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Showing posts from April, 2010
कम खर्च में ज्यादा लाभ का सुनहरा अवसर

प्रिय महोदय,

भारत की राजधानी दिल्ली में अपने व्यापारिक अनुभवों से आप अवश्य परिचित होंगे । जिन कंपनियों/संस्थाओं के यहाँ कार्यालय या प्रतिनिधि नहीं है, वे दिल्ली से प्राप्त होने वाले व्यापक व्यापारिक संभावनाओं से वंचित हैं । ऐसी कंपनियों/संस्थाओं के लिए हम अपनी सेवाएँ आपके बजट के अनुरूप दे सकते हैं ।
आज हर कंपनियों/संस्थाओं के समक्ष प्रचार-प्रसार एवं समन्वय का संकट है । इसके अभाव में आप प्रतिस्पर्धी कंपनियों को चुनौती एवं अपने अस्तित्व की रक्षा नहीं कर सकते । इस महत्वपूर्ण सच्चाई को विशेष रूप से ध्यान में रखकर लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यवसायियों के प्रगति हेतु हम मीडिया समन्वयक ( Media Co-ordinator), कार्यक्रम समन्वयक ( Event Co-ordinator), लायजनिंग प्रतिनिधि ( Liaisoning Agent) के रूप में आपके विभिन्‍न समस्याओं का समाधान कर सकते हैं । हम आपके व्यवसाय और बाजार की संभावना के मध्य मजबूत धुरी के रूप में होंगे ।
सत्यमेव जयते जनसंपर्क एजेन्सी, औद्योगिक एवं व्यापरिक इकाइयों को विभिन्‍न प्रकार की सेवाएँ प्रदान करता है तथ अव्यापार की वृद्ध…

SAVDHAN -PRITHAVI TAP RAHI HAI !

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर संपूर्ण विश्‍व में दहशत का माहौल है । एक मोटे अनुमान के मुताबिक सन्‌ २०५० तक यदि धरती के तापमान में दो डिग्री की कमी नहीं हुई तो धरती, मानव और अन्य जीवधारियों के जीवन के लिए कष्टकारी हो जाएगी । इस गंभीर चिंतन को लेकर गत दिनों विश्‍व के अनेक देश कोपेनहेगेन में चर्चा हेतु जुटे थे । ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर मुद्‌दे को लेकर बुलाया गया यह सम्मेलन दबंग देशों की राजनीति का शिकार हो गया । अनेक देशों ने जिम्मेदार ना होते हुए भी भारत को कठघरे में घेरने का प्रयास किया । हालाँकि विकासशील देशों की अग्रिम पंक्‍ति में खड़े भारत के नेताओं ने विकसित देशों के इस षडयंत्र का मुँहतोड़ जबाब दिया । परिणामस्वरूप कार्बन कटौती को लेकर अन्य देशों को भी उत्तरदायित्व उठाने पर विवश होना पड़ा । संपूर्ण मानवता के लिए बेहद खतरनाक होती जा रही ग्लोबल वार्मिंग के मुद्दे को सभी राजनीतिक पार्टियों को अपने घोषणापत्र में शामिल कर इसका समाधान हेतु सक्रिय होना चाहिए । ग्रीन हाउस गैसों में कटौती और कार्बन कटौती को लक्ष्य बनाकर सभी बुद्धिजीवी, मीडिया को समाचार, विचार एवं ज्ञान के द्वारा अपना भागीदारी अवश्…

स्विस ऑटो ने कहा “ओवर सोल्यूशन ड्राईव यू बेटर”

प्रगति मैदान में आयोजित ऑटो एक्सपो के हॉल नं० १८ में अंतिम दिन उत्साह व धर्म स्विस ऑटो द्वारा लकी ड्रॉ विनर को ससम्मान बाईक की चाभी सौंपी गई । जिसके प्रथम विजेता कंपनी के वरकर्र आर० वी० आटो सेन्टर, पालम डाबड़ी रोड, दिल्ली के मालिक नरेन्द्र कुमार, द्वितीय विजेता चौधरी सेल परचेज, सफीदोन जिला जींद हरियाणा के मालिक मंजीत सिंह तथा तीसरे विजेता सामान्य दर्शक वर्ग से उत्तम नगर, दिल्ली के आईटी कंसलटेंट प्रवीण शर्मा थे । कंपनी द्वारा इस अवसर पर उत्साहपूर्ण, माहौल में मिलन समारोह भी रखा गया था जिसमें कंपनी के ऊपर से नीचे स्तर के संचालनकर्मी मौजूद थे ।
स्विस ऑटो के जेनरल मैनेजर अरूण सूद के अनुसार सभी वाहनों के इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रिक पार्ट्‌स (लून असे लीलंड तक) उनकी कंपनी उत्पादित करती है, जो विस्तृत रेंज में मौजूद है । दो से तीन दिनों के अंदर ही ९०-९५% माल ऑर्डर की आपूर्त्ति भी कर दी जाती है ।
कंपनी की दिल्ली में ३ (राजस्थानी उद्योग नगर, जी० टी० करनाल रोड), तथा हिमाचल प्रदेश (कलाम, जिला सिरमौर) में १ निर्माण इकाई कार्यरत है । विशेष रूप से इनका ध्यान निर्यात पर है । ईबाईक्स की ज्यादातर कंपनियाँ …

अलग मिथिला राज्य का गठन क्यों नहीं?

[भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के द्वारा की गई विभिन्‍न भाषाओं के अध्ययन के अंतर्गत मैथिली भाषायों की संख्या (२००१ के अनुसार) भारत में कुल १२,१७९१२२ है । जबकि वास्तविक रूप में यह संख्या कई गुणा अधिक है । ]

“मिशन मिथिला” ने संयोजक गोपाल प्रसाद ने अपने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कि जब पृथक तेलंगाना राज्य का गठन हो सकता है तो अलग मिथिला राज्य का गठन क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि मिथिलांचल को पूर्ण न्याय अभी तक नहीं मिला है । सभी क्षेत्रों में मिथिलांचल की घोर उपेक्षा हो रही है । केन्द्र सरकार और बिहार सरकार ने अभी तक कोई उद्योग इस क्षेत्र में शुरू किया है, जिससे इस क्षेत्र के लोग पलायन को मजबूर हैं । असमान विकास के चलते देश का पिछड़ा राज्य बिहार में मिथिला अतिपिछड़ा क्षेत्र बनकर रह गया है । बिहार सरकार का पूरा ध्यान मात्र पटना एवं नालंदा को विकसित करना रह गया है ।
मिथिला में पर्यटन एवं खाद्य प्रसंस्करण हेतु भरपूर संभावना के बावजूद इसके साथ नकारात्मक रवैया अपनाया जा रहा है । इस क्षेत्र की भाषा मैथिली एवं मैथिला अकादमी अपने अस्तित्व हेतु संघर्ष कर रही है । बिहार सरकार के ‘युवा महोत्सव’ ए…

जिनका लक्ष्य है संस्कृत शिक्षा में सुधार लाना

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एवं हिंदी के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार सिद्धेश्‍वर से गोपाल प्रसाद द्वारा लिए गए साक्षात्कार के मुख्य अंश ः

प्रश्न ः बिहार संकृत शिक्षा बोर्ड की स्थापना कब हुई तथा इसका उद्देश्य क्या है?
उत्तर ः बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की स्थापना सन्‌ १९८१ में हुई जिसका उद्देश्य था संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार एवं संस्कृत शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार । संस्कृत भाषा के साथ लोगों ने ऐसा व्यवहार किया कि यह भाषा विलुप्त होने के कगार पर है । इसका मूल कारण उपर से नीचे तक भ्रष्टाचार व्याप्त होना है । प्रथमा, मध्यमा के केन्द्र का विक्रय हो रहा था । जितने विद्यालय हैं, वे शिक्षकों के झोले में हैं । संस्कृत शिक्षा की ओट में संस्कृत व्यापार बनकर रह गई । संस्कृत के बहाने मात्र दुकानदारी चलाई जा रही थी ।

प्रश्न ः आपके अध्यक्ष बनने के बाद क्या परिवर्तन हुआ?
उत्तर - १५ सितंबर २००८ को मैं इस बोर्ड का चेयरमैन बना । संस्कृत के विद्वानों से आशा क्षीण होने तथा भ्रष्टाचार के कारण ही हिंदी के साहित्यकार को दायित्व मिला ।

प्रश्न ः हिंदी के साहित्यकार संस्कृत की अनिवार्यता के मुद्दे को…

गंगा- एक लुप्त होती नदी

“उत्तरकाशी से गंगोत्री तक शेष बचे अंतिम प्राचीन सतत प्रवाह का चलता विनाश गंगा आह्यान ः गंगा के नैसर्गिक एवं सांस्कृतिक प्रवाह के लिए एक जन‍आंदोलन

सरकार क्या करने जा रही है?
आजकल सरकार गंगा पर बांधों की श्रृंखला की निर्माण प्रक्रिया में लगी है जो कि प्राचीन हिमालय में इसके स्त्रोत निकट गंगोत्री से प्रारंभ होती है, ये परियोजनाएँ टिहरी बांध एवं हरिद्वार तक के अन्य बांधों को जाकर मिलेंगी ।

इस प्रकार गंगोत्री से हरिद्वार तक गंगा का संपूर्ण बहाव वास्तव में बांधों की श्रुंखला है ।

इन परियोजनाओं में क्या समाहित है?
ये परियोजनाएं सुरंग तथा ऊर्जागृह की निर्माण प्रक्रिया में पहाड़ों में विस्फोटों, खुदाई और पहाड़ी ढलानों को गिराने से हो रहे हिमालय के भारी-विनाश को समाहित करती हैं, इनमें शामिल है, जंगलों का कटना, पेड़ों क अकटना, हमारे पहाड़ों के प्राचीन एवं अनछुए भागों का मलिन होना तथा स्थायी रूप से संपूर्ण घाटी का भयभीत होना, अंततः चूंकि परियोजनाएँ लगातार एक के बाद एक हैं, यह संपूर्ण नदी को बिना किसी विराम के अंधियारी प्रकाशविहीन सुरंगों में डालकर भूमिगत बना रही हैं ।

वर्तमान परियोजनाएँ जिनका तत्काल …

अलग मिथिला राज्य आंदोलन पर एक पैनी दृष्टि

अलग मिथिला राज्य की माँग वर्षों पुरानी है । इसके लिए कई बार धरना प्रदर्शन सभी, गोष्ठियाँ तथा माँगपत्र दिए जा चुके हैं । ३ अगस्त २००४ में बिहार से अलग करके झारखंड राज्य का गठन किया गया । ४ अगस्त २००४ को एक प्रेस कांफ्रेंस में बिहार के पूर्व महाधिवक्‍ता एवं भाजपा नेता पं० ताराकांत झा ने अलग मिथिला राज्य हेतु आंदोलन की घोषणा की । वे चंदा झा के रामायण तथा महाविष्णुपुराण के अनुसार मिथिला के गठन के पैरोकार रहे । भाजपा से निष्काशित होने पर वे मिथिला आंदोलन को हवा देते रहे परन्तु विधान परिषद सदस्य बनते ही अआंदोलन को ढंढे बस्ते में डाल दिया ।
वर्तमान में अलग मिथिला राज्य हेतु सर्वाधिक सक्रिय संस्था “अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद” की बागडोर मुख्यतः डॉ० धनाकर ठाकुर एवं डॉ० कमलाकान्त झा ने संभाल रखी है । अधिकांश राज्यों में संस्था ने अपनी प्रदेश शाखाओं का विस्तार एवं जनसंगठन तैयार किया है । संस्था द्वारा दिसंबर में कानपुर में राष्ट्रीय अधिवेशन एवं जंतर-मंतर पर धरने का आयोजन किया गया जिसमें आंदोलन से जुड़े जमीनी कार्यकर्त्ताओं की सहभागिता रही । उधर विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव वैद्यनाथ चौधरी बैज…