गुरुवार, 8 सितंबर 2011

समर्थ एवं सशक्त जन लोकपाल के कार्यकलाप संबंधी कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव

सरकारी मशीनरी सरकारी धन के दुरुपयोग रोकने में सक्षम नहीं है , इसलिए जन लोकपाल के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग रोकने के उपाय किए जांय और इस हेतु एक मॉनीटरिंग प्रणाली विकसित करे . हर व्यक्ति जो सरकार से वेतन पाता है , की जिम्मेदारी तय हो . आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर उसके विरुद्ध समयसीमा के अंतर्गत कानूनी कारवाई की जाए और उस संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित की जाए. इस सम्बन्ध में बिहार सरकार के मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए.

जन लोकपाल द्वारा इंडियन सिविल सर्विस के सभी कैडरों (IAS /IPS /IRS /IFS आदि) पर विशेष निगरानी रखी जाए. इनसे सम्बंधित शिकायतों की अबिलम्ब जाँच की जाए तथा उस पर त्वरित करवाई हो , साथ ही जाँच होने तक उन अधिकारीयों को संवेदनशील पदों से मुक्त किया जाना चाहिए. ये जनता के सेवक हैं न की देश को लूटने के लिए नियुक्त किए गए हैं.

सभी राजनैतिक घराने /वंश, जिनके पास आजादी के बाद अकूत संपत्ति आई है और वास्तव में जो देश का पैसा है , उसे सरकारी खजाने में लाया जाए तथा उसका उपयोग देश के बुनियादी आवश्यकताओं/ समस्याओं, आधारभूत संरचनाओं एवं सुविधाओं के विकास पर खर्च हो , जैसे -मधु कोड़ा, लालू यादव, रामविलास पासवान, जयललिता, मायावती, मुलायम सिंह यादव , अमर सिंह, प्रकाश सिंह बादल, चौटाला परिवार, करूणानिधि परिवार , देवगौड़ा/कुमारस्वामी परिवार ,कर्णाटक के रेड्डी बंधु, आन्ध्र प्रदेश के जगन रेड्डी आदि. जन लोकपाल के माध्यम से एक बड़े परिदृश्य में इस विन्दु पर जाँच की जाए एवं उस पर कड़ी से कड़ी करवाई हो.

जन लोकपाल द्वारा फेरा कानून के उल्लंघन करनेवाले, अवैध मनी लौन्डरिंग, हवाला एवं आतंकवादी गतिविधियों हेतु फंडिंग करनेवाले तत्वों उससे सम्बंधित पूरे नेटवर्क और उसके सरगनाओं को कानून के सीखचों में लाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए . सरकारी ढिलाई एवं कानूनी खामियों का फायदा उठाकर ऐसे तत्व देश के नीव को खोखला करने में संलग्न हैं. दाउद अब्राहिम ,छोटा शकील , छोटा राजन , हसन अली , हवाला केस में अभियुक्त जैन बंधु एवं हर्षद मेहता , चंद्रास्वामी जैसे बड़ी हस्तियों को शिकंजे में कसने की एकसूत्रित कारवाई हो.

जन लोकपाल द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज़ उठानेवाले व्हिसल ब्लोअर एवं आरटीआई एक्टिविस्टों की हत्या होने पर शहीद का दर्जा दिया जाए एवं उन्हें शहीदों को मिलनेवाली सभी सुविधाएँ प्राप्त हो सके , जिससे देश के सजग प्रहरियों के परिवार को आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा तथा सरकारी सहायता राशि के साथ- साथ सम्मान भी दिया जाना सुनिश्चित करने की योजना पर अमल करवाने की जिम्मेवारी हो.

जन लोकपाल द्वारा प्रशासनिक सुधार हेतु जिम्मेदार विभाग (DOPT)के सभी विभागीय आदेश/ नीति/ नियमावली के समीक्षा की जिम्मेदारी भी हो ताकि मात्र सर्कुलर जरी कर निश्चिन्त हो जाने एवं उसपर पूर्णतः अमल नहीं होने की शिकायत दूर की जा सके. सीबीआई को आरटीआई एक्ट के दायरे से अलग करने संबंधी सर्कुलर (जो कैबिनेट में पास नहीं हुआ है और जिसका जिक्र सरकारी गजट में भी नहीं है ) को रोकना तथा आरटीआई एक्ट के धारा -4 (जो बर्ष 2006 तक में सभी विभागों में पालन हो जाना था)का पालन अब तक सभी मंत्रालयों में लागू नहीं होने पर सरकार से प्रश्न पूछने एवं कारवाई करवाने की जिम्मेवारी भी हो.

जन लोकपाल द्वारा मॉनीटरिंग हेतु देश के सक्रिय आरटीआई एक्टिविस्टों की सहायता, सलाह/ सुझाव लेना अनिवार्य किया जाना चाहिए , क्योंकि एक सक्रिय आरटीआई कार्यकर्ता को किसी भी विभाग के विजिलेंस विभाग से ज्यादा और वास्तविक जानकारी होती है. अतः सभी मंत्रालयों के सलाहकार समिति में आरटीआई एक्टिविस्टों की सेवाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए.

देश की वैसी जाँच एजेंसियां , जो कानूनी रूप से तो स्वायत्त है परन्तु वास्तव में सत्ताधारी दलों के दिशानिर्देश के अनुसार कार्य कर रहे हैं , की मॉनीटरिंग रखें तथा सरकार को उनके जाँच में अनावश्यक हस्तक्षेप करने से मना करे. इसके सन्दर्भ में त्वरित एवं पारदर्शी प्रक्रिया अपनाया जाना अनिवार्य होना जन लोकपाल सुनिश्चित करे.

कैश फॉर वोट मामले में अमर सिंह को मोहरा के रूप में इस्तेमाल करने वाले ताकतवर चेहरों को बेनकाब नहीं किया जा रहा है. बोफोर्स कांड, जैन हवाला कांड , चारा घोटाला कांड जैसे अनेको कांडों में सीबीआई की असफलता के साथ -साथ उसके द्वारा अधिकाधिक मामलों में क्लोजर रिपोर्ट लगाने से उसका नकारापन प्रतीत हो रहा है. सीबीआई एवं अन्य जाँच एजेंसियों के प्रति आम जनों में विश्वसनीयता में कमी आईहै . इन महत्वपूर्ण विन्दुओं पर गंभीरता पूर्वक मंथन कर ठोस कार्य योजना का खाका जन लोकपाल द्वारा बनाया जाना चाहिए, ताकि घोटाले की रकम सरकारी खजाने में आ सके . आज तक कितने घोटालेबाजों को सजा मिली है और कितनों से रकम की वापसी हुई है , यह जानने और पूछने का पूरा अधिकार जन लोकपाल को हो.

सीबीआई व अन्य जाँच एजेंसियों सहित आयकर व संपत्तिकर विभाग द्वारा सरकारी स्तर पर बदले की भावना से कारवाई की जा रही है. स्वामी रामदेव , आचार्य बालकृष्ण ,अन्ना हजारे, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, अरविन्द केजरीवाल के मामलों से तो फिलहाल ऐसा ही प्रतीत होता है. यदि सरकारी तंत्र के नीयत में खोट नहीं था ,तो सरकार उतने दिन से क्यों सो रही थी?इन विभागों का सरकारी इस्तेमाल/ राजनैतिक इस्तेमाल होने से लोकतंत्र की चूलें हिल सकती हैं . जन लोकपाल को पुलिस , सीबीआई अथवा किसी भी जाँच एजेंसियों से अनसुलझे मामलों एवं केस को बंद किए जाने के मामलों में हस्तक्षेप का पूरा अधिकार प्राप्त हो क्योकि इसकी आड़ में एक बड़ा घोटाला किया जा रहा है ,जिससे पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिल पाता है.

(प्रस्तुत सुझाव आरटीआई कार्यकर्त्ता गोपाल प्रसाद के निजी विचार हैं.)

GOPAL PRASAD ( RTI Activist)
House No.-210, St. No.-3, Pal Mohalla
Near Mohanbaba Mandir,Mandawali, Delhi-110092
Mobile:9540650860,9289723144,
Email:gopal.eshakti@gmail.com

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता

मजदूरों के हकों एवं हितों के लिए उन्हें सशक्त किए बिना भारत की आज़ादी का कोई मतलब नहीं है. आज देश में नीति एवं नियम के बजाय साफ नीयत की जरूरत है और इसके लिए हमें जागरूक और संगठित होना पड़ेगा. सरकारों की नीतियों में दूरदर्शिता एवं क्रियान्वयन का अभाव रहता है . आर्थिक उदारीकरण के इस दौर में सरकारों की भूमिकाएँ बदल चुकीं हैं . राज्य-व्यवस्था अपनी जिम्मेदारियों से कतराती नजर आ रही हैं. सरकारें निजी कंपनी की तरह हो गेई हैं और वह लाभ देनेवाली एक एजेंसी के तौर पर कम कर रही है. वह सामान्य जन के लिए कल्याणकारी न रहकर कई मायनों में विनाशकारी भूमिका निभा रही है . वर्तमान दौर में सभी दलों की अर्थनीति एक जैसी हो गयी है. प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों के सुझावों की और प्रधानमंत्री कार्यालय ने बहुत सरे मामलों की अनदेखी की है. विश्वसनीय आंकड़ों के अनुसार पिछले बीस बर्षों में नगरों की जनसँख्या में डेढ़ गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है . देश में बीस बर्ष पहले मात्र एक अरबपति था , आज लगभग पचास हैं. भारतीय संविधान और लोकतंत्र इन्हीं कारणों से कमजोर हुआ है.
दुनियां के पैमाने पर मजदूरों और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से भारत बहुत नीचे है. कई अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों में यहाँ के व्यवस्था की बहुत ही निरासजनक तस्वीर प्रस्तुत की है . वैश्विक सामाजिक सुरक्षा पर जरी रिपोर्ट के अनुसार "भारत में 37 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है . अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) द्वारा बेहतर विश्व के लिए सामाजिक सुरक्षा की रिपोर्ट में सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से दुनियां के 90 देशों में भारत का 74 वन स्थान बताया गया है. आर्थिक , सामाजिक सुरक्षा का यह आकलन श्रमिकों और कर्मचारियों की आमदनी , उनके कार्य , रोजगार , रोजगार सुरक्षा तथा श्रम बाजार के आधार पर किया गया है . भारत में 90 % श्रमिक वर्ग को आर्थिक सामाजिक सुरक्षा की कोई छतरी नसीब ही नहीं है, जिसके कारन इस वर्ग के लोग बीमारी लाभ , छुट्टी लाभ , बोनस, प्रौविडेंड फंड , पेंशन , बेरोजगारी भत्ता आदि से पूरी तरह वंचित हैं . वैश्विक मंदी के दौर में दुनियां के विकसित देशों में भारत की तुलना में नौकरियां तेजी से ख़त्म हुई है परन्तु वहां कर्मचारियों , कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ तथा बेहतर और प्रभावशाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधा आसानी से प्राप्त है , जिसके कारण विकसित देश के श्रमिकों एवं कर्मचारियों को कम समस्या का सामना करना पड़ता है. आजादी के बाद सरकार ने अब तक कई कानूनों और कल्याण कोष के माध्यम से श्रमिकों को राहत देने के बाबजूद भी इस वर्ग को कोई लाभ नहीं मिल पाया . असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के मद्देनजर 1995 में सरकार ने राष्ट्रीय परिवार योजना और राष्ट्रीय मातृत्व योजना की घोषणा की थी. 1996 -97 में ग्रामीण फसल बीमा योजना और निजी दुर्घटना बीमा सामाजिक सुरक्षा योजना की घोषणा हुई . बर्ष 2000 में अति निर्धन लोगों के लिए सामाजिक बीमा योजना और 2002 में समग्र सुरक्षा योजना की घोषणा हुई . सरकार ने नई औद्योगिक -व्यावसायिक जरूरतों एवं श्रमिकों को संरक्षण प्रदान करने संबंधी कानून बनाने के लिए दो श्रम आयोग बना चुकी है परन्तु दोनों श्रम आयोग की सिफारिशों से सामाजिक सुरक्षा के कार्य में कोई गति नहीं आ सकी है . असंगठित क्षेत्र के उद्योगों के श्रमिकों की आर्थिक सामाजिक सुरक्षा के लिए अर्जुन सेन गुप्ता की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट की सिफारिश पर असंगठित क्षेत्र के 6500 रूपए प्रतिमाह से कम आय वाले 30 करोड़ मजदूरों को लाभ देने के लिए सामाजिक सुरक्षा विधेयक पारित किया गया परन्तु किसी भी तरह से यह विधेयक अपने उद्येश्य पर खड़ा नहीं उतर सका है . बर्ष 2009 के पहली मई को मजदूर दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने देश के सभी नागरिकों के लिए नई पेंशन योजना (एन पी एस ) की घोषणा की है, जिससे देशवाशियों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ मिल सके . हालाँकि यह पेंशन योजना 2004 के बाद नौकरी में आए सरकारी कर्मचारियों के लिए पहले से ही लागू थी, लेकिन अब इसके दरवाजे देश के असंगठित क्षेत्रों के सभी उद्यमियों ,अधिकारियों, कर्मचारियों तथा श्रमिकों के लिए भी खोल दी गए हैं, के बाबजूद भी इस पेंशन योजना में कई पेचीदगियां हैं . इसमें सेवानिवृति के बाद उतनी ही धनराशि मिलेगी जितनी जमा कराई गयी थी . इस राशि पर चुने गए निवेश विकल्प के अंतर्गत प्राप्त हुआ रिटर्न अवश्य मिलेगा . देश के सरकारी , अर्धसरकारी या दूसरे केंद्रीय संगठनों के कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के तहत पेंशन फंड में निवेश का एक हिस्सा इन संगठनों की ओर से दिया जाता है .इस पेंशन योजना में भी निवेशक के अंशदान के साथ सरकार से कुछ अंशदान की अपेक्षा की जा रही है . यह भी विचारणीय है की पेंशन योजना में अनिवार्य रूप में 500 रूपए प्रतिमाह जमा करने की शर्त है, जिसके कारण करोड़ों गरीबों के योजना से वंचित रह जाने की आशंका है. वास्तव में यह बहुत बड़ी त्रुटि है ,क्योंकि इस योजना का निवेशक किसी भी स्थिति में जब योजना की धनराशि प्राप्त करेगा , उसे प्राप्त धनराशि पर टैक्स देना होगा , दूसरी तरफ पब्लिक प्रौविडैंड फंड जैसी बचत योजना में ऐसा कोई टैक्स नहीं लगता है . यही कठिनाईयाँ इस योजना में अडंगा डाल रही है. इसी कारणवश 1 मई 2009 से पूरे देश में जोरशोर से लागू की गयी पेंशन योजना का लाभ उठाने के लिए 15 मई 2009 तक केवल 100 लोग ही आ पाए.
कुल मिलाकर देखा जाए तो अब तक देश की कोई भी सरकार असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए कोई कारगर योजना नहीं ला पाई है. सभी योजनाओं में कोई न कोई वर्ग किसी न किसी कारणवश पीछे छूट गया है . जब भी कोई योजना सामने आती है तो वह काफी उपयोगी लगती है , परन्तु उसके क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाईयाँ होती है , जिसके कारण वह योजना प्रारंभ से ही अनुपयोगी साबित हो जाती है . अतः यह आवश्यक है की सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं को सफल बनाने के लिए बहुआयामी नीति बनाकर उसे आधार जैसे प्रोजेक्ट के साथ जोड़ दिया जाए, ताकि मंदी के दौर में चिंताग्रस्त श्रमिक वर्ग कुछ रहत महसूस कर सके. यूपीए सरकार सामाजिक सुरक्षा से सम्बंधित तमाम पिछली योजनाओं एवं विधेयकों की समीक्षा कर नई स्थिति एवं परिस्थिति के मद्देनजर जनोपयोगी योजना बनाए ताकि समाज के अंतिम पायदान के व्यक्ति को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके . प्रधानमंत्री को योजनाओं की त्रुटियों को परखकर उन त्रुटियों को दूर करने एवं मॉनीटरिंग के वास्ते नए तंत्र बनाने की परम आवश्यकता है.

बुधवार, 7 सितंबर 2011

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सूचना सही नहीं

भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय सूचना एवं प्रसारण की सूचना सही नहीं है क्योंकि सरकारी वेबसाईट nic .in ने इसका समय पर अपग्रेडेशन ही नहीं किया है .सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तो मात्र एक उदाहरण है , इस तरह के कई ऐसे मंत्रालय/विभाग हैं, जिनके वेबसाईट का समय पर अपग्रेडेशन नहीं हुआ है. इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बाबजूद अपग्रेडेशन की गति कछुआ चल की भांति एवं पुरानी तकनीक पर ही आधारित है. nic .in समय पर अपग्रेडेशन हेतु सक्षम नहीं है. विश्वसनीय सूत्र के अनुसार nic कई विभागों को स्वयं समाधान देने के बजाय अपने पैनल के आईटी कंपनियों की सेवा की संस्तुति कर रही है, जो एक लम्बी प्रक्रिया है. पुरानी एवं गलत सूचना या जानकारी होने से आम नागरिक के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई चिट्ठियों को विभाग द्वारा इसलिए वापस भेज दिया जाता है, क्योंकि वह पुराने अधिकारी / कर्मचारी के नाम प्रेषित होता है.कई अधिकारियों के नाम स्थानांतरण एवं सेवानिवृति के वाबजूद वेबसाईट में प्रदर्शित अधिकारियों की लिस्ट में शोभा बढ़ा रहे हैं. इससे सम्बंधित विभाग की अकर्मण्यता , गैर जिम्मेदारी तथा व्यवस्था में त्रुटि की झलक दिखाई देती है. उदाहरण स्वरुप सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के गीत एवं नाटक प्रभाग की वेबसाईट में ड्रामा की जगह पर रामा दिखाया जा रहा है. उप निदेशक प्रशासन के पद पर वरेआम मस्त को दिखाया जा रहा है , जबकि वे काफी पहले सेवानिवृत हो चुके हैं , वर्तमान में इस पद पर सहायक निदेशक प्रशासन निखिलेश चटर्जी पदस्थापित हैं . डा. विजय राघवन उप निदेशक एस एंड एल का तबादला हो चुका है. बी पाल चौधुरी उप निदेशक पी एंड सी का कोलकाता तबादला हो चुका है और इस पद पर ध्रुव अवस्थी पदस्थापित हैं . बलजीत सिंह सहायक निदेशक का भी चंडीगढ़ तबादला हो चुका है , जबकि मौजूदा सूची में अभी तक उनका नाम हटाया नहीं गया है . उप निदेशक (दिल्ली क्षेत्र) सुरेन्द्र प्रसाद एवं सहायक निदेशक मनोज बंसल का नाम तो है ही नहीं.
इस संबध में सूचना के अधिकार कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी परन्तु दो माह बीत जाने के बाबजूद भी उन्हें उत्तर नहीं दिया गया है . वे कहते हैं की इससे सरकार के तंत्र एवं कार्यशैली का पता चलता है. प्रशासनिक सुधार एवं पारदर्शिता आज समय की मांग है , जिस ओर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

रविवार, 28 अगस्त 2011

Gurinder Kaur Gill : Woman Fighter against Corrupt System

It is true that "Woman is a symbol of power". When a woman begins one step of revolt then it must be completed.I am talking about Ms. Guninder kaur Gill .Anyone who know about this lady must appreciate her talent , courage and
co-oprative nature. When I feel the sorrow, problem and frustation of this lady
created by present corrupt system and I have understood her case right
from starting I was forced to believe that a woman ,If desires can change a lot in the system.She can change the direction of wind.
I am a ordinary man but my thinking is broad. Being an RTI Activist
I wish to fight for rights and against corruption especially butIt is
not easy because in present scenerio corruption has been mixed up in
the nature and behavier of masses until everybody does promise not
to take or give bribe or not to be a part of corrupt system , it
will be cured.
Presently the maximum part of politics, bureaucracy, judiciary,
media, ,corporate and social sector are also corrupt. In this
difficult situation we should try to coordinate all honest
,dynamic,and fighter type revolutionary people to empower to each
other for any common cause . We should plan a strong strategy to fight
against corruption and must join hands with oppressed ,exploited,
tortured people . It cannot be possible without best networking , big
platform for providing solution to any type of corruption matter.
I think when these type of people will collect on single
platform then revolution must be start on full form. Every
revolutionary power becomes dedicated to common cause , so the way
is same for these type of people . So our slogan is "Collect,
Co-ordinate and Co-operate". On the basis of consanrtation , courage
and centralised multipurpose programme just like Aadhar(UID)
For this cause now war is started. We should shake hands for
this noble cause. I am with you and your mission till I am alive. I
don"t like to live in Corrupt India .My dream is corruption free
India. In this regard I suggest you to expose who have white collar
face but those faces are black.
These are some suggessions in this regard: (Ek Bade Kranti ki Shuruaat)
1. Co-ordination with thinktank and most powerful revolutionary personality.
2. Website for promoting our ideology, bulk email and SMS/message.
3. file a writ petition in the court.
4. Dialouge with experts in this field specially (politics, judiciary,
bureaucracy, media, corporate and social sector)
5. Articles and Press Releases in Hindi and English.
6. Power point theme presentations on projector.
7. Attack on loop holes in IPC/ CrPc and useless Indian laws. Make a
pressure for law amendment in current scenario.
8. Attack on investigative agencies like CBI,CVC,Delhi Police and
show the truth on closure report and disobey the rules and
regulations.
9. Survey on the effect of aforesaid matter and find out the solution
of corruption.
10. RTI Awareness and Training Programme to minimize the corruption.
11. Protest, Hunger Strike, Speech, Press Conference, letter,
signature campaign.
Anybody can contact to( Mr. B.S.Bola,Retd. IPS
Officer by Phone No: 011-45452915 and EMAIL: bsbola@sevallp.com) for
best guidelines and support on behalf of “SEVA Consultancy”to know your requirement and expectation on my side.
"one man army" who believe in Gurilla war for our nation can change this corrupt system. The feeling of
country first, corruption frees India, strong monitoring system is
necessary to all young minds. I think revolutionary volcano will
blast and your target must be completed. You should support to
proposed “Jan Lokpal Bill” and must send your valuable
Opinion/Suggetion to Govt. Department with positive thinking.

GOPAL PRASAD ( RTI Activist)
House No.-210, St. No.-3, Pal Mohalla
Near Mohanbaba Mandir,Mandawali, Delhi-110092
Mobile:9540650860,9289723144,
Email:gopal.eshakti@gmail.com

नदियों को प्रदूषण मुक्त करने का प्रभावी प्रकल्प : पुष्पांजलि प्रवाह









धार्मिक आधार -- धराएत इति धर्मः अर्थात जो धारण किया जाए ,वही धर्म है. यह श्लोक हमारे शाश्वत सनातन धर्म के व्यापक दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है.सनातन धर्म किसी रूढ़िवादिता या कट्टरपंथी का नाम नहीं , बल्कि यह धर्म मानव सभ्यता के उत्थान और प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण का एक माध्यम है, हमारे सामान्य रीति- रिवाज सबके पीछे एक तर्क है- विज्ञानं का , विचारों की प्रखरता एवं विद्वानों के निरंतर चिंतन से मान्यताओं व आस्थाओं में भी परिवर्तन हुआ . पुष्पांजलि प्रवाह की व्यवस्था आदि पूजा अर्चना के दौरान अनादि काल से चली आ रही है .समाज के सभी लोग भगवान से किसी न किसी कारण जुड़ा रहता है . हम उनको भेंट स्वरुप माला , फूल, नारियल ,फल और अन्य सामग्री भेंट करते हैं . इन सामग्रियों में पंडित महाराज को जो जरूरत होती है , वह ले लेते हैं . जो गो माता को भेंट कर सकते हैं वह हम उन्हें खिला देते हैं , एवं बची हुई सामग्री को नदी में प्रवाह कर देते हैं .जिससे किसी को पैर न लगे एवं इन पूजा सामग्री को सम्मान मिले . इसके लिए सबसे अच्छी व्यवस्था थी की नदी में प्रवाह कर दो. भारत के नदियों से भी सनातन धर्म मन का रिश्ता रखती है . माँ हमें दूध पिला कर हमारे जीवन को सुरक्षित करती है और नदी का जल ही मानव का जीवन है , इसलिए जीवन देनेवाली है माँ. नदी को साफ सुथरा रखने का उपाय सनातन धर्म ने खोजा , नदी में ताम्बे के सिक्के डालें एवं फूल माला विसर्जित करें.फूल मालाओं से नदी के उपरी सतह पर जो तरल पदार्थ जो स्नान करने के कारण होता है ,वह साफ हो जाती है. वही फूल माला मछलियों का भोजन हो जाता था, जैसे हम अपने अस्थियों को नदी में प्रवाह करते हैं, क्योंकि उन्हें सम्मान मिले. फूल मालाओं को वैसे ही विसर्जित करते हैं , अर्थात अस्थियों को वहां विसर्जित करना चाहिए जहाँ उसे सम्मान मिले . माता- पिता के अस्थिओं को हम सम्मान देते हैं और भगवान के फूलमाला, फोटो इधर - उधर फ़ेंक देते हैं ,जिसकी एक ही सजा है -क्लेश. जिस तरह दूध में खट्टा पड़ते ही दूध फट जाता है . आप कुछ नहीं कर सकते ,उसे फटना ही है. इसी तरह पूजा सामग्री इधर उधर फेंकने से क्लेश होगा ही, आप नहीं रोक सकते.
आध्यात्मिक आधार : मंदिरों में चढ़े फूलों की दुर्दशा मन में कहीं वैसे भी खटकती थी, लोगों द्वारा पहनी गयी मालाओं को भेंट दी गए सम्मान के प्रतीक फूलों का यहाँ - वहां बिखर कर तिरस्कृत होना. कई बार मन पर प्रश्न चिन्ह बनकर उभरा, अनुसन्धान करते हुए मन में विचार आया की क्यों न फूलों को खाद बनाने के मुख्य उत्पाद के रूप में काम में लिया जाय. श्रद्धा के रूप में सृजनात्मक संरक्षण की वैचारिक कौंध ने बड़ी शीघ्रता से कार्य शुरू करने की आध्यात्मिक प्रेरणा मिली .चार- पांच बार प्रयोगों के बाद आवश्यक संशोधन कर एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सका . गीता के श्लोक ३/१२ में इसका उल्लेख है. इसका सार है की जब किसी व्यक्ति को कोई वस्तु दी जाती है और वह इसे लौटने की जिम्मेदारी पूरा नहीं करता तो वह चोर है. प्रकृति साफ हवा व शुद्ध पानी देती है . पेड़ , वनस्पति भोजन देते हैं. हमारा कर्तव्य है की हवा को साफ रखें , पानी प्रदूषित न होने दें. आहार को विषाक्त होने से बचाएँ. जो वायु , जल, धरती को प्रदूषित करतें हैं, वह पाप कर्म करते है. आस्था एक भाव है. इश्वर, धर्म, सत्य, करुना, मानवता सब आस्था के ही विषय हैं. हमारे त्यौहार , रीति- रिवाज , दान एवं प्रतीक अपने आप में पूर्ण सन्देश व ज्ञान लिए होते हैं , जिन्हें अच्छी तरह समझकर , गुनकर , भावपूर्वक , ध्यान पूर्वक व विधि पूर्वक करने से ही चमत्कृत करने वाले अनुभव होते हैं, अन्यथा यह मानव - जीवन के लिए बड़ा अनर्थकारी होता है. आज जब हम अपने चारों ओर देखते हैं तो लगता है की भारत ने सभी क्षेत्रों में अच्छी प्रगति की है. उसकी जरूरतें काफी हद तक पूर्ण हो रही है, परन्तु वास्तविकता यह है की इतनी तरक्की के बाबजूद मानव सुखी और संतुष्ट नहीं है. कहीं न कहीं उसके मन में असंतोष है, वह सभी स्तरों पर अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है क्योंकि हम अपने आस्था को समय अनुसार बदल दिए हैं . सुख प्राप्त करने के लिए हमने दुखों को जन्म दिया अतः कहीं न कहीं विसंगति अवश्य है , चाहे यह हमारे सोंच में हो या मौजूद व्यवस्था में हो . प्रत्येक व्यवस्था एक निश्चित चिंतन का ही परिणाम होती है .
सामाजिक आधार : समाज में रहनेवाले प्रत्येक मानव सामाजिक हैं . सभी अपने- अपने कर्त्तव्य का पालन करते हैं . सभी को यह पांच धर्म निभाना पड़ता है (१)परिवार का ख्याल रखना (२)धर्म का पालन करना (३) समाज का ध्यान रखना (४) प्रकृति का संरक्षण करना (५) राष्ट्र की रक्षा करना . हम परिवार का तो ख्याल रखते हैं , धर्म का भी पालन करते हैं , समाज का ध्यान भी रखते हैं , वोट डालकर राष्ट्र की रक्षा भी करते हैं लेकिन प्रकृति का संरक्षण नहीं करते , जबकि मनुष्य की भौतिक आवश्यकताओं के अतिरिक्त उसकी मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक आवश्यकता की भी पूर्ति करता है , कोई मानव मात्र सुविधाओं की प्राप्ति से प्रसन्न नहीं रह सकता . प्रकृति के प्रत्येक अंग पर मानव का अधिकार है , यह अधिकार मानव को किसने दिया ? यह अधिकार मानव के प्रकृति का संरक्षक बन कर प्रकृति से हासिल किया . इसके बदले मानव ने प्रकृति से प्रतिज्ञान किया की हम आपकी यथास्थिति बनाए रखेंगे, लेकिन मानव सामाजिक स्थिति - परिस्थिति में उलझकर अपनी प्रतिज्ञान भूल गया , पृथ्वी या नदी जड़ है , इस विश्वास के अनुसार वो माँ कैसे ? परन्तु हिन्दू दर्शन ने उन्हें मातृत्व की श्रद्धा से महिमामंडित किया है . पेड़-पौधों को इश्वर तुल्य माना गया है,लेकिन मानव ने जिसे संरक्षण देने का प्रतिज्ञा किया वह उसे वध करने लगे.सामाजिक दृष्टि से यह महापाप है , सामाजिक मानव का कर्त्तव्य है कि वह प्रकृति का संरक्षक होने के नाते उसे न खुद ख़राब करे और न किसी को ख़राब करने दे.यह नदी , हवा, पेड़, पहाड़ सब हमारा है,आपका अपना है . भारत के प्रत्येक मानव को भारत के संविधान ने भी 51A के तहत यह हक दिया है कि आपका ही नदी है, पहाड़ है, हवा है . कोई अगर इसे ख़राब करता है तो आप उसे बल पूर्वक रोकें. भारत का संविधान आपके साथ है, लेकिन हम भी जाने -अनजाने प्रकृति के अंगों का वध करने लगे.किसी नदी को मरना लाखों लोगों की जिन्दगी को खतरे में डालना और एक सभ्यता की हत्या के बराबर है, कोई भी कार्य मुश्किल या आसान नहीं होता, यह तो हमारी सोच है जो उस कार्य को मुश्किल या आसान बना डालती है.कार्य या समस्याओं के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदल कर हम उसे आसानी से पूरा कर करते हैं.
आर्थिक आधार : किसी भी समस्या के समाधान के लिए आर्थिक आधार अच्छा होना चाहिए. समस्या का समाधान हम समस्या को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर कर सकते हैं , जैसे दिल्ली की यमुना नदी . 10 बर्ष पहले दिल्ली में यमुना नदी से 200 ट्रक नदी में गिराए गए पूजा सामग्री निकाली गयी , 10 बर्ष बाद श्री श्री रविशंकर जी ने लगभग 5000 कार्यकर्ताओं के साथ 100 ट्रक पूजा सामग्री निकाली. प्रत्येक बर्ष स्कूल के बच्चो द्वारा भी यमुना को प्रदूषण मुक्त करने हेतु श्रमदान होता है. सरकारी एवं सामाजिक संस्थाएँ 10 बर्षों से कचड़ा निकाल रही है .सभी निकाल रहे हैं , वहीं दूसरी ओर लोग पूजा सामग्री पुनः डाल रहे हैं. इससे आर्थिक हानि भी हो रही है और जो समय हम नदी के अन्य कार्य में दे सकते थे , वह हम चाहकर भी नहीं दे पा रहे हैं.
"पुष्पांजलि -प्रवाह" एक ऐसा कार्यक्रम है जिसके तहत मानव(लोग) पूजा सामग्री यमुना में फेकेंगे ही नहीं . इस कार्य के द्वारा इस समस्या का समाधान हमेशा के लिए हो जाएगा. इससे समय एवं आर्थिक हानि के समस्या का भी समाधान हो जाएगा. एक अनुमान है कि 11 -13 अप्रैल 2011 तक यमुना में 5 लाख किलोग्राम पूजा सामग्री फेंकी गयी, जिसे निकालने में करीब 90 दिन लगेंगे और कई करोड़ खर्च होगा . इस प्रकल्प के माध्यम से ऐसे आर्थिक खर्चों से निजात मिलेगी .
प्रदूषण : पूजा के फूल से यमुना में प्रदूषण! दिल्ली सरकार निरंतर समाचारपत्रों और होर्डिंग्स के माध्यम से सूचित करती है कि भगवान पर चढ़े हुए फूल और मालाओं को बैग में डालकर यमुना में विसर्जित न किया जाए, क्योंकि उससे यमुना दूषित हो रही है , यमुना पुल पर दोनों किनारे लोहे की जाली से घेरा लगा दिया गया है ताकि श्रद्धालु पूजा सामग्री न डाल सकें , लेकिन जाली को बीच-बीच में लोगों ने काट दी हैं, जिससे उन्हें फूल माला फेंकने की परेसानी न हो . दिल्ली सरकार प्रति बर्ष तीन चार बार जाली को जोड़ती है , लेकिन लोग उसे काट देते हैं . दूसरी ओर हमारे बहुत से भी बहन जो फूल बड़ी भक्तिभाव से देवताओं के चरणों में चढाए जाते हैं उसे किसी पीपल वृक्ष के नीचे रख दिया जाता है , किसी खम्बे पर टांग दिया जाता है , किसी मंदिर में रख दिया जाता है . धार्मिक वस्तु , फूल माला , देवी- देवताओं की खंडित मूर्तियाँ , धार्मिक कार्ड का कैलेण्डर , अगरबत्ती के पैकेटों पर छपी भगवान की तस्वीर वाला खाली पैकेट एवं चुन्नियाँ आप दिल्ली शहर में जहाँ भी देखें , हिन्दू धर्म की पूजा सामग्री बिखरी पडी मिलेगी. इस तरह हम शहर को भी गन्दा एवं प्रदूषित कर रहे हैं . लोग कहते हैं कहाँ फेकें? यह भले ही देखने में सामान्य कार्य लगता हो परन्तु हिन्दू विश्वास के अंतर्गत इसका आध्यात्मिक एवं धार्मिक मूल्य है , तार्किकों को भले ही अटपटा लगे , परन्तु उन्हें इस बात पर सहमत होना पड़ेगा कि सिर्फ बौद्धिक होकर अथवा तर्क का सहारा लेकर इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता . यमुना नदी में जो भक्तजन पूजा सामग्री फेंकते हैं ,वह यमुना नदी की गहराई कम करते हैं. यमुना नदी की गहराई पहले 12 -15 मीटर थी , जो अब मात्र 1 -2 मीटर है. नदी की गहराई ही नहीं है , जिसके कारण बाढ़ एवं सूखा की समस्या होती है . यह हमारे कारण प्रदूषण की वर्तमान व्यवस्था का नतीजा है . दुनिया का पथ प्रदर्शन करना अतीत में भी हमारा पावन कर्त्तव्य रहा है और हर परिस्थिति में हमें वही कार्य करना है ताकि निकट भविष्य में पर्यावरण का संकट टाला जा सके. हमें इस धार्मिक कार्य के लिए सुसज्जित होना होगा.
सरकारी मानसिकता , प्रयास एवं खर्च : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार पूजा सामग्री से 1 .5 % नदी प्रदूषित होती है . दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अनुसार लाखों प्लास्टिक बैग में पूजा सामग्री यमुना में डाली जाती है , जो नहीं होना चाहिए, पर कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन हमने और आपने देखा कि दिल्ली में 10 बर्षों से यहीं पूजा सामग्री ही निकाली जा रही है. यमुना के किनारे यह सामग्री से भरा हुआ है.
प्रयास - सभी पुलों पर जाली लगाया गया है . प्रत्येक बर्ष विद्यार्थियों द्वारा यमुना के किनारों की सफाई , गैर सरकारी संस्था द्वारा सफाई दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा सफाई श्री श्री रविशंकर द्वारा सफाई को सरकार ने मदद किया .
खर्च- विद्यालयों को दस हजार एवं बच्चों को नास्ता , दस्ताने, फावड़ा वस्तुएं प्रदान किया जाता है . प्रत्येक बर्ष इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जिसमे काफी खर्च होता है. इसके साथ दिल्ली सरकार द्वारा समय- समय पर सफाई कार्यक्रम होता है . यमुना में जान डालो ...............इस तरह का 10 बर्षों से सरकार प्रचार कर रही है. जितना पूजा सामग्री प्रत्येक बर्ष गिराई जाती है उसमे से 25 % ही साफ हो पाती है.
सूचना का अधिकार के द्वारा हमें पता चल सकता है कि 10 बर्षों में इन पूजन सामग्री को साफ करने के लिए सरकार द्वारा कितने अभियान चलाए गए ? इसमे कितना खर्च हुआ? इसका परिणाम क्या रहा ? इस सरकारी अभियान को किन-किन लोगों द्वारा तैयार किया गया था? आने वाले बर्षों में किन-किन अभियान पर सरकार काम करने जा रही है और उसके लिए कितना बजट निर्धारित हुआ है? इस सम्बन्ध में दिल्ली के मंडावली निवासी सूचना का अधिकार कार्यकर्त्ता गोपाल प्रसाद ने दिल्ली के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय विभाग से आर.टी.आई द्वारा जानकारी मांगी है. उम्मीद है कि सरकारी जबाब आने के बाद "यूथ फ्रैटरनिटी फाउंडेशन " एक मजबूत कार्य योजना बनाकर उस पर अमल किया जा सकेगा.
मूल समस्या : सभी लोग भगवान , गौड , अल्लाह ,गुरु गोविन्द सिंह और अपने -अपने धर्म से जुड़े हैं. किसी न किसी प्रकार अपने भगवान को खुश रखने के लिए भक्त उन्हें माला फूल एवं अन्य सामग्री से पूजा अर्चना करते हैं. उसके बाद सभी वस्तुओं को नदी एवं किसी मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे फ़ेंक देते हैं क्योंकि यह सामग्री पांच- छः दिन के बाद सड़ने पर बदबू देने लगता है , इसलिए लोग इसे जल्दी से कहीं-कहीं फ़ेंक देना उचित समझते हैं . शास्त्र के अनुसार भगवान पर चढ़ाई गयी पूजा सामग्री बसी घर में नहीं रखना चाहिए. मंदिरों में , गुरुद्वारा में , मजारों पर जो फूल -माला चढ़ाई जाती है वह भी यमुना में फेंकना इनकी मजबूरी है.
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि नदी को आप गन्दा नहीं कर सकते लेकिन अब तक इस आदेश पर अमल हेतु कोई व्यवस्था ही नहीं है . दिल्ली सरकार ने 2005 को हलफनामा देकर दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया कि पूजा सामग्री डालने के लिए सरकार यमुना के किनारे बड़े-बड़े कुण्ड बनाएगी , लेकिन 6 बर्ष बीतने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है. लोग प्रति बर्ष 15 लाख किलोग्राम पूजा सामग्री यमुना में फ़ेंक देते हैं. दिल्ली में प्रतिदिन बीस हजार किलोग्राम फूलों कि खपत है. नवरात्रि में प्रतिदिन चालीस हजार किलोग्राम खपत होती है. नवरात्रि बर्ष में 2 बार होती है
8 +8 दिन=16x40,000k.g=6,40,000 kg
300 दिन x 20,000 k.g.=60,00000 kg
इसके आलावा देवी देवताओं कि खंडित मूर्तियाँ , धार्मिक कार्ड , कैलेण्डर, अगरवत्ती के पैकेटों पर भगवान की तस्वीर वाला खाली पैकेट , तस्वीर, चुन्नियाँ , धार्मिक फटी पुरानी पुस्तकें भी फेंके जाते हैं.
दिल्ली में 1 करोड़ 20 लाख लोग हैं लगभग-: 25 लाख लोगों के घरों में से 2 किलोग्राम प्रत्येक बर्ष यदि २ किलोग्राम भी निकालता है तो 25 लाख x 2 किलोग्राम =50 लाख किलोग्राम यह पूजन सामग्री भी यमुना में गिराई जाती है.
(6,40,000 किलोग्राम +60,00,000 किलोग्राम +50,00,000 किलोग्राम =116,40,000 किलोग्राम ) यह डाटा एक जनरल कॉमन सेन्स है. इसको निकलने में कितने करोड़ लगेंगे? यह एक बर्ष में डाली गयी पूजन सामग्री है.
समाधान : इस समस्या पर गंभीरता पूर्वक अनुसन्धान कर समस्या का समाधान खोजा गया है, जिसमें भक्तों की आस्थाओं को ध्यान में रखकर उसके अनुरूप ही व्यवस्था बनाई गयी है. दिल्ली के सरकारी रिकार्ड में लगभग 2500 मंदिर है, जबकि वास्तव में लगभग 4200 मंदिर हैं.
एक पायलट कार्यक्रम
(क ) 500 किलोग्राम फूल से अधिक खपत वाले मंदिरों में छोटा कलश रखना , जिसमें 150 किलोग्राम फूलमाला एवं पूजा सामग्री आ जाती है. जिसे एक दिन छोड़कर हमारे कार्यकर्ता आयेंगे और सभी सामग्री ले जायेंगे.
(ख)1000 जगह पर जहाँ लोगों का निवास स्थान है वहां पुष्पांजलि प्रवाह पात्र लगाना जिससे जो लोग घरों में पूजा करते हैं वह अपना पूजा सामग्री अपने घरों के पास लगे पात्र (बौक्स ) में डालें . यमुना पीपल का पेड़ मंदिर जाकर फेंकने की जरूरत नहीं है . एक पात्र में 150 किलोग्राम पूजा सामग्री आती है . तीन दिन छोड़कर इन पात्र (बौक्स ) को खाली करने की व्यवस्था की गयी है.
(ग) दुकानदार भी अपने दुकानों में प्रतिदिन पूजा अर्चना करते हैं. पुष्पांजलि प्रवाह के कार्यक्रम में हमारे कार्यकर्ता एक दिन छोड़कर प्रत्येक दुकान जायेंगे और पूजा सामग्री उनसे ले लेंगे.
(घ) जो भक्त यमुना के पुलों से पूजा सामग्री फेंकते हैं , हमारे कार्यकर्ता उनसे वहां वह सामग्री अपने कलश में ले लेंगे. दुबारा लोग जाली न काटे के लिए वहां पर कुछ और व्यवस्था करनी है जिससे समय आने पर उसे ठीक कर दिया जाएगा.
इसके बाद भी जो लोग यमुना नदी के किनारे अपनी पूजा सामग्री को लेकर आएँगे , हमारे कार्यकर्ता वहां भी मौजूद हैं . वे वहां सामग्री उनसे बड़े सम्मान के साथ ले लेंगे और यमुना नदी को प्रदूषित न होने देंगे. इस तरह इस समस्या का कारण और निवारण की एक सम्पूर्ण योजना है . इस योजना के द्वारा इस समस्या का समाधान हमेशा के लिए हो जाएगा एवं दिल्ली के 250 बेरोजगार लडके एवं लड़कियों को रोजगार भी मिलेगा.
हमारे प्रयास : पुष्पांजलि प्रवाह के कार्य को आठ साल तक गहराई से अनुसन्धान करने के बाद हमने उच्च प्रयोग किया . हमारा प्रयोग एक दम सफल रहा . कुछ त्रुटियाँ थी जिसे हम दूर कर चुके हैं.
एक प्रयोग दिल्ली के चांदनी चौक से सदर बाजार तक दुकानदारों से पूजा सामग्री लेने का कार्य किया गया . यह प्रयोग छह महीनों तक अलग-अलग तरीके से किया गया.लोगों के घरों के पास पुष्पांजलि प्रवाह पात्र श्री हासिम बाबेजी के द्वारा ही कार्य का संचालन किया गया था , जिसमे काफी सफलता मिली , लेकिन यहाँ एक प्रयोग था , जिसमें अब कुछ सुधार किया गया है. मंदिरों में एक सर्वेक्षण किया गया जिसमें मंदिरों के व्यवस्थापकों ने पूर्ण सहयोग का वादा किया. यह सर्वेक्षण आठ महीने तक किया गया था .
यमुना के घाटों पर पर जो (नाविक) नाव चलाने वाले होते हैं. उनके सहयोग से 11 , 12 , 13 , 14 .4 .2011 में जो लोग पूजा सामग्री लेकर आए , उसमें से प्लास्टिक बैग निकालकर बाकी सामग्री प्रवाह करने दिया गया. इसमें नाविकों का पूर्ण सहयोग मिला . इस अभियान के दौरान इकठ्ठा की गयी प्लास्टिक थैली लगभग 200 किलोग्राम अधिक था. 2005 से हमने इस कार्य के लिए दिल्ली के सभी सरकारी संस्थानों इस समस्या एवं समाधान की जानकारी दी एवं सहयोग की प्रार्थना की लेकिन 2011 तक सिर्फ पत्र व्यवहार के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं अपनाया गया. इस दौरान दिल्ली के 72 विधायक , सांसद, राज्यपाल, मेयर ,मुख्यमंत्री, दिल्ली राज्य प्रदूषण नियंत्रण समिति ,केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण समिति 2005 से अब तक जो भी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री बने, उनको भी इस योजना की जानकारी दी गयी एवं सहयोग की अभिलाषा था, लेकिन उन्होंने कोई पत्र व्यवहार करना भी उचित न समझा.
2008 में मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप पर मुख्यमंत्री के पर्यावरण सचिव श्री जादू ने लगभग चालीस हजार रूपए सहयोग दिया ,जिससे हम अपनी ख़राब गाडी मरम्मत करवा सके तथा एक साईकिल ठेला ले सके.
दिल्ली के फूलों के मंडियों का व्यवस्थित सर्वेक्षण किया किया गया और उन्होंने सहयोग का वादा किया. सभी धर्म के संत , महंत को इस कार्य के बारे में जानकारी एवं समर्थन तथा 165 सांसदों को जानकारी देना , राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्रियों को जानकारी दिया गया एवं समर्थन हेतु प्रार्थना किया गया.



































































शनिवार, 7 मई 2011

स्वतंत्र भारत में भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन बिषय पर प्रतिनिधि सम्मलेन





जनता दल (यू) के एंटी करप्शन फ्रंट द्वारा "स्वतंत्र भारत में भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन " बिषय पर प्रतिनिधि सम्मलेन 6 मई को कृष्ण मेनन भवन (सुप्रीम कोर्ट के पीछे ) में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जनता दल (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा की कोई भी लडाई युवाओं के द्वारा ही लड़ी जाती है. लोकतंत्र में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, वो चाहे गांधीजी के आजादी की लडाई हो या जे.पी का भ्रष्टाचार विरोधी सम्पूर्ण क्रांति जिसके हम सब हिस्सेदार थे. तब मैं किशोर था और हमलोगों ने उसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था . इस आन्दोलन ने कई नेताओं को जन्म दिया .हमलोगों ने ईमानदारी से काम करने की कोशिश की . हमारी उपलब्धि रही की जे.पी के आन्दोलन से निकले हुए लोग गरीबों की आवाज बने ,लेकिन आज की परिस्थिति भिन्न है. मैं अन्ना के इस आन्दोलन को जनजागरण के दृष्टि से देखता हूँ. युवाओं में साहस का संचार जिस प्रकार मुझे दिखा, उससे मैं महसूस कर रहा हूँ की अब भारत का आम आदमी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नए क्रांति के प्रति आशान्वित है और उसके मद्देनजर हमने भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का गठन किया है . मैं युवाओं से आह्वान करता हूँ की इस संगठन से जुड़कर अपनी भागीदारी से नए राष्ट्र निर्माणक नेता के रूप में सामने आएं.
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के.सी. त्यागी ने कहा की हिंदुस्तान के सभी राजनैतिक पार्टियों में जद (यू )एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने अपने एंटी करप्सन फ्रंट का अलग से गठन किया है. जद (यू ) भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन का नेतृत्व करेगी. उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उदाहरण देते हुए कहा की बिहार की शासन व्यवस्था संकल्प शक्ति , पारदर्शिता एवं भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है ,जिसका अनुकरण आज सभी राज्यों को करने की आवश्यकता है. हमें अपनी जिम्मेवारी एवं प्रतिबद्धता के मानदंडो पर खड़ा उतरना पड़ेगा क्योंकि इस पार्टी से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ रही है.
जनता दल (यू) भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप दुबे ने कहा की इस संगठन के गठन का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे साथियों का राजनैतिक संगठन तैयार करना है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन(AOR ) के सचिव सी. डी. सिंह ने कहा की वकील भी इस आन्दोलन का हिस्सा बनेंगे. वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एम्. एन. कृष्णमणि ने कहा की भारत का समाज सभी धर्म जाति में बनता जरूर दिखता है, पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सारा देश एक साथ खड़ा है. उन्होंने जनता दल( यू )के इस सोंच का समर्थन किया की भ्रष्टाचार से लड़नेवाले लोगों की राजनैतिक मंच तैयार की है और उसमे एंटी करप्शन फ्रंट मील का पत्थर साबित होगा. एशिया के सबसे बड़े साकेत बार के अध्यक्ष मदनलाल ने कहा की भ्रष्ट व्यवस्था को बदलने का संकल्प , जो इस राजनैतिक पार्टी ने दिखाई है , उसके लिए सम्पूर्ण अधिवक्ता समाज समर्थन करता है.
इस अवसर पर आर.टी. आई एक्टिविस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के महासचिव गोपाल प्रसाद ने कहा की आज सबसे बड़ी आवश्यकता इस बात की है की भ्रष्टाचार के विरोध में सकारात्मक पहल एवं जनजागृति लाई जाए, जो हम सबों का सामूहिक कर्त्तव्य है. आर.टी आई. के अधिकाधिक प्रयोग से भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को एक सही दशा और दिशा दी जा सकती है . जद (यू) का यह नया फ्रंट इस दिशा में अग्रसर हो ,ऐसी हमारी अपेक्षा है.
वहीं जद (यू ) एंटी करप्शन फ्रंट के राष्ट्रीय महासचिव चंद्रकांत त्यागी ने आगत सभी अतिथियों आभार व्यक्त करते हुए कहा की हमें इकठ्ठा होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ जनयुद्ध छेड़ने की आवश्यकता है.
उक्त अवसर पर "भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक आन्दोलन : चिंगारी जो नहीं बुझेगी " लघु नाटिका कुमार साहिल एवं उनके साथियों की सहभागिता से प्रस्तुत किया गया ,जिसकी दर्शकों ने काफी सराहना की. इसके साथ ही गणमान्य कवियों द्वारा प्रस्तुत भ्रष्टाचार पर केन्द्रित कविताओं की श्रोताओं ने मुक्तकंठ से तारीफ की.

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

निजी क्षेत्र में आरटीआई का प्रावधान क्यों नहीं ?--गोपाल प्रसाद

(नई दिल्ली,14 अप्रैल 2011 ) बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के जयन्ती के अवसर पर " आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ इण्डिया " द्वारा लक्ष्मी नगर में आयोजित "यदि आज आंबेडकर जीवित होते " बिषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद (आरटीआई एक्टिविस्ट)ने कहा कि यदि आज आंबेडकर जीवित होते तो वे निश्चित रूप से दलितों को सूचना का अधिकार प्रयोग करने ,आरटीआई एक्ट को सशक्त करने तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून में कठोर प्रावधान अवश्य करते. वास्तव में सूचना का अधिकार (RTI) का अधिकाधिक प्रयोग करके ही भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को उजागर किया जा सकता है. भ्रष्टाचारियों को नकेल डालकर ही कानून का भय बनाया जा सकता है. जब तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनहित हेतु आरटीआई एक्ट को और अधिक शक्ति नहीं दिया जायेगा तब तक कानून तोड़नेवालों के दिल में कानून के प्रति सम्मान कैसे हो सकता है? वास्तव में कानून का सम्मान ही भारतीय संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर का सम्मान है और यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजली होगी. कालाधन वापस लाने एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन का सबसे अधिक फायदा दलितों, शोषितों एवं उपेक्षितों को होगा. हमें जनजागृति लानी होगी की आज हमें सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार ,रोजगार का अधिकार आदि प्राप्त है. चिंता का विषय यह है कि इसके बारे में आम जनता को अभी भी जानकारी प्राप्त नहीं है. हमें सरकार पर निर्भर रहने के बजाय स्वैक्षिक स्तर पर जनजागरण के माध्यम से इस आन्दोलन को तेज करना होगा. जब जनता जागेगी तो बदलाब अवश्य आएगा. आन्दोलन और जनजागृति में अन्योनाश्रय सम्बन्ध है अर्थात ये एक दूसरे के पूरक हैं. सन 1942 के भारत छोडो आन्दोलन अभियान में लगभग 5%लोग ही शामिल थे और उसी के बदौलत हमने ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंका था . आज भी पांच प्रतिशत जनता इस आन्दोलन के सहभागी बन जाएँ तो बदलाव आने में कोई बिलम्ब नहीं होगा. अन्ना हजारे द्वारा लोकपाल विधेयक लागू करने हेतु आमरण अनशन की सफलता इसका प्रत्यक्ष उदहारण है. हमें मौन रहने के बजाय अन्याय ,शोषण, भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रतिकार करने की क्षमता लानी होगी. जब शोषित समाज आवाज उठाएगी तभी हुक्मरान सही कदम उठाने को मजबूर होगा और इसके लिए हमें दूसरों की प्रतीक्षा किए बिना स्वयं पहल करना होगा .दलित भागीदारी के बिना कोई आन्दोलन मानवाधिकार आन्दोलन नहीं हो सकता. इसके लिए बौद्धिकता और तर्क को विकसित करना होगा. आज यदि आंबेडकर जीवित होते तो निश्चित रूप से निजी क्षेत्र में आरटीआई का प्रावधान लागू करने एवं कालाधन जमा करने वालों पर सख्त कानून बनाते. क्या निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार नहीं है? भ्रष्ट नेता, भ्रष्ट नौकरशाह एवं भ्रष्ट उद्योगपतियों कि तिकड़ी ने अपराधियों के बलबूते निर्दोष जनता के हक़ को छीनकर बुनियादी सुविधाओं एवं विकास के मद के सरकारी कोष में हेराफेरी से प्राप्त धन को देश से बाहर एवं देश के अन्दर अन्य नाम से जमा कर रहें हैं . यही कालाधन है. सरकार को इसपर टैक्स लगाने के बजाय बिहार और म.प्र. की तरह पूर्णतः जप्त कर जनहित मद में प्रयोग करने का प्रावधान बनाना चाहिए. अब तक 40 -45 आर्थिक समितियों एवं आयोगों द्वारा किये गए विश्लेषण के बाद भी आज तक कोई भी सरकार इस कालाधन को प्राप्त करने एवं देश की बुनियादी आवश्यकताओं में इसका उपयोग करने कि पहल क्यों नहीं की? हमारे राजनेताओं में इच्छाशक्ति की कमी तथा नीति एवं नीयत में खोट रहने के कारण समस्याएँ घटने के बजाय बढ़ रही है .कालेधन की अर्थव्यवस्था न होती तो आज हम जापान और चीन को पीछे छोड़कर विश्व की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश का गौरव प्राप्त कर पाते. भ्रष्ट देशों की सूची में हमारे देश का नाम ऊँचे पायदान पर नहीं होता. आज आंबेडकर जीवित होते तो निश्चित रूप से संविधान में संसोधन के बजाय समसामयिक समस्याओं के मद्देनजर नया संविधान लिखते. अपनी बातों के समर्थन में होसंगाबाद (म.प्र.) के सजीवन मयंक के गीत "नया विधान लिखें" का अवश्य जिक्र करना चाहूँगा जो काबिलेगौर है :----- हमने अपने संविधान में इतने संशोधन कर डाले . बेहतर हो हम सब मिलजुलकर अपना नया विधान लिखें.. हर कुटिया को मिले उजाला, हर बचपन को प्यार मिले, सबकी जाति हो हिन्दुस्तानी , जन- जन को अधिकार मिले, हर बच्चे को मिले खिलौना सबके घर हो नरम बिछौना. हर मुखड़े पर भारतवासी स्वाभिमान प्रतिमान लिखें. कल की बातें वर्तमान में , अक्सर छल कर जाती है, परिवर्तित बातें जीवन में , सब कुछ हल कर जाती हैं, अपनी भूलें सुधारें खुद ही औरों से क्या लेना है. हर मंदिर हर भाषा में हम सबका भगवान लिखें.. राजनीति का अर्थ देश को , स्वर्ण सबेरा देना है , आजादी को इस आँगन में, अटल बसेरा देना है, यह माटी हम सबकी जननी इसका नव श्रृंगार करें. सभी जाति के लोग नाम के आगे बस 'इन्सान' लिखें.. ........................................................................................ लखनऊ के प्रो. ओमप्रकाश गुप्त 'मधुर' के गीत "कौन श्रेष्ठ कह सकता है?" में हमारे वक्तव्यों की झलक दीख पड़ती है :-- भारत के इस लोकतंत्र को ,कौन श्रेष्ठ कह सकता है . लोक जहाँ पर लोप हुआ ,क्या तंत्र शेष रह सकता है? नेताओं नौकरशाहों में ऐसी हुई जुगलबंदी , व्यापारी दोनों हाथ से लूट रहे कह कर मंदी , आम नागरिक भूखा नंगा, ठोकर ही सह सकता है. लोक जहाँ पर लोप हुआ ,क्या तंत्र शेष रह सकता है? शासन तो दुष्यंत बना ,जनता बन बैठी शकुंतला , भोग लिया फिर भूल गया ,अपने महलों की और चला , जनता की आँखों के बदव में ,सागर दह सकता है . लोक जहाँ पर लोप हुआ ,क्या तंत्र शेष रह सकता है? वोटों के सौदागर देते जाति-पांति के आरक्षण , प्रतिभा को पीलिया हुआ है ,लकवाग्रस्त हुआ है शिक्षण , एक सुनामी और हुई तो ,तंत्र -मंत्र दह सकता है . लोक जहाँ पर लोप हुआ ,क्या तंत्र शेष रह सकता है? ........................................................................................... अजीत शर्मा 'आकाश' (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी,इलाहबाद) के गजल में आंबेडकर के सूत्रवाक्य नजर आते हैं :--- नाम अत्याचार का जड़ से मिटाएगी जरूर. देख लेना क्रांति की लहर आएगी जरूर .. राख़ में लिपटी हुई ये आग हवा चलते ही, एक न एक दिन शोषकों का घर जलाएगी जरूर, आज तो सूरत प्याला जहर का पी जाएगा, कल मगर उसको ये दुनिया सर नवाएगी जरूर. रख सकोगे कब तलक वंचित ये जनता एक दिन, तय समझ लो अपना हर अधिकार पाएगी जरूर, एक बेंजामिन मरेगा जन्म लेंगे सैकड़ों , उन्हें सरकार फांसी पर चढ़ाएगी जरूर . अब बगावत पर उतर आओ ,सुनो अहले चमन , ये खिजां वर्ना सितम तुमपर भी ढायेगी जरूर. संगठित होकर दिखा दो ,संगठन में शक्ति है , जो विरोधी शक्ति होगी मुंह की खाएगी जरूर, मांगने से यदि न मिल पाए तो बढ़कर छीन लो , हर सफलता खुद-ब-खुद कदमों में आयेगी जरूर, हौसला तूफान से लड़ने का होना चाहिए , सीना-ए-दरिया पे कश्ती डगमगाएगी जरूर.. .......................................................................... नवलगढ़ (राजस्थान) के ओमप्रकाश व्यास की चार पंक्तियाँ हमारे लिए प्रेरक है :-- देश आतंक से घिरा है , अब तो उसपर ध्यान धर, छेड़ मत फिल्मी तराने , देशभक्ति का गान कर,. मिट रही अपनी विरासत , नष्ट हो रही संस्कृति , इन सभी को बचाना ,राष्ट्रीयता का पान कर..

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

कैसे करें भ्रष्टाचार का सामना ? --गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट

भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना हजारे के आमरण अनशन रुपी शंखनाद के बाद दिल्ली के प्रीत विहार इलाके में एक विचार गोष्ठी में "भ्रष्टाचार का सामना कैसे करें" विषय पर चर्चा हुई. "आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया " के महासचिव गोपाल प्रसाद ने कहा कि यूपीए सरकार अब तक की सबसे भ्रष्टतम सरकार है. वास्तव में सोनिया गाँधी ने संसद, प्रधानमंत्री को हाईजैक कर लिया है . राष्ट्रीय सलाहकार समिति (NAC ) बनाकर अपनी महत्ता साबित करने तथा मंत्रीमंडल को पंगु करने के सिवा इसका कोई दूसरा काम नहीं है.जनता अब पहले के बनिस्पत जागरूक हो चुकी है. भ्रष्टाचार और कमरतोड़ मंहगाई ने जनता का जीना मुहाल कर रखा है. देश की जनता की पीड़ा अब असहनीय हो चुकी है और उसे अब हर हाल में बदलाव चाहिए . प्रख्यात योग गुरु स्वामी रामदेव के कालाधन को वापस लाने एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण के बाद जनता पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा है. बाद में भाजपा द्वारा संसद के बाहर एवं संसद के भीतर आन्दोलन चलाने के बाद इस मुहिम ने और रंग पकड़ा. निराश जनता के मन में आशा की किरण प्रस्फुटित हो गई. तीसरे चरण में अन्ना हजारे के आमरण अनशन की घोषणा ने बाकी की कोर कसर पूरी कर दी . सम्पूर्ण देश के प्रायः सभी इलाकों से छात्रों, नौजवानों, युवतियों, बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं एवं विकलांगों ने अपना पूरा समर्थन दिया ,जो स्वतः स्फूर्त था. यह कोई प्रायोजित कार्यक्रम नहीं था ,बल्कि हर वर्ग ,हर धर्म, हर संप्रदाय ,हर क्षेत्र के दिल की भड़ास था . जिसके कारण केंद्र ही नहीं विभिन्न राज्य सरकार की सत्ता भी हिलने लगी थी, तभी तो सभी नेताओं ने इस आमरण अनशन को शीघ्र तुडवाने का आग्रह किया था और सोनिया गांधी एवं प्रधानमंत्री को भी इनके लोकपाल बिल की मांग को स्वीकार करना पड़ा . पिछले महीने भारत के प्रधानमंत्री से हमने लालकिला के प्राचीर से किए गए घोषणाओं एवं उनके क्रियान्वयन के सम्बन्ध में सूचना का अधिकार अधिनियम(RTI ) के तहत जानकारी मांगी थी. प्रधानमंत्री कार्यालय के जबाब के अनुसार प्रधानमंत्री का काम घोषणा करना होता है ,उनका क्रियान्वयन नहीं. हालाँकि योजनाओं के क्रियान्वयन की रिपोर्ट दी गई थी ,परन्तु वह संतोषप्रद नहीं था. इससे यह तो साफ झलक गया कि समन्वय की कितनी कमी है. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने एवं उसकी मॉनीटरिंग हेतु क्या -क्या उपाय प्रधानमंत्री ने किये हैं ,के सम्बन्ध में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री द्वारा पिछले बर्षों में दिए गए भाषणों की प्रतिलिपि भेज दी गई , जब प्रधानमंत्री कार्यालय का यह हाल है तो देश के अन्य मंत्रालयों का अनुमान आप स्वयं लगा सकते हैं. योजना आयोग के निदेशक ने तो हमारे आरटीआई प्रश्नों के जबाब में वेबसाईट देखने और किताब पढ़ने की सलाह दे डाली. योजना आयोग के अफसर एसी कार्यालय में रहकर योजना बनाते हैं , उन्हें जमीनी हकीकतों का कितना ख्याल होगा?केंद्र सरकार के ही एक मंत्री ने इसपर योजना आयोग का मखौल उड़ाया था. जन बूझकर भ्रष्टाचार के जाँच हेतु बनी संस्थाओं को सशक्त एवं अधिकार संपन्न नहीं बनाया जाता है क्योकि सरकार की नीति और नियति दोनों में ही खोट है. कालाधन,बोफोर्स घोटाले ,भोपाल गैस कांड के अभियुक्त एंडरसन के प्रत्यर्पण , कॉमनवेल्थ, आदर्श सोसाईटी , टूजी स्पेक्ट्रम आदि मामलों में सरकार के रवैयों की पोल खोल दी है. हमें आशा ही नहीं विश्वास है कि भ्रष्टाचार का मुकाबला करने के लिए अन्ना हजारे द्वारा पेश किए गए बिल के द्वारा ही नकेल कसी जा सकती है, बशर्ते कि इसमें जनता की नुमाइन्दगी करने वाले भ्रष्ट नेताओं के जैसा आचरण न करने लगे. इस बिल के सख्ती से लागू होने के बाद भारत को सशक्त एवं समृद्ध बनने से कोई नहीं रोक सकता है. भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. ए.पी.जे. कलाम के सपनों के भारत की सार्थकता तभी संभव हो सकती है. गैरसरकारी संस्था "अभियान " के अध्यक्ष दीपक गुप्ता ने कहा कि सब लोग कुछ न कुछ अलग -अलग कर रहे थे . मेरा यह प्रयास है कि सर्वप्रथम मैं को हम करें. उड़ान फाउँडेशन के संजय गुप्ता ने पूर्वी दिल्ली की अनेक समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के कारण ही भू माफिया, पार्किंग माफिया एवं शराब माफिया का वर्चश्व बढ़ गया है. काफी लिखने-पढ़ने के बाबजूद भी कारवाई नहीं होती है. उससे भी दुखद बात यह है कि लोग आगे आने के लिए तैयार नहीं होते. पर्सनालिटी डेवलपमेंट विशेषज्ञ निखिल त्यागी ने कहा कि सिस्टम को ठीक करने की चुनौती आज एक यक्ष प्रश्न है. उसके लिए दूरदर्शी सोंच, आगे की कार्ययोजना और वास्तविक उपलब्धि महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी. बिभिन्न स्कूल -कालेजों में सेमिनार, डिबेट आयोजित कर जनजागरूकता को बढ़ावा देना होगा. आज अमेरिका सम्पूर्ण विश्व में अपना दबदबा कैसे बना रहा है ,यह हमें समझाना होगा.वास्तविक विकास हेतु मानसिकता में परिवर्तन आवश्यक है. अतः दकियानूसी मानसिकता पर प्रहार कर उत्कृष्ट मानसिकता लानी होगी ,जो सम्पूर्ण देश के हित में हो. "स्मार्ट डज स्मार्ट" नामक पुस्तक का जिक्र कर उन्होंने कहा की देश के हर जागरूक नागरिक को स्मार्ट पैरेंटिंग का उत्तरदायित्व निभाना होगा. सवर्ण शक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि जड़ अयोग्यता में है . योग्य व्यक्ति आए तभी भ्रष्टाचार रूकेगा. बालाकृष्णन , थॉमस ,दिनकरण आदि को पदस्थापना जातिवाद के कारण ही मिली जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला .इसलिए जिसमें योग्यता है उसे ही आगे लाया जाए. इंजीनियर चंद्रकांत त्यागी ने कहा कि शिव खेडा के आह्वान पर "हम कुछ कर सकें " की भावना के तहत ऐसी सोसाईटी को कॉल किया था ,जो चेंज चाहती थी. शिव खेडा के पार्टी से त्यागपत्र देने के बाद तेजेंद्रपाल त्यागी के नेतृत्व में हम आज भी यह लड़ाई लड़ रहे हैं. विदेशी लोग यहाँ आते हैं ,जिनका सामना यहाँ भ्रष्टाचार से होता है . वास्तव में देश की 80 % जनता इससे प्रभावित है . देश के अधिकाश भाग में आज भी मूलभूत सुविधाएँ नहीं है. हमें समस्याओं पर बातचीत के बजाय ,उनमें से एक समस्या के समाधान पर काम करना चाहिए. शुरुआत एक की करें , तभी कुछ बदलाब हो सकता है. हम ऐसी सिस्टम डेवलप करें जो बता सके कि कौन अयोग्य है. मजदूरों कि समस्याओं (ESI ,PF , तथा प्रॉपर मेडीसिन नहीं मिलना ) पर काम करने की आवश्यकता है. सवर्ण शक्ति पार्टी के महासचिव सुभाष शर्मा ने कहा कि वार्ड पार्षद , विधायक ,संसद बनकर बदलाब लाना पड़ेगा. टी.एन.शेषण के कार्यों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि सबको कुछ न कुछ बनाना पड़ेगा तभी क्रांति आएगी. बहुजन समाज पार्टी पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि बहनजी को पैसा देकर टिकट प्राप्त करनेवाला क्या जनता से मतलब रखेगा? टूल आने के बाद ही चेंज करने की परिकल्पना साकार हो सकती है. ऐसे कार्यक्रम बनाना पड़ेगा ,जो लोगों के लिए तथा लोगों को समझाने लायक हो. लोकतान्त्रिक व्यवस्था में सत्ता प्राप्त करके ही व्यवस्था परिवर्तन संभव हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट के युवा अधिवक्ता संदीप दुबे ने चाणक्य नीति एवं नन्द वंश के समूल खात्मे के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि हमें चन्द्रगुप्त तैयार करना पड़ेगा,छोर पकड़ना पड़ेगा. सबसे उपयुक्त फार्मूले का क्रियान्वयन हो तथा हम दिखें न दिखें मुट्ठी दिखनी चाहिए. भूखे चाणक्य के आग्रह पर बुढ़िया द्वारा परोसे गए गरम खाने के दौरान चाक्य के हाथ जल जाने पर बुढ़िया द्वारा दी गए जबाब " तुम्हें गरम भोजन को ग्रहण करने की विधि भी नहीं मालूम , इसे किनारे से खाना पड़ता है" का उदाहरण अपने आप में एक महत्वपूर्ण सन्देश है. बूढा बगुला का कहानी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि धूर्त बूढ़े बगुले ने कुछ दिनों तक मछलियों को नहीं खाया और बाद में एक- एक करके सभी मछलियों को दूसरे तालाब में ले जाने के बहाने खा गया. केकड़ा को इसी प्रकार ले जाने पर केकड़ा ने कहा कि हम तो तुम्हारे गर्दन पर ही जाएँगे. जंगल में मछलियों के ढेर सारे कांटे देखने पर केकड़ा ने बगुला का गर्दन पकड़ लिया. अंत में उन्होंने कहा कि धूर्त बगुला के विलाप में न पड़कर किसी एक को तो केकड़ा बनना ही पड़ेगा. आईये भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपने प्रयासों को एकसूत्रित कर भारत को सशक्त करने में अपना योगदान दें.

रविवार, 3 अप्रैल 2011

मेघनाद साहा का पत्र गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट के नाम

नई दिल्ली 14 .02 .2011 . समीपेषु : श्री गोपाल प्रसाद बाबुसाहब, तुम याद तो आते ही हो मगर आज मुझे विवश करते हुए बहुत याद आ रहे हो . इसलिए वार्तालाप से अपारग होकर मैंने लेखनी उठाई है .दरअसल बीते दिन रविवार को टी.वी. पर एक कार्यक्रम देखा और गहन मनोयोग के साथ सुना .हाँ ,दूरदर्शन राष्ट्रीय प्रसारण के कार्यक्रम "जानने का हक " दोपहर के तीन बजे से देख रहे थे . अधीर आग्रह के साथ साँस रोककर हमलोग इंतिजार कर रहे थे. अंततः जो सूचना मिली थी ,उसकी सच्चाई भरी इंटरव्यू के जरिए पाए. जो खबरें अंगरेजी और हिंदी समाचारपत्रों में आई थी वह सब पढ़कर हमलोग अत्यंत दुखी हुए थे -"अशोक विहार के सत्यवती कॉलेज के हाते में जघन्य रूप से हरे - भरे जीवंत पेड़ों को काटा गया." एक शैक्षिक प्रतिष्ठान के अधिकारी ऐसा कैसे कर सकते हैं-सोचना हमारे लिए संभव नहीं हो पा रहा था . मगर जान लो ,सुन लो -हम खुश थे ,क्योंकि तुम परमेश्वर की असीम अनुकम्पा से कुछ आक्रमणकारियों के हाथों से बच पाए. हम देशवासी वाकई खुश हुए थे , इसके लिए और उस साहसी महिमामयी नारी के लिए भी जो उस दिन उसी समय उन दुष्कर्मियों के हाथों हत्या होते होते बच गयी थी और तुम दोनों के जीवनहानि होते-होते बच जाने से तुम्हारे निकटजनों को ,परिचित -अपरिचितों को अत्यंत आनंद मिला ही होगा . फरवरी के तीन तारीख को समाचारपत्रों में अधूरे खबर पढ़कर ही सब के दिल धंस गए थे -आज तो सोंचते हुए भी रोंगटे खरे हो जा रहें हैं. गतकाल भारत सरकारके दूरदर्शन चैनल पर गोपाल प्रसाद तुम्हारे और श्रीमती नंदा सावंत के साक्षात्कार प्रत्यक्ष कर हम बहुत कुछ जान पाए . मैं निश्चित हूँ की मेरी तरह सब के हृदयों में यह तांडव घृणा के रूप में तिरस्कृत हुए होंगे . फिर दूरदर्शन के कर्त्पक्षों के प्रदर्शन से साफ-साफ पता चला है कि तुम्हारा और श्रीमती नंदा सावंत के यह दु:साहसिक विरिध प्रदर्शन उन्हें गर्वित किया है. अतः सरकार भी आपके ऐसे पुण्यकर्मों से प्रभावित होकर आपके साथ है -इसमें कोइ संदेह नहीं . कम से कम यह तो संभव हो सका कि सरकारी उद्यम "सूचना तथा प्रसारण विभाग " तुम दोनों पर हमला करने वालों की निंदा की .मगर यथार्थ रूप से सब कुछ सूचित नहीं हुआ .हम ,आप को करीब से जानने वाले तो आप से पूछकर जान पाएँगे ,बांकी कुछ और लोग भी हमसे सूचना प्राप्त करेंगे -किन्तु जनसमुदाय नहीं जान पाएँगे. यह ठीक बात नहीं है क्योंकि जब तुमलोग इस तरह से जान हथेली पर लिए सरे देश में फैले अंधकार दूर हटाने का शपथ लिए हो -तब देश के हर कोने से दल के दल नौजवानों को ,नवयुवतियों को ऐसे महान कर्मों में अवश्य ही साथ देना चाहिए .दिल के हर अंश में डंके की चोट पा रहा हूँ -क्योंकि सोंच कर भी समझ में नहीं आता कि कैसे उस कॉलेज के विद्यार्थियों पर उन पेड़ों को कटवाने का प्रभाव ही नहीं पड़ा?....ऐसी शीतलता ! हाय परमेश्वर ...ओ परवरदीगार !! उनका स्मरण तथा ध्यान करते हुए सत्य कथा कह रहा हूँ कि ,'बाबू गोपाल तुम्हारे लिए तो सावित्री मिल जाती मगर उस नारी के चलते क्या होता? प्रलय नृत्य शुरू कर देता एक ' राजा '-चाहे भाग्यवती या गुणवती महाविद्यालय का प्रांगण क्यों न हो !सरे विद्यार्थीगण भी समवेत होकर ' नटनृत्य -प्रलय नर्तन 'आरम्भ कर देते .फिर ?...मार गंडासा ,मार त्रिशूल ...जैसे प्रहार वज्र से ,उन्मूलन पवन देव से ! हाँ ,तुम दोनों बचे ,तो बच गयी यहाँ की सामाजिक स्थिति -अन्यथा कुछ भयंकर घटना घट जाती तो यहाँ की धरती पर मातम छा जाता .सारे राजस्थान के वासी यहाँ आ जुटते ....सारे उत्तरप्रदेशी उमर -घुमड़ कर आ जाते ...और?सारे बिहारी बाबु यहाँ आकर आंधी उठाते !हर तरफ गूंजती दलितों के विक्रम की भाषा पर्यावरण की रक्षा के लिए -'पेड़ों को बचाओ -प्रकृति बचाओ !'-नारे. अतः कहता हूँ :"संवेदनशील व्यक्ति या गोष्ठी ,स्वभावतः केवल मात्र मानवाधिकार रक्षा के लिए ,दुखियारों पर हो रहे अत्याचारों को बंद करने के लिए -तथा भ्रष्टाचार जड़ से उखाड़ाने के लिए तत्पर नहीं होते ;वरन चरित्र अनुयायी बन जाते हैं स्वयं शोषित ...दलित भी .रहा नहीं जाता उन लोगों से -लुगाइयों से और स्वेच्क्षा से बन जाते हैं सुधारक .दृढ -कर्मठ -क्रांतिकारी -निडर युवक-युवती !" हाँ ऐसा ही है . फिर हो रहे दुष्कर्मों की खबरें उन्हें मिल ही जाती है ,और गहन जानकारी के लिए निकल पड़ते हैं दुष्कृतियों के आलयों पर दृढ़ता के साथ आहटें देने के लिए . फिर यह भी गर्व की बात है कि सरकार की ओर से ' जानने का अधिकार ' सब को है. अतः वर्तमान काल के समाज से फिर अनुरोध करता हूँ :'सावधान दलित -दुखियारों को और ण तड़पाओ !!'आप कहेंगे :'कहाँ,कोइ किसी को तड़पा रहा है ?...कटे तो हैं सिर्फ चंद पेड़ों को !बस इसके लिए नानी मारी ?' शाबाश दुष्कर्म -जगत के आधुनिक रावणों ! नए आकार में आज भी हो !! महातीखी गली न देते हुए कह रहा हूँ कि : 'अबे ! उफ तक नहीं करते इसलिए पेड़ -पौधों को काटकर प्रकृति का विनाश करोगे ?...सावधान पृथ्वी तप रही है !पेड़-पौधों को ण काटो !! बहुत हो गया ,अब दिन आ रहें हैं जब एक काटोगे तो तो अपना गर्दन खोओगे . गजब है , जो ऐसा करने के लिए मन करने जाती /जाता है उनकी हत्या करने हावी होते हो !...सावधान ,महान अनिष्ट की संभावना है ...सावधान पृथ्वी तप रही है !' और श्री गोपाल प्रसाद ,आप से निवेदन है कि जो कुछ भी हुआ उसके कारण उदास न होना . हरप्रभ होने का प्रयोजन ही नहीं -सारा जमाना तुम्हारा तथा श्रीमती नंदा सावंत के साथ है. भविष्य में और करीब होंगे . ऐसे में तो तुम्हे असीम खुशी हासिल होनी चाहिए क्योंकि हम जनगण को पता चल गया है कि गत 3 फरवरी के दोपहर को सूचना मिलते ही सरकार के प्रशासन - कर्माधिकारीगण किस तरह से तत्पर हुए थे और कुछ ही अन्तराल में घटनास्थल पर जा पहुंचे थे . परमाराध्य देव- देवियों से नियत प्रार्थनारत रहूँगा कि सेवारत कनिष्ठ तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी महोदयों का सम्पूर्ण सहारा सर्वदा आप पर रहे ...आप जैसे नौजवानों ,नवयुवतियों पर रहे . सारे भारत में तमाम सेवानिवृत प्रशासनिक तथा अन्यान्य वरिष्ठ अधिकारीगण से निवेदन करता हूँ कि इस दिशा में उनके ह्रदय और संवेदनशील बनें , और वे सम्मिलित होकर वीरदर्प के साथ , प्रत्यक्ष रूप से आप जैसे समाज सेवियों के साथ रहें, सहारा दें. इसलिए ,सुनो श्री गोपाल श्रीमती नंदा : 'दुखी न होकर प्रकृति विनाश्कारियों से और गहरा सम्बन्ध स्थापित करना होगा . उन्हें यथार्थ रूप से प्रकृतिप्रेमी बनाना होगा अन्यथा हानि करने कि आदत वे नहीं छोड़ेंगे. सब को पूर्ण विश्वास है कि वह दिन दूर नहीं जब वे लोग तुम्हारे प्रयासों को समझ पाएँगे और सहयोगी बन जाएँगे! उदहारणस्वरुप सैवात्र सूचना देनी होगी कि निर्माणस्थलों में वृक्षों को काटना ही पड़ेगा ,ऐसी बात नहीं है . सब की रक्षा करते हुए अनायास निर्माणकार्य चलाया जा सकता है . अनुरोध करता हूँ कि नई दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समीप निर्माणाधीन कार्यक्षेत्र पर एक बार आओ और यथार्थ रूप से जांचो किस मानवदरदी भावना के साथ उपवन बगैर विनष्ट किए वहां भवन बनाया जा रहा है . आशा है इसे और ऐसे कार्यस्थलों को जाँचकर तुमलोग जनगण को यथोचित सन्देश दोगे . परियोजना , प्रकृति विनाश के लिए नहीं है!! अंत में एक वक्तव्य रखना चाहता हूँ , : ' पर्यावरण तथा प्रकृति का आँचल की रक्षा करने के लिए अवश्य ही जनजागृति की जरूरत है -और इस दिशा में जनता की छह दृश्य -मन से होनी चाहिए..' जनचेतना जगाने के लिए मैं श्री गोपाल प्रसाद से अनुरोध करता हूँ कि मत भूलें , :' सावधान पृथ्वी तप रही है !' हाँ, आप ही द्वारा प्रकाशित यथार्थवादी नाट्य-साहित्य जनित यह पुस्तक 'सावधान पृथ्वी तप रही है !' के बारे में कह रहा हूँ , अनुरोध करता हूँ श्रीमती नंदा सावंत को और श्री राजा को कि इस नाटक को मंचन करें ! जनचेतना बढाएँ क्योंकि नाट्यकला -गीत नृत्य -धर्म दृश्यकला के आप पुजारी हैं .श्री गोपाल से भी मिन्नत कर रहा हूँ कि ,:'उनका प्रयास इस तरह से नाट्यमंच के माध्यम से और सशक्त होकर करवाएं , सहारा दें ..इस संकल्प में सफल होने के लिए यथार्थ सरकारी विभागों में दरबार करें !!" आशा तो है ही -निश्चित हूँ तुमलोग सफलता प्राप्त करोगे . ईश्वर मंगलमय हैं ...सदा निहारते हैं साईं ...आशीर्वाद देते हैं हरि-हर !... बख्शते हैं परवरदीगार !! इति :-- अनेक शुभकामनाओं के साथ , मेघनाद राजा

गुरुवार, 31 मार्च 2011

आरटीआई के सशक्तिकरण से ही लोकतंत्र सशक्त होगा : गोपाल प्रसाद




आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सेमिनार हॉल में लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका " विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन बार के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष प्रवीण एच पारीख ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री पारीख ने कहा की लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई एक्ट एक बेहतर टूल साबित हो सकता है . अमीरों के लिए आरटीआई का कोइ खास महत्त्व बेशक न हो परन्तु गरीबों के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कार्टूनिस्ट आर .के.लक्षमण का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग कुछ खास करने के लिए संकल्पवद्ध होते हैं .वैसे लोग शरीर और मन दोनों से कठोर परिश्रम करने वाले होते हैं, जिनमें से एक गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. आज आरटीआई आन्दोलन को ऐसे ही संकल्प शक्ति वाले उर्जावान लोगों की आवश्यकता है. इंडिया ऑन फ़ोन के सीईओ इ.के.झा ने संस्था के साथ मिलकर आरटी आई ऑन फोन के माडल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला एवं टेलीफोन के माध्यम से आरटीआई आन्दोलन को गति देने का संकल्प लिया .उन्होंने कहा की आज आरटीआई को गाँव तक एवं देश के अंतिम पायदान पर खड़े जमात तक पहुँचाने की आवश्यकता है. इसे पूरा करने हेतु उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपील की .उन्होंने कहा की इंडिया ऑन फोन के हेल्पलाइन नंबर 9891919135 पर देश के किसी भाग का नागरिक अतिशीघ्र आरटीआई कार्यकर्ताओं एवं आरटीआई से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है .नई टेक्नोलोजी के बिना आरटी आई आन्दोलन की गति तेज एवं प्रभावी नहीं हो सकती है. सोशल कम्युनिटी साईट फेसबुक पर सूचना का अधिकार कम्युनिटी चलनेवाले न्यूज प्रोड्यूसर हसन जावेद ने आरटीआई के बढ़ते प्रभाव एवं ब्यूरोक्रेसी की मानसिकता को बड़े अच्छे तरीके से प्रस्तुत किया. पर्सनालिटी डेवलप[मेंट विशेषज्ञ निखिल त्यागी ने अमेरिका एवं चीन के अग्रणी रहने का उदहारण देते हुए कहा की अगर हमें पारदर्शिता चाहिए तो सबसे पहले हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी. हमें अग्रणी बनाने हेतु आक्रामक भूमिका में आना होगा तभी हम वर्तमान भ्रष्ट व्यवस्था से लडाई लड़ सकते हैं. संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद ने आरटी आए क्षेत्र के अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान प्राप्त अनुभव एवं कठिनाईयों पर प्रकाश डाला . अपने संबोधन में उन्होंने कहा की आरटीआई ड्राफ्टिंग अपने आप में एक महत्वपूर्ण कला है, जिसे सीखने एवं सिखाने की आवश्यकता है. जब तक प्रश्न पूछने की कला नहीं आएगी तब तक आपको सही जबाब नहीं मिलेगा. आरटी आई के प्रश्नों में क्या, कब, कहाँ ,कैसे क्यों आदि प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करने के बजे उसे जानकारी का रूप देकर बगैर प्रश्न वाली शैली में प्रयोग किया जाना चाहिए, अधिकांश लोग ऐसी गलती किया करते हैं. उन्होंने कहा की उनके संस्था गठन करने का लक्ष्य सर्वप्रथम आरटीआई एक्टिविस्टों के अधिकार की लड़ाई लादना है. इसके लिए सर्वप्रथम सामूहिक प्रयास से अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का लाभ आरटीआई आवेदकों को दिलाना है . इस हेतु तंत्र विकसित कर आरटीआई क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण एवं जनजागरण के अतिमहत्वपूर्ण पक्ष की चुनौती संस्था वहन करेगी .अतिशीघ्र राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर राज्य समन्यकों के माध्यम से प्रत्येक राज्य के राजधानी में आरटीआई विषयों पर विचारगोष्ठी एवं सम्मलेन आयोजित की जायेगी व्यवस्था से पीडीत लोग ही आन्दोलन का हिस्सा बन सकते हैं . लोगों को उसके नैतिक कर्त्तव्य के साथ-साथ अधिकार के बारे में जानकारी देने पर स्वतः क्रांति हो जायेगी. उन्होंने कहा की कौन कहता है की जयप्रकाश नारायण मर गए?आज जयप्रकाश नारायण आरटीआई एक्टिविस्टों के रूप में तथा उनका सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन आरटीआई आन्दोलन का नया स्वरुप है जो अब रंग ला रहा है. संस्था के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा की देश के ज्यादातर आरटीआई एक्टिविस्ट माध्यम वर्ग के ही हैं . उन्होंने लॉयर्स ऑफ़ द वर्ल्ड एसोसिएशन संस्था एवं आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के एक साथ रणनीति बनाने पर बल दिया तथा कहा की वे इसके लिए आगे विचार -विमर्श करेंगे ताकि इसे शीघ्र क्रियान्वित किया जा सके. . इंडियन इंस्टीचयुट ऑफ़ पोलिटिकल लीडरशिप के निदेशक शाहनवाज ने आरटीआई एक्टिविस्टों को दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया . अपने वक्तव्य में उन्होनेव कहा की वे आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साथ मिलकर लम्बी दूरी तय करने के प्रति आशान्वित हैं. संस्था के चेयरमैन धनीराम एवं संरक्षक अनिल कुमार मित्तल ने जनहित की भावना से आरटीआई फाईल करने की आवश्यकता पर जोर दिया. तृप्ति सोनकर के सरस्वती वंदना एवं अलीगढ के कवी एवं पत्रकार गाफिल स्वामी द्वारा भ्रष्टाचार पर केन्द्रित कविता को मुक्तकंठ से सराहना मिली.

सोमवार, 28 मार्च 2011

लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका

आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सेमिनार हॉल में लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका " विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन बार के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष प्रवीण एच पारीख ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री पारीख ने कहा की लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई एक्ट एक बेहतर टूल साबित हो सकता है . अमीरों के लिए आरटीआई का कोइ खास महत्त्व बेशक न हो परन्तु गरीबों के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कार्टूनिस्ट आर .के.लक्षमण का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग कुछ खास करने के लिए संकल्पवद्ध होते हैं .वैसे लोग शरीर और मन दोनों से कठोर परिश्रम करने वाले होते हैं, जिनमें से एक गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. आज आरटीआई आन्दोलन को ऐसे ही संकल्प शक्ति वाले उर्जावान लोगों की आवश्यकता है. इंडिया ऑन फ़ोन के सीईओ इ.के.झा ने संस्था के साथ मिलकर आरटी आई ऑन फोन के माडल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला एवं टेलीफोन के माध्यम से आरटीआई आन्दोलन को गति देने का संकल्प लिया .उन्होंने कहा की आज आरटीआई को गाँव तक एवं देश के अंतिम पायदान पर खड़े जमात तक पहुँचाने की आवश्यकता है. इसे पूरा करने हेतु उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपील की .उन्होंने कहा की इंडिया ऑन फोन के हेल्पलाइन नंबर 9891919135 पर देश के किसी भाग का नागरिक अतिशीघ्र आरटीआई कार्यकर्ताओं एवं आरटीआई से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है .नई टेक्नोलोजी के बिना आरटी आई आन्दोलन की गति तेज एवं प्रभावी नहीं हो सकती है. सोशल कम्युनिटी साईट फेसबुक पर सूचना का अधिकार कम्युनिटी चलनेवाले न्यूज प्रोड्यूसर हसन जावेद ने आरटीआई के बढ़ते प्रभाव एवं ब्यूरोक्रेसी की मानसिकता को बड़े अच्छे तरीके से प्रस्तुत किया. पर्सनालिटी डेवलप[मेंट विशेषज्ञ निखिल त्यागी ने अमेरिका एवं चीन के अग्रणी रहने का उदहारण देते हुए कहा की अगर हमें पारदर्शिता चाहिए तो सबसे पहले हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी. हमें अग्रणी बनाने हेतु आक्रामक भूमिका में आना होगा तभी हम वर्तमान भ्रष्ट व्यवस्था से लडाई लड़ सकते हैं. संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद ने आरटी आए क्षेत्र के अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान प्राप्त अनुभव एवं कठिनाईयों पर प्रकाश डाला . अपने संबोधन में उन्होंने कहा की आरटीआई ड्राफ्टिंग अपने आप में एक महत्वपूर्ण कला है, जिसे सीखने एवं सिखाने की आवश्यकता है. जब तक प्रश्न पूछने की कला नहीं आएगी तब तक आपको सही जबाब नहीं मिलेगा. आरटी आई के प्रश्नों में क्या, कब, कहाँ ,कैसे क्यों आदि प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करने के बजे उसे जानकारी का रूप देकर बगैर प्रश्न वाली शैली में प्रयोग किया जाना चाहिए, अधिकांश लोग ऐसी गलती किया करते हैं. उन्होंने कहा की उनके संस्था गठन करने का लक्ष्य सर्वप्रथम आरटीआई एक्टिविस्टों के अधिकार की लड़ाई लादना है. इसके लिए सर्वप्रथम सामूहिक प्रयास से अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का लाभ आरटीआई आवेदकों को दिलाना है . इस हेतु तंत्र विकसित कर आरटीआई क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण एवं जनजागरण के अतिमहत्वपूर्ण पक्ष की चुनौती संस्था वहन करेगी .अतिशीघ्र राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर राज्य समन्यकों के माध्यम से प्रत्येक राज्य के राजधानी में आरटीआई विषयों पर विचारगोष्ठी एवं सम्मलेन आयोजित की जायेगी व्यवस्था से पीडीत लोग ही आन्दोलन का हिस्सा बन सकते हैं . लोगों को उसके नैतिक कर्त्तव्य के साथ-साथ अधिकार के बारे में जानकारी देने पर स्वतः क्रांति हो जायेगी. उन्होंने कहा की कौन कहता है की जयप्रकाश नारायण मर गए?आज जयप्रकाश नारायण आरटीआई एक्टिविस्टों के रूप में तथा उनका सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन आरटीआई आन्दोलन का नया स्वरुप है जो अब रंग ला रहा है. संस्था के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा की देश के ज्यादातर आरटीआई एक्टिविस्ट माध्यम वर्ग के ही हैं . उन्होंने लॉयर्स ऑफ़ द वर्ल्ड एसोसिएशन संस्था एवं आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के एक साथ रणनीति बनाने पर बल दिया तथा कहा की वे इसके लिए आगे विचार -विमर्श करेंगे ताकि इसे शीघ्र क्रियान्वित किया जा सके. . इंडियन इंस्टीचयुट ऑफ़ पोलिटिकल लीडरशिप के निदेशक शाहनवाज ने आरटीआई एक्टिविस्टों को दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया . अपने वक्तव्य में उन्होनेव कहा की वे आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साथ मिलकर लम्बी दूरी तय करने के प्रति आशान्वित हैं. संस्था के चेयरमैन धनीराम एवं संरक्षक अनिल कुमार मित्तल ने जनहित की भावना से आरटीआई फाईल करने की आवश्यकता पर जोर दिया. तृप्ति सोनकर के सरस्वती वंदना एवं अलीगढ के कवी एवं पत्रकार गाफिल स्वामी द्वारा भ्रष्टाचार पर केन्द्रित कविता को मुक्तकंठ से सराहना मिली.

रविवार, 27 मार्च 2011

Right to information as a tool for good governance and against corruption-P.H.Parekh

"RTI ACTIVISTS ASSOCIATION OF INDIA” organized a lecture on " ROLE OF RTI FOR EMPOWERMENT OF INDIAN DEMOCRACY" at Seminar Hall, Ramjas College Delhi University . Hon'ble Mr.Pravin.H Parekh Senior Advocate, Supreme Court of India and President Confederation of Indian Bar has preside over the lecture.Mr Pareekh Said that Right to information as a tool for good governance and against corruption: Corruption thrives on secrecy. Individuals and institutions become corrupt only when there is no public scrutiny of their actions. The more they operate in the public gaze the less corrupt and more efficient they are likely to be. In this respect, the right to information can be utilised as a tool to fight the widespread corruption in India. In 2006, India received a score of just 3.3 (out of a maximum of ten) in Transparency International’s Corruption Perceptions Index, ranking it 70th out of 163 countries. This reflects the serious corruption problem in India - a problem that affects not only businesspeople, but a wide range of individuals. In India, tax revenue meant for investment in public services is an attractive target for abuse. In addition, Indian citizens - especially the poor ones - frequently face corruption in public service delivery via the solicitation of bribes or speed money. A.K.Jha,CEO India on Phone said that there is a great challenge to connect each villages of India for RTI through phone. Revival of collapsed systems and sorting out people's problems is possible through this right, he said adding it is necessary for the common people to properly understand and use their democratic rights and responsibilities and exercise their franchise under the democratic set up. But, he said, the people's democratic responsibilities did not begin or end with casting their votes only since they are also required to nurture the democratic system in the day-to-day functioning. Mr Hasan Javed, News Producer said that Right to information as a tool for the fulfillment of economic and social rights. Anil Kumar Mittal Vice President said that , Citizens do not need to go to any office or even telephone anybody. They can enforce good governance from their homes. In the event, the public servant treats an RTI requisition with contempt or indifference, he faces the threat of paying a personal penalty. Dhani Ram ,Chairman and Assit.Professor Ramjas College Said that In its true sense, the RTI is a citizen's search for the truth about how his government functions -- a satyagraha. The movement is growing relentlessly and will lead India to the 'Swaraj' which we missed in 1947. A quiet peaceful revolution called the 'Right To Information' campaign is sweeping across the Nation. Sahnawaj Director institute of political leadership Said that I help this NGO to start a new segment on RTI. Sandeep Dubey President & Advocate Supreme Court of India said adding that the RTI Act was the outcome of the arguments of legal luminaries that freedom of speech depended on a derived right to information. If right to speech should be effective, there should be right to information. The right to live also meant right to live in decency and this included right to know. “Equality brings an obligation to share information,” he said. Gopal Prasad RTI Activist & General Secretry today said that- This programme aims at improving the Right to Information legislation, the implementation and enforcement of such legislation and the utilization of the Right to Information as a tool for Democracy. Motto of our organization is fight for the right of RTI Activist of India. We start statewise training campaign and awareness programme for RTI Activists. Saraswati vandana by Tripti sonkar and Poem on corruption by Gaphil swami appeariciated by audience.

शुक्रवार, 18 मार्च 2011

केन्द्रीय कृषि मंत्री हरीश रावत ने 16 महिला रत्नों को सम्मानित किया
















‘‘विश्व मित्र परिवार’’ संस्था की अंगीभूत इकाई ‘‘विश्व महिला परिवार’’ द्वारा विश्व महिला दिवस के अवसर पर ;आजाद भवन, आईसीसीआर, आईटीओ, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत ने राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 16 महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया। गुजरात की श्रीमती संस्कृति रानी देसाई को अत्याध्ुनिक बहुमुखी विचार प्रवाहिका के रूप में तथा मुंबई (महाराष्ट्र) की डॉ. अलका ईरानी को अत्याधुनिक सूचना तकनीक के आलोक में ‘‘विलक्षण महिला रत्न’’ से एवं उत्तर प्रदेश से डॉ. पल्लवी मिश्रा को उच्च शिक्षा व समाज सेवा, झुंझनू (राजस्थान) की श्रीमती रूक्मणी भेड़ा को समाज सेवा के आलोक में ‘‘समाजरत्न’’ सम्मान से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ की डॉ. विभा दूबे को समाज सेवा, मुंबई (महाराष्ट्र) की श्रीमती तारा सिंह को साहित्य सेवा, उड़ीसा की श्रीमती जयंती साहू को समाजसेवा, दिल्ली की साध्वी श्रीकृष्णप्रिया डॉ. अंजू को भारतीय विद्या पर शोध, श्रीमती रमेश कुमारी भारद्वाज तथा श्रीमती रामवती, बिहार की श्रीमती सीमा कुमारी का शिक्षा एवं समाजसेवा, दिल्ली की पहली महिला ऑटो ड्राईवर सुश्री सुनीता चौध्री को चुनौतीपूर्ण कार्यक्षेत्र चुनने, राजस्थान की श्रीमती विद्या पुरोहित को महिला एवं बाल कल्याण, आसाम की श्रीमती अफसाना बेगम को समाजसेवा पाथ र्फाइंडर वेलफेयर सोसाइटी दिल्ली से जुड़ी श्रीमती नीलम व सुनीता को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु ‘‘महिला रत्न’’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह गौरव की बात है कि विश्व महिला दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्रवाद एवं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उत्कृष्ट योगदान हेतु अग्रणी भूमिका निभाने वाली 16 महिलाओं को भारतीय संस्कृति के संरक्षण में कार्यरत संस्था विश्व मित्र परिवार की अंगीभूत इकाई विश्व महिला परिवार के माध्यम से सम्मानित करके मुझे कापफी प्रसन्नता हो रही है देश भर से आए 148 नामांकन में से 16 महिलाओं के निष्पक्ष चुनाव हेतु संस्था की निर्णायक मंडली धन्यवाद की पात्र है। विश्व मित्र परिवार संस्था निरंतर रूप से प्रतिभाओं को खोजने, मूल्यांकन करने एवं सम्मानित करके राष्ट्र के सशक्तिकरण हेतु प्रमुख आधर स्तभं बनाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। वास्तव में नारी को सशक्त एवं सम्मानित करके ही राष्ट्र को सशक्त किया जा सकता है। उक्त अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष एवं तरंग मीडिया प्रा. लि. के निदेशक ‘भू त्यागी भारतीय’ने कहा कि केवल भारतीय महिलाएं ही समस्त विश्व की रक्षक ‘‘वसुध्ैव कुटुम्बकम’’ वाली भारतीय संस्कृति को पुनः विश्वव्यापी बनाकर विध्वंसक बारूद के ढेर पर बैठी विश्व की मानव सभ्यता को बचा सकती है। संस्था की अध्यक्ष भावना त्यागी ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय वैज्ञानिक संस्कृति, सभ्यता, भारतीय विद्याएं, जैविक एवं गौधन द्वारा कृषि, पर्यावरण, वृक्षारोपण, अहिंसा एवं जीव दया, अहिंसा, शाकाहार, सामाजिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद एवं भारत की सभी चिकित्सा पद्धति, राजनैतिक, प्रशासनिक, कला, साहित्य, अहिंसा, शाकाहार, साहित्य, लोक कला, दूरदर्शन ;टी.वी. चैनल), पत्रकारिता, प्रकाशन, शिक्षा, प्रशिक्षण, संचार, सूचना, राष्ट्र भाषा संवर्धन, उद्यमिता, व्यवसाय, एवं सांस्कृतिक जगत के मूर्धन्य महिला हस्ताक्षरों की उपस्थिति ने हमें उत्साहित किया है। उपरोक्त सभी विषयों पर प्राचीन से अर्वाचीन तक महिलाओं द्वारा किये गये रचनात्मक कार्य, संघर्ष, सपफलता, साहसिक कार्यों से सम्बंधित एवं देशभक्त महिला बलिदानियों के चरित्र, कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर एक स्मृति-अंक का प्रकाशन किया जायेगा। इस अंक को अधिकाधिक संख्या में जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता है, क्यांेकि आज भारतीय स्वाभिमान, सभ्यता, संस्कृति, मानसिकता, राष्ट्र भाषा, एवं समस्त क्षेत्रीय भाषाओं का पाश्चात्य सभ्यता, संस्कृति द्वारा अपमान हो रहा है। यह समस्त विश्व के लिए घातक है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं अकावि के कुलाधिपति डॉ. मदन मोहन बजाज ने कहा कि परित्यक्त महिलाओं एवं किन्नरो को समाज में सम्मान मिलना अनिवार्य है। उक्त अवसर पर हुए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर केन्द्रित प्रतिभा विकास गुरूकुल द्वारा प्रस्तुत नृत्य एवं गायन के माध्यम से सरस्वती व गणेश वंदना, शिक्षा भारती पब्लिक स्कूल द्वारा प्रस्तुत लद्दाख नृत्य को दर्शकों ने कापफी सराहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदनमोहन बजाज तथा मंच संचालन कमल शर्मा ने किया। संस्था के निर्णायक मंडल में गोपाल प्रसाद (आरटीआई एक्टिविस्ट), नरेश शर्मा (कॉरपोरेट व फायनांसियल एडवाइजर), अभय सिंह, श्रीमती ऋतु सिंह, उद्योगपति एवं निर्यातक वी. सी. जैन, बाबा रामकृष्णदेव तोमर, उद्योगपति एवं समाजसेवी लक्ष्मी नारायण मोदी, समाजसेवी दीपक भारद्वाज, हृदेश पचौरी, राष्ट्रीय खिलाड़ी भावना पचौरी, सुश्री ज्योति, विपिन, एवं आशीष गुप्ता आदि की उल्लेखनीय भूमिका रही। इस कार्यक्रम में एक नन्ही बालिका द्वारा प्रस्तुत काव्य धरा में श्रोतागण भावविह्नल हो गएः-मैं ही माँ मैं ही बेटी फिर भी ना जाने क्यूँ इस संसार में आने से रोकी जाती हूँ।मैं ही बहन मैं ही पत्नीमैं ही जगत जननी कहलाती हूँफिर भी ना जाने क्यूँ इस संसार मेंआने से रोकी जाती हूँ।मैं ही लोरी मैं ही गीत सुनाती हूँमैं ही उंगली पकड़ चलना सिखाती हूँफिर भी न जाने क्यूँ इस संसार में आने से रोकी जाती हूँ।मैं ही इंदिरा, मैं ही कल्पना, मैं ही प्रतिभा पाटिल कहलाती हूँ।मैं ही घर, राज्य और देश चलाती हूँ।

गुरुवार, 10 मार्च 2011

MORE THAN 30 CRORE RUPEES SCANDAL BY NAME OF BIODIVERSITY PARKS PROJECT IN DU

MORE THAN 30 CRORE RUPEES SCANDAL BY NAME OF BIODIVERSITY PARKS PROJECT
IN CEMDE, DELHI UNIVERSITY BY RETIRED PROF. C. R. BABU
Prof. C. R. Babu worked as a Professor in the Dept of Botany, University of Delhi and retired at the superannuated age of 65 years on 30/06/2005. During his service period he had been designated as the Director of a small centre named CEMDE (Centre for Environmental Management of Degraded Ecosystems) in 1990, Pro Vice Chancellor (PVC) in 2000 and Acting Vice Chancellor (VC) of the University of Delhi in 2005. He continued his service in the university as the Director-CEMDE from 24/01/1990 to 29/06/2005, PVC from 08/08/2000 to 29/06/2005 and Acting VC from 16/05/2005 to 29/06/2005.
Prof. C. R. Babu before retirement as serving professor and PVC, a verbal proposal for conferment of the dignitary title Professor Emeritus to himself was made approved in the Academic Council (AC) meeting on 23/04/2005 and decision taken in the Executive Council (EC)meeting on 29/04/2005 where he himself was a party to recommending by the AC and EC without any written proposal and formal document of recommendation of the then VC on record, and the conferred the title on 01/07/2005 very next day after his retirement. This is a fact of primae facie and clear violation of the Ordinance XII-B under the Delhi University Act, 1922.
Just 18 days before retirement Prof C. R Babu on a Saturday (holiday in the university) on 11 June, 2005 off record directed to issue a purported letter vide Ref. No.R/2005/1915 in his favor by Shri Kanwar Manjit Singh, the Finance Officer (on deputation from C&AG) as the Registrar & Finance Officer despite presence of the full time Registrar, Dr. A. K. Dubey, IAS in the university on a specially printed letter head addressed to the Vice Chairman, Delhi Development Authority (DDA) and mentioned “The projects for establishment and management of (a) Yamuna Biodiversity park and (b) Aravalli Biodiversity Park have been entrusted by the DDA to Prof C.R. Babu, PVC, ……… The University of Delhi has empowered Prof. C.R Babu to personally operate, pursue and settle all transactions of financial and administrative in nature of the projects” without any office notings, valid documents or university approval/ order/ EC resolution on record for approval of multi crore rupees biodiversity park project for financial grants and Prof Babu’s lifetime involvement in the project with all financial & administrative powers. Based on the letter DDA sanctioned the projects as the funding agency and release funds from time to time to the university by the name of the Registrar but crores of rupees funds is being utilized by retired Prof. Babu.
Immediate next day of retirement, Prof. Babu again started functioning in the CEMDE violating Delhi University Act 1922 by claimed himself as the Project Incharge till date without any office approval/ authorization/ order/ notification or entrusting letter neither from the University of Delhi nor from the DDA. Under this project two biodiversity parks namely Aravalli Biodiversity Park at Vasant Kunj and Yamuna Biodiversity Park at Wazirabad, Delhi are being developed. Till 2010 DDA released grants of Rs.3257 Lakhs.. Another four new mega parks projects are further approved by DDA for development in the hand of Prof. C. B. Babu.
Sl No
INTERVIEW QUESTIONNAIRES
RESPONSE
1.
For the period from 16 May, 2005 to 29th June, 2005 who was the Pro Vice Chancellor (PVC), Acting Vice Chancellor (VC) and Director- CEMDE of the University of Delhi?
Prof. C. R. Babu
2.
When the Biodiversity Park Projects started by the University of Delhi?
Yamuna Biodiversity Park in 2003
Aravalli Biodiversity Park in 2004
3.
What are the university or DDA guidelines are applicable to run the development projects? Whether any MoU has been signed between DDA & DU?
No guidelines available/ exists
No MoU has been signed between DDA and Delhi University
4.
Who had prepared & submitted the biodiversity parks project proposal to DDA for approval of the project. Copy of the DDA approval letter?
No information and copy of project approval letter available except copy of a letter No.R/2005/1915 dated 11 June, 2005
5.
Name of the funding agency and project authority? How much amount of grants released by DDA to university till 2010?
Delhi Development Authority.
More than 3257 lakhs rupees
6.
For the period from 16th May, 2005 to 29th June, 2005 who was the Registrar of the university
Dr. A. K. Dubey, IAS was the Registrar
7.
Name of the authority under whose direction and office order/ EC resolution the letter dated 11 June, 2005 was issued to VC, DDA
No information or document available except a short note on a plain paper by PVC, Prof. Babu authorized Sh Manjit Singh to work as Registrar for 10 to 12 June, 2005
8.
What was the urgency to issue the particular letter without any office order/ EC resolution/ Notification on 11th June, 2005 by Sh Manjit Singh,FO as the Registrar & FO despite presence of Dr AK Dubey, IAS Registrar
No information or documents available except the short note on a plain paper by PVC Prof Babu
9.
Was 11 June, 2005 a working day of the university to issue that letter?
No, it was Saturday, a regular holiday of the university.
10.
As per contents of that particular letter copy of the special provision made by the university for smooth execution of financial as well admn issues of these projects?
No such documents of special provision available in the university record.
11.
Name of the university authority empowered Prof. C. R Babu to operate, pursue and settle all transactions of financial & admn nature of the projects? Copy of the university authorization/ empowering letter.
No information or copy of such copy of any university documents available on record
12.
As per contents of the letter name of the authority entrusted or appointed/ authorized retd Prof Babu as the Project In-charge of the said projects and copy of the appointment/ entrusting/ authorization letter issued to Prof. Babu to work in the university/ projects after his retirement?
As per information by Delhi University the Projects were entrusted to Prof. Babu but no document/ copy of entrusting letter available and as per information by DDA Prof. Babu was appointed by Delhi University but no document/ copy of appointment letter on record available except copy of the letter dated 11 June, 2005
13.
When approval by AC & decision by EC for conferment of the title Professor Emeritus to Prof. Babu done. Copy of the written proposal with recommendation of the VC
Before retirement of Prof. Babu approval by AC on 23/4/2005 & decision by EC on 29/4/2005 for conferment of title Professor Emeritus to Prof Babu done. No copy of written proposal with recommendation of VC available on record
14.
Was the PVC, Prof Babu a party of the AC and EC meeting to recommending for approval & decision for conferment of the title of Professor Emeritus to Prof Babu? Was it violation of the Delhi University Ordinance or Act, 1922?
PVC, Prof CR Babu was a party in both AC and EC meeting recommending for approval & decision for conferment of the title to Professor Babu. Yes, It was a fact of primae facie and violation of the Ordinance XII-B of the Delhi University Act, 1922.
15.
What was the urgency for approval of the title Professor Emeritus to Prof CR Babu before his retirement?
No information is available rather to advance claim of the unauthorized dignitary title to mention in that letter addressed to VC, DDA
16.
As per Delhi University Ordinance XII-B can a professor be eligible for forwarding & processing for approval of proposal for conferment of title Professor Emeritus before retirement?
No, violation of the Ordinance XII-B
17.
As per Ordinance XII-B can a Professor Emeritus may pursue academic work within the framework of other dept to which he was not attached after retirement and is provided facilities like personal office or independent library & will carry with financial commitment for the university?
No, violation of the Ordinance XII-B
18.
Name of the present Director-CEMDE of Delhi University after retirement of Prof. Babu? What is the role of present Director-CEMDE in the said projects?
Prof. Inderjit. After retirement of Prof Babu from the position of Director Prof. Inderjit has no role in the project except Prof Babu till date
19.
How many post of Scientists and Scientist-in Charges exist in the said projects and appointed?
No post of Scientist and Scientist-in Charge exists in the project nor appointed any Scientist or Scientist-in Charge.

सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

भ्रष्टाचार ,मंहगाई और व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह का आगाज

हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार और मंहगाई है परन्तु इसके समाधान हेतु व्यवस्था परिवर्तन के जंग का आगाज़ करना होगा . दुःख की बात यह है कि इस क्रांति के लिए जनचेतना का अभाव है. सोनिया गाँधी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए बड़े- बड़े वायदे किए, परन्तु वे वायदे इतने खोखले हैं कि न केवल केन्द्रीय नेता भ्रष्ट हैं बल्कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी जमकर पैसा बनाने में लगे हैं. पिछले कुछ दिनों में केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा किए गए करोड़ों रूपए घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है. देश कि जनता मंहगाई और गरीबी से कराह रही है , लेकिन नेता करोड़ों हड़पकर मजे लूट रहे हैं .पूर्वोत्तर में 58 हजार करोड़ का घोटाला ,76 हजार करोड़ का टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला, 70 हजार करोड़ का कॉमनवेल्थ गेम घोटाला ,आदर्श सोसाईटी घोटाला , जल विद्युत घोटाला , अनाज घोटाला ,भ्रष्ट सीवीसी अधिकारी नियुक्ति और विदेशों में जमा अरबों रूपए का कालाधन आदि के खिलाफ आम आदमी काफी चिंतित है, जो अब आन्दोलन करना चाहता है. राजधानी सहित देश के करीब 62 शहरों में छात्रों -युवाओं -महिलाओं ने लाखों कि संख्या में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से भ्रष्टाचार के मामलों से निपटने के लिए जनलोकपाल बिल लागू करने तथा सभी राज्यों में जन लोकायुक्त बिल लागू करने की मांग की है. धीरे -धीरे यह आन्दोलन एक वृहद आकार लेने जा रहा है.
भ्रष्टाचार एक अभिशाप है. भ्रष्टाचार के कारण सरकार द्वारा आम आदमी के लिए बनाई गयी किसी भी योजना का प्रतिपादन नहीं हो सकता. यह दीमक कि तरह पूरे तंत्र को खोखला करता चला जा रहा है. यूपीए सरकार के घोटाले कि लम्बी सूची और बढ़ती मंहगाई से राजधानी ही नहीं सम्पूर्ण देश की जनता त्राहि- त्राहि कर रही है. राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटालों में पर्यटन एवं शहरी विकास मंत्रालय और दिल्ली सरकार को बचाने का प्रयास करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से सीधे हस्तक्षेप किया जा रहा है. केंद्रीय सतर्कता आयोग इन घोटालों कि जांच सीबीआई से करने की बात कर रहा है. अब मुख्य सतर्कता आयुक्त पी जे थॉमस भी इन भ्रष्टाचारियों की सूची में शामिल हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के शिकंजा कसने के बाद प्रशासन के घोटालों की पोल खुल गयी है. सीबीआई की ओर से पूर्व संचार मंत्री ए .राजा की गिरफ्तारी और उसके भ्रष्ट साथियों की चार्जशीट अदालत में पेश होने तथा कलमाड़ी के हश्र से केंद्र सरकार की भ्रष्ट नीतियों का खुलासा हो गया है .लोगों के मनः मस्तिष्क में गूँज रहा है -
" डगर- डगर और नगर- नगर जन -जन की यही पुकार है!

बचो- बचो रे मेरे भैया इस सरकार में केवल भ्रष्टाचार है! "
मंहगाई चरम सीमा पर है. लोगों का घरेलू बजट बिगड़ गया है . तेल कंपनिया सरकार की मिलीभगत से हर दूसरे दिन पेट्रोल- डीजल- गैस के दामों में बढोतरी कर रही है , जिससे जनता आक्रोशित है. तेल माफिया का गुंडाराज इतना बढ़ गया है की वे कलेक्टर तक की हत्या करने से नहीं चूक रहे हैं. ऐसी स्थिति में आम आदमी के जान -माल की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है. आरटीआई के माध्यम से आरटीआई कार्यकर्तागण भष्टाचार के विभिन्न मामलों को परत दर परत करके उजागर कर रहे हैं . भष्टाचारी लोग अब आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले ही नहीं बल्कि उनकी हत्या भी करवा रहे हैं. सरकार आरटीआई दाखिल करने वालों को सुरक्षा देने की बात कह रही है ,लेकिन उनकी हत्याओं का सिलसिला जारी है. जनता के पैसे खाकर मंत्री मोटे हो रहे हैं और आम आदमी इस मंहगाई में दुबला होता जा रहा है. मंहगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार के एक मंत्री कहते है कि "मेरे पास मंहगाई खत्म करने हेतु अलादीन का चिराग नहीं" तो दूसरे मंत्री कहते है की "मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूँ" , तो तीसरे मंत्री कहते हैं कि मैं इसके लिए जिम्मेवार नहीं". दूसरी तरफ यूपीए सरकार कहती है कि मेरा प्रधानमंत्री ईमानदार है और कहीं से दोषी नहीं .स्वाभाविक है शक की ऊँगली प्रधानमंत्री को नियंत्रित करने वाली शक्ति के उपर उठ रही है. आज आम आदमी सोचने के लिए विवश है कि कौन है दोषी ? आम धारणा बन चुकी है की जांच का आदेश हो जाता है फिर गिरफ़्तारी का नाटक होता है . गिरफ्तार होने के बाद , उन्हें फाइव स्टार होटल की सुविधा दी जाती है और तुरंत उन्हें जमानत मिल जाती है .जरा विचार कीजिए देश में अब तक बड़े- बड़े सैकड़ों घोटाले हुए हैं ,परन्तु आज तक किसी दोषी नेता को फांसी की सजा क्यों नहीं हुई है ?घोटाले का पैसा जनता को वापस क्यों नहीं मिलता?क्यों नहीं इसके लिए मजबूत एवं कठोर दंड और कड़े नियम बनाए जाते हैं ? भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई हेतु विशेष न्यायालय तथा त्वरित कारवाई क्यों नहीं होती है?
जहाँ एक ओर देश की 70 % जनता गरीबी रेखा के नीचे जैसे -तैसे अपनी जिन्दगी चला रही है , वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो देश को लूट कर सारा धन विदेश के बैंको में जमा कर देश को खोखला बना रहे हैं . कई देशों ने ऐसे काले धन जमा करने के लिए निजी बैंकिंग शुरू की ओर आज वे देश सिर्फ ऐसे ही लोगों के पैसे से फल फूल रहे हैं , ऐसे बैंक न तो जमाकर्ताओं के नाम बताते हैं और न ही उनकी जमा की गई राशि , लेकिन जब कुछ देशों का दबाब बढ़ा तो बैंकों ने नाम बताने की घोषणा की और उसने कुछ देशों को वहां के जमाकर्ताओं के नाम भी बताये हैं , लेकिन भारत की कमजोर नीतियों के कारण अब तक भारत को उन भष्ट लोगों के नाम नहीं मिल पाए है, जिनकी अकूत संपत्ति वहाँ जमा है. इससे यह भी पता चलता है की सरकार पर ऐसे लोगों का कितना दबाब है. ऐसे लोगों को बेपर्दा किया जाना चाहिए, जो देश को अंग्रेजों की तरह लूट रहे हैं . आश्चर्य की बात तो यह है की सरकार कालाधन को पूर्णरूपेण सरकारी कोष में जमा करने के बजाय उस पर टैक्स लगाने की बात कर रही है .
इस सरकार ने तो हमें अपने ही देश के भू-भाग कश्मीर में तिरंगा फहराने पर प्रतिबंध लगाया है . अब आप ही सोचिये आप स्वतंत्र है या परतंत्र? क्या करे पीड़ित जनता ? क्या है इस समस्या का समाधान ? आज यह प्रश्न हर भारतीय के दिल में उमड़ - घुमड़ रही है . क्या आपने अपने इसी हश्र को पाने के लिए यूपीए सरकार को वोट दिया था ? संकल्प लें कि स्वच्छ , पारदर्शी और भयमुक्त प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध वैसी पार्टी को चुनेंगे, जो सुशासन और विकास के मूलमंत्र पर चल सके और अपने वायदों पर खड़ा उतर सके .
"आग बहुत है आम आदमी के दिल में शांत न समझना ,
ज्वालामुखी कि तरह फटी यह आज कल में."
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प्रसिद्ध युवा क्रांतिकारी कवि आशीष कंधवे ने उपरोक्त तथ्यों के समर्थन में भ्रष्टाचार और मंहगाई पर "समय की समाधि" नामक अपनी प्रथम पुस्तक में कविता के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त की है-
"हिलोर दो /झकझोर दो /मरोड़ दो
सत्ता के जयचंदों को/ हर मोड़ से खदेर दो "
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पाँच फुट का आदमी ,
होकर गरीबी से विवश
भूख ,मजबूरी और समय की मार से
तीन फुट में गया सिमट
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करुण ह्रदय से
मैं कर रहा पुकार
लिए ह्रदय में वेदना अपार
आखिर कब तक
मानव
भूख से लाचार
शोषण और भ्रष्टाचार से लड़ता रहेगा
कब तक
मानव
मानव पर अत्याचार करता रहेगा ?
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ना हुआ कोई सपना साकार
कल भी था मुश्किल में
हूँ आज भी लाचार
क्या करूँ विचार?
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कितना कमाऊँ मैं
कहाँ से लाऊं मैं
तन को तपाऊं या मन को जलाऊँ मैं
मंहगी हुई बिजली
बड़ी हुई है फीस
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ये आजादी नहीं अनुबंध है
सत्ता के हस्तांतरण का प्रबंध है
अगर होती है आजादी ऐसी
अगर मिलते हैं अधिकार ऐसे
तो अच्छे थे हम परतंत्र
फिर हम क्यों हुए स्वतंत्र ?
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दमन के चक्र से
दासता की पराकाष्ठा से
घोर अन्याय की राह से
पराधीनता के भाव से
राष्ट्र को अब छुड़ाना था

उठाया वीरों ने आज़ादी का कमान था
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निरंकुश शासन

कोरे आश्वासन
चढ़कर प्राचीर
देते भाषण
वोट का तिलस्म
सत्ता पाने का
गणतंत्र बना 'एटीएम'
जन का जनतंत्र से भरोसा गया है टूट
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हर तरफ क्यूँ फैली है
भूख ,भ्रष्टाचार और लूट
हे भारत के वीरों
कब जागोगे तुम
लोकतंत्र की है संध्या बेला
तम घनघोर घिरने से पहले
जागो तुम
जागो फिर एक बार
जागो फिर एक बार !
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बेनकाब चेहरा ही
सत्ता समर्थ है
मन शंकित
सशंकित है जन
शंका ही समाधान है
जिसके हाथ में होगी सत्ता
उसका अपना विधान है
क्या यही बचा लोकतंत्र का
आख़िरी निशान है ?
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राम कृष्ण की धरती पर
जब सहना पड़े गो हत्या का दंश
ख़त्म हो रहा हो जहाँ किसानों का वंश
आकंठ भ्रष्टाचार में जहाँ डूबा हो
सरकार का हर अंश
सत्ता की हर कुर्सी पे
जब कब्ज़ा कर बैठा हो कंस
देश को बना दिया इन नेताओं ने दुकान
सब कुछ बेचने को बैठे हैं तैयार
ज्यादातर पर लग रहा कोई न कोई आपराधिक केस
इन कंस रूपी नेताओं के हाथ में
कब तक सुरक्षित रहेगी
भारत की आजादी शेष ?
भारत की आजादी शेष ?
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उठों वीरों ! भूमिपुत्रों ! तुम्हें फिर से क्रांति लानी है
सो गया हो पौरुष जिस देश का
उसमें राष्ट्रभक्ति का अलख जगाना है
तोड़ दुश्मन के हौसले को
पांव टेल दबाना है
बहुत हो गया बहुत खो दिया
अब आतंकवाद को मिटाना है
अब और नहीं हम खोएंगे
बीज क्रांति का हम बोएंगे
कट शीश दुश्मन के रक्त से
भारत मान का रक्त धोएंगे
फिर क्रांति का बीज बोएंगे
फिर क्रांति का बीज बोएंगे .
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ना रामराज
ना कृष्णराज
यह गणराज का काल है
भारत की जनता का देखो
हुआ बुरा क्या हाल है !
एक-एक कर बर्ष बीत गए
गणतंत्र के साठ साल
पीने को पानी न मिला
रोटी कपड़ा का हुआ बुरा हाल
ये लोकतंत्र ये प्रजातंत्र से
करते हम सवाल हैं
भारत की जनता का देखो
हुआ बुरा क्या हाल है !
समाजवाद के नाम पे
पूंजीवाद का है बोलबाला
खोल दी है सरकार ने
अमीरों के लिए हर ताला
ये जनतंत्र ये गणतंत्र से
करते हम सवाल हैं
भारत की जनता का देखो
हुआ बुरा क्या हाल है !
जो सभ्यता जो संस्कृति
जो भारत की पहचान थी
चाणक्य अशोक की नीतियां
जहाँ सत्ता की कमान थी
सबको मिले थे हक़ बराबर
सबको अधिकार सामान था
भारत के राजतन्त्र की
अपनी एक पहचान थी
ये राजतन्त्र ये परतंत्र से भी
हुआ बुरा क्या हाल है
इस लोकतंत्र इस प्रजातंत्र से
जनता का सीधा सवाल है
भ्रष्टाचार ,आतंकवाद और मंहगाई
गणतंत्र के उपहार हैं
सालोंभर है इनकी तेजी
जनता में हाहाकार है
ये लूट तंत्र ये भूखतंत्र से
करते हम सवाल हैं
भारत की जनता का देखो
हुआ बुरा क्या हाल है !
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लालकिले के प्राचीर से हर साल
घोषित होता है आजादी का जश्न
सत्ता और शासन
देते हमें आश्वासन
गरीबों को मिलेगा सस्ता राशन
बुनियादी शिक्षा और गरीबों को भोजन
होगा भ्रष्टाचार का निष्कासन
समाज में अनुशासन
किसानों की कर्ज माफी का ऐलान
और सबको मिलेगा बिजली पानी और मकान
पर भारत की जनता कब समझेगी
झूठे वादे और कोरे आश्वासन
कब तक विजय बनाकर भेजती रहेगी
लोकसभा में एक नहीं ,दो नहीं, अनेक दु:शासन ?
अब आश्वासन देनेवालों को नहीं
आश्वासन लेनेवालों को बदलना होगा
भारत की जनता को
अपना दृष्टिकोण बदलना होगा .
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उपरोक्त रचनाएँ समस्याओं के साथ -साथ समाधान की और दृष्टि प्रदान करता है .
कवि आशीष कंधवे की पीड़ा को आत्मसात करते हुए आपका मन भी दो
फिल्मी गानों को गाने के लिए अवश्य मजबूर करेगा--
" भ्रष्टाचार से कांपी इंसानियत
राज कर रहे हैवान "
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"जब राज करे शैतान
तो हे भगवान,
इंसाफ कौन करेगा ?
इन्साफ कौन करेगा ?
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-गोपाल प्रसाद (आरटीआई एक्टिविस्ट )
gopal.eshakti@gmail.com