अलग मिथिला राज्य का गठन क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि मिथिलांचल को पूर्ण न्याय अभी तक नहीं मिला है । सभी क्षेत्रों में मिथिलांचल की घोर उपेक्षा हो रही है । केन्द्र सरकार और बिहार सरकार ने अभी तक कोई उद्योग इस क्षेत्र में शुरू किया है, जिससे इस क्षेत्र के लोग पलायन को मजबूर हैं । असमान विकास के चलते देश का पिछड़ा राज्य बिहार में मिथिला अतिपिछड़ा क्षेत्र बनकर रह गया है । बिहार सरकार का पूरा ध्यान मात्र पटना एवं नालंदा को विकसित करना रह गया है ।
मिथिला में पर्यटन एवं खाद्य प्रसंस्करण हेतु भरपूर संभावना के बावजूद इसके साथ नकारात्मक रवैया अपनाया जा रहा है । इस क्षेत्र की भाषा मैथिली एवं मैथिला अकादमी अपने अस्तित्व हेतु संघर्ष कर रही है । बिहार सरकार के ‘युवा महोत्सव’ ए…

जिनका लक्ष्य है संस्कृत शिक्षा में सुधार लाना

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एवं हिंदी के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार सिद्धेश्‍वर से गोपाल प्रसाद द्वारा लिए गए साक्षात्कार के मुख्य अंश ः

प्रश्न ः बिहार संकृत शिक्षा बोर्ड की स्थापना कब हुई तथा इसका उद्देश्य क्या है?
उत्तर ः बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की स्थापना सन्‌ १९८१ में हुई जिसका उद्देश्य था संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार एवं संस्कृत शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार । संस्कृत भाषा के साथ लोगों ने ऐसा व्यवहार किया कि यह भाषा विलुप्त होने के कगार पर है । इसका मूल कारण उपर से नीचे तक भ्रष्टाचार व्याप्त होना है । प्रथमा, मध्यमा के केन्द्र का विक्रय हो रहा था । जितने विद्यालय हैं, वे शिक्षकों के झोले में हैं । संस्कृत शिक्षा की ओट में संस्कृत व्यापार बनकर रह गई । संस्कृत के बहाने मात्र दुकानदारी चलाई जा रही थी ।

प्रश्न ः आपके अध्यक्ष बनने के बाद क्या परिवर्तन हुआ?
उत्तर - १५ सितंबर २००८ को मैं इस बोर्ड का चेयरमैन बना । संस्कृत के विद्वानों से आशा क्षीण होने तथा भ्रष्टाचार के कारण ही हिंदी के साहित्यकार को दायित्व मिला ।

प्रश्न ः हिंदी के साहित्यकार संस्कृत की अनिवार्यता के मुद्दे को…

गंगा- एक लुप्त होती नदी

“उत्तरकाशी से गंगोत्री तक शेष बचे अंतिम प्राचीन सतत प्रवाह का चलता विनाश गंगा आह्यान ः गंगा के नैसर्गिक एवं सांस्कृतिक प्रवाह के लिए एक जन‍आंदोलन

सरकार क्या करने जा रही है?
आजकल सरकार गंगा पर बांधों की श्रृंखला की निर्माण प्रक्रिया में लगी है जो कि प्राचीन हिमालय में इसके स्त्रोत निकट गंगोत्री से प्रारंभ होती है, ये परियोजनाएँ टिहरी बांध एवं हरिद्वार तक के अन्य बांधों को जाकर मिलेंगी ।

इस प्रकार गंगोत्री से हरिद्वार तक गंगा का संपूर्ण बहाव वास्तव में बांधों की श्रुंखला है ।

इन परियोजनाओं में क्या समाहित है?
ये परियोजनाएं सुरंग तथा ऊर्जागृह की निर्माण प्रक्रिया में पहाड़ों में विस्फोटों, खुदाई और पहाड़ी ढलानों को गिराने से हो रहे हिमालय के भारी-विनाश को समाहित करती हैं, इनमें शामिल है, जंगलों का कटना, पेड़ों क अकटना, हमारे पहाड़ों के प्राचीन एवं अनछुए भागों का मलिन होना तथा स्थायी रूप से संपूर्ण घाटी का भयभीत होना, अंततः चूंकि परियोजनाएँ लगातार एक के बाद एक हैं, यह संपूर्ण नदी को बिना किसी विराम के अंधियारी प्रकाशविहीन सुरंगों में डालकर भूमिगत बना रही हैं ।

वर्तमान परियोजनाएँ जिनका तत्काल …