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Showing posts from 2011

समर्थ एवं सशक्त जन लोकपाल के कार्यकलाप संबंधी कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव

सरकारी मशीनरी सरकारी धन के दुरुपयोग रोकने में सक्षम नहीं है , इसलिए जन लोकपाल के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग रोकने के उपाय किए जांय और इस हेतु एक मॉनीटरिंग प्रणाली विकसित करे . हर व्यक्ति जो सरकार से वेतन पाता है , की जिम्मेदारी तय हो . आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर उसके विरुद्ध समयसीमा के अंतर्गत कानूनी कारवाई की जाए और उस संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित की जाए. इस सम्बन्ध में बिहार सरकार के मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए.

जन लोकपाल द्वारा इंडियन सिविल सर्विस के सभी कैडरों (IAS /IPS /IRS /IFS आदि) पर विशेष निगरानी रखी जाए. इनसे सम्बंधित शिकायतों की अबिलम्ब जाँच की जाए तथा उस पर त्वरित करवाई हो , साथ ही जाँच होने तक उन अधिकारीयों को संवेदनशील पदों से मुक्त किया जाना चाहिए. ये जनता के सेवक हैं न की देश को लूटने के लिए नियुक्त किए गए हैं.

सभी राजनैतिक घराने /वंश, जिनके पास आजादी के बाद अकूत संपत्ति आई है और वास्तव में जो देश का पैसा है , उसे सरकारी खजाने में लाया जाए तथा उसका उपयोग देश के बुनियादी आवश्यकताओं/ समस्याओं, आधारभूत संरचनाओं एवं सुविधाओं के विकास पर खर्च हो…

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता

मजदूरों के हकों एवं हितों के लिए उन्हें सशक्त किए बिना भारत की आज़ादी का कोई मतलब नहीं है. आज देश में नीति एवं नियम के बजाय साफ नीयत की जरूरत है और इसके लिए हमें जागरूक और संगठित होना पड़ेगा. सरकारों की नीतियों में दूरदर्शिता एवं क्रियान्वयन का अभाव रहता है . आर्थिक उदारीकरण के इस दौर में सरकारों की भूमिकाएँ बदल चुकीं हैं . राज्य-व्यवस्था अपनी जिम्मेदारियों से कतराती नजर आ रही हैं. सरकारें निजी कंपनी की तरह हो गेई हैं और वह लाभ देनेवाली एक एजेंसी के तौर पर कम कर रही है. वह सामान्य जन के लिए कल्याणकारी न रहकर कई मायनों में विनाशकारी भूमिका निभा रही है . वर्तमान दौर में सभी दलों की अर्थनीति एक जैसी हो गयी है. प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों के सुझावों की और प्रधानमंत्री कार्यालय ने बहुत सरे मामलों की अनदेखी की है. विश्वसनीय आंकड़ों के अनुसार पिछले बीस बर्षों में नगरों की जनसँख्या में डेढ़ गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है . देश में बीस बर्ष पहले मात्र एक अरबपति था , आज लगभग पचास हैं. भारतीय संविधान और लोकतंत्र इन्हीं कारणों से कमजोर हुआ है.
दुनियां के पैमाने पर मजदूरों और कर्मचारियों की सामा…

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सूचना सही नहीं

भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय सूचना एवं प्रसारण की सूचना सही नहीं है क्योंकि सरकारी वेबसाईट nic .in ने इसका समय पर अपग्रेडेशन ही नहीं किया है .सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तो मात्र एक उदाहरण है , इस तरह के कई ऐसे मंत्रालय/विभाग हैं, जिनके वेबसाईट का समय पर अपग्रेडेशन नहीं हुआ है. इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बाबजूद अपग्रेडेशन की गति कछुआ चल की भांति एवं पुरानी तकनीक पर ही आधारित है. nic .in समय पर अपग्रेडेशन हेतु सक्षम नहीं है. विश्वसनीय सूत्र के अनुसार nic कई विभागों को स्वयं समाधान देने के बजाय अपने पैनल के आईटी कंपनियों की सेवा की संस्तुति कर रही है, जो एक लम्बी प्रक्रिया है. पुरानी एवं गलत सूचना या जानकारी होने से आम नागरिक के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई चिट्ठियों को विभाग द्वारा इसलिए वापस भेज दिया जाता है, क्योंकि वह पुराने अधिकारी / कर्मचारी के नाम प्रेषित होता है.कई अधिकारियों के नाम स्थानांतरण एवं सेवानिवृति के वाबजूद वेबसाईट में प्रदर्शित अधिकारियों की लिस्ट में शोभा बढ़ा रहे हैं. इससे सम्बंधित विभाग की अकर्मण्यता , गैर जिम्मेदारी तथ…

Gurinder Kaur Gill : Woman Fighter against Corrupt System

It is true that "Woman is a symbol of power". When a woman begins one step of revolt then it must be completed.I am talking about Ms. Guninder kaur Gill .Anyone who know about this lady must appreciate her talent , courage and
co-oprative nature. When I feel the sorrow, problem and frustation of this lady
created by present corrupt system and I have understood her case right
from starting I was forced to believe that a woman ,If desires can change a lot in the system.She can change the direction of wind.
I am a ordinary man but my thinking is broad. Being an RTI Activist
I wish to fight for rights and against corruption especially butIt is
not easy because in present scenerio corruption has been mixed up in
the nature and behavier of masses until everybody does promise not
to take or give bribe or not to be a part of corrupt system , it
will be cured.
Presently the maximum part of politics, bureaucracy, judiciary,
media, ,corporate and social sector are also cor…

नदियों को प्रदूषण मुक्त करने का प्रभावी प्रकल्प : पुष्पांजलि प्रवाह

धार्मिक आधार -- धराएत इति धर्मः अर्थात जो धारण किया जाए ,वही धर्म है. यह श्लोक हमारे शाश्वत सनातन धर्म के व्यापक दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है.सनातन धर्म किसी रूढ़िवादिता या कट्टरपंथी का नाम नहीं , बल्कि यह धर्म मानव सभ्यता के उत्थान और प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण का एक माध्यम है, हमारे सामान्य रीति- रिवाज सबके पीछे एक तर्क है- विज्ञानं का , विचारों की प्रखरता एवं विद्वानों के निरंतर चिंतन से मान्यताओं व आस्थाओं में भी परिवर्तन हुआ . पुष्पांजलि प्रवाह की व्यवस्था आदि पूजा अर्चना के दौरान अनादि काल से चली आ रही है .समाज के सभी लोग भगवान से किसी न किसी कारण जुड़ा रहता है . हम उनको भेंट स्वरुप माला , फूल, नारियल ,फल और अन्य सामग्री भेंट करते हैं . इन सामग्रियों में पंडित महाराज को जो जरूरत होती है , वह ले लेते हैं . जो गो माता को भेंट कर सकते हैं वह हम उन्हें खिला देते हैं , एवं बची हुई सामग्री को नदी में प्रवाह कर देते हैं .जिससे किसी को पैर न लगे एवं इन पूजा सामग्री को सम्मान मिले . इसके लिए सबसे अच्छी व्यवस्था थी की नदी में प्रवाह कर दो. भारत के नदियों से भी सनातन धर्म मन का रिश्ता रख…

स्वतंत्र भारत में भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन बिषय पर प्रतिनिधि सम्मलेन

जनता दल (यू) के एंटी करप्शन फ्रंट द्वारा "स्वतंत्र भारत में भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन " बिषय पर प्रतिनिधि सम्मलेन 6 मई को कृष्ण मेनन भवन (सुप्रीम कोर्ट के पीछे ) में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जनता दल (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा की कोई भी लडाई युवाओं के द्वारा ही लड़ी जाती है. लोकतंत्र में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, वो चाहे गांधीजी के आजादी की लडाई हो या जे.पी का भ्रष्टाचार विरोधी सम्पूर्ण क्रांति जिसके हम सब हिस्सेदार थे. तब मैं किशोर था और हमलोगों ने उसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था . इस आन्दोलन ने कई नेताओं को जन्म दिया .हमलोगों ने ईमानदारी से काम करने की कोशिश की . हमारी उपलब्धि रही की जे.पी के आन्दोलन से निकले हुए लोग गरीबों की आवाज बने ,लेकिन आज की परिस्थिति भिन्न है. मैं अन्ना के इस आन्दोलन को जनजागरण के दृष्टि से देखता हूँ. युवाओं में साहस का संचार जिस प्रकार मुझे दिखा, उससे मैं महसूस कर रहा हूँ की अब भारत का आम आदमी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नए क्रांति के प्रति आशान्वित है और उसके मद्देनजर हमने भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा का गठन किया है . मैं…

निजी क्षेत्र में आरटीआई का प्रावधान क्यों नहीं ?--गोपाल प्रसाद

(नई दिल्ली,14 अप्रैल 2011 ) बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के जयन्ती के अवसर पर " आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ इण्डिया " द्वारा लक्ष्मी नगर में आयोजित "यदि आज आंबेडकर जीवित होते " बिषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद (आरटीआई एक्टिविस्ट)ने कहा कि यदि आज आंबेडकर जीवित होते तो वे निश्चित रूप से दलितों को सूचना का अधिकार प्रयोग करने ,आरटीआई एक्ट को सशक्त करने तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून में कठोर प्रावधान अवश्य करते. वास्तव में सूचना का अधिकार (RTI) का अधिकाधिक प्रयोग करके ही भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को उजागर किया जा सकता है. भ्रष्टाचारियों को नकेल डालकर ही कानून का भय बनाया जा सकता है. जब तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनहित हेतु आरटीआई एक्ट को और अधिक शक्ति नहीं दिया जायेगा तब तक कानून तोड़नेवालों के दिल में कानून के प्रति सम्मान कैसे हो सकता है? वास्तव में कानून का सम्मान ही भारतीय संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर का सम्मान है और यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजली होगी. कालाधन वापस लाने एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन का सबसे अधिक फायदा दलितों…

कैसे करें भ्रष्टाचार का सामना ? --गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट

भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना हजारे के आमरण अनशन रुपी शंखनाद के बाद दिल्ली के प्रीत विहार इलाके में एक विचार गोष्ठी में "भ्रष्टाचार का सामना कैसे करें" विषय पर चर्चा हुई. "आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया " के महासचिव गोपाल प्रसाद ने कहा कि यूपीए सरकार अब तक की सबसे भ्रष्टतम सरकार है. वास्तव में सोनिया गाँधी ने संसद, प्रधानमंत्री को हाईजैक कर लिया है . राष्ट्रीय सलाहकार समिति (NAC ) बनाकर अपनी महत्ता साबित करने तथा मंत्रीमंडल को पंगु करने के सिवा इसका कोई दूसरा काम नहीं है.जनता अब पहले के बनिस्पत जागरूक हो चुकी है. भ्रष्टाचार और कमरतोड़ मंहगाई ने जनता का जीना मुहाल कर रखा है. देश की जनता की पीड़ा अब असहनीय हो चुकी है और उसे अब हर हाल में बदलाव चाहिए . प्रख्यात योग गुरु स्वामी रामदेव के कालाधन को वापस लाने एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण के बाद जनता पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा है. बाद में भाजपा द्वारा संसद के बाहर एवं संसद के भीतर आन्दोलन चलाने के बाद इस मुहिम ने और रंग पकड़ा. निराश जनता के मन में आशा की किरण प्रस्फुटित हो गई. तीसरे चरण में अन्ना हजारे के आमरण अ…

मेघनाद साहा का पत्र गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट के नाम

नई दिल्ली 14 .02 .2011 . समीपेषु : श्री गोपाल प्रसाद बाबुसाहब, तुम याद तो आते ही हो मगर आज मुझे विवश करते हुए बहुत याद आ रहे हो . इसलिए वार्तालाप से अपारग होकर मैंने लेखनी उठाई है .दरअसल बीते दिन रविवार को टी.वी. पर एक कार्यक्रम देखा और गहन मनोयोग के साथ सुना .हाँ ,दूरदर्शन राष्ट्रीय प्रसारण के कार्यक्रम "जानने का हक " दोपहर के तीन बजे से देख रहे थे . अधीर आग्रह के साथ साँस रोककर हमलोग इंतिजार कर रहे थे. अंततः जो सूचना मिली थी ,उसकी सच्चाई भरी इंटरव्यू के जरिए पाए. जो खबरें अंगरेजी और हिंदी समाचारपत्रों में आई थी वह सब पढ़कर हमलोग अत्यंत दुखी हुए थे -"अशोक विहार के सत्यवती कॉलेज के हाते में जघन्य रूप से हरे - भरे जीवंत पेड़ों को काटा गया." एक शैक्षिक प्रतिष्ठान के अधिकारी ऐसा कैसे कर सकते हैं-सोचना हमारे लिए संभव नहीं हो पा रहा था . मगर जान लो ,सुन लो -हम खुश थे ,क्योंकि तुम परमेश्वर की असीम अनुकम्पा से कुछ आक्रमणकारियों के हाथों से बच पाए. हम देशवासी वाकई खुश हुए थे , इसके लिए और उस साहसी महिमामयी नारी के लिए भी जो उस दिन उसी समय उन दुष्कर्मियों के हाथों हत्या होते…

आरटीआई के सशक्तिकरण से ही लोकतंत्र सशक्त होगा : गोपाल प्रसाद

आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सेमिनार हॉल में लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका " विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन बार के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष प्रवीण एच पारीख ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री पारीख ने कहा की लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई एक्ट एक बेहतर टूल साबित हो सकता है . अमीरों के लिए आरटीआई का कोइ खास महत्त्व बेशक न हो परन्तु गरीबों के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कार्टूनिस्ट आर .के.लक्षमण का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग कुछ खास करने के लिए संकल्पवद्ध होते हैं .वैसे लोग शरीर और मन दोनों से कठोर परिश्रम करने वाले होते हैं, जिनमें से एक गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. आज आरटीआई आन्दोलन को ऐसे ही संकल्प शक्ति वाले उर्जावान लोगों की आवश्यकता है. इंडिया ऑन फ़ोन के सीईओ इ.के.झा ने संस्था के साथ मिलकर आरटी आई ऑन फोन के माडल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला एवं टेलीफोन के माध्यम से आरटीआई आन्दोलन को गति देने का संकल्प लिया .उन्हो…

लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका

आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सेमिनार हॉल में लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका " विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन बार के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष प्रवीण एच पारीख ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री पारीख ने कहा की लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई एक्ट एक बेहतर टूल साबित हो सकता है . अमीरों के लिए आरटीआई का कोइ खास महत्त्व बेशक न हो परन्तु गरीबों के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कार्टूनिस्ट आर .के.लक्षमण का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग कुछ खास करने के लिए संकल्पवद्ध होते हैं .वैसे लोग शरीर और मन दोनों से कठोर परिश्रम करने वाले होते हैं, जिनमें से एक गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. आज आरटीआई आन्दोलन को ऐसे ही संकल्प शक्ति वाले उर्जावान लोगों की आवश्यकता है. इंडिया ऑन फ़ोन के सीईओ इ.के.झा ने संस्था के साथ मिलकर आरटी आई ऑन फोन के माडल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला एवं टेलीफोन के माध्यम से आरटीआई आन्दोलन को गति देने का संकल्प लिया .उन्हो…

Right to information as a tool for good governance and against corruption-P.H.Parekh

"RTI ACTIVISTS ASSOCIATION OF INDIA” organized a lecture on " ROLE OF RTI FOR EMPOWERMENT OF INDIAN DEMOCRACY" at Seminar Hall, Ramjas College Delhi University . Hon'ble Mr.Pravin.H Parekh Senior Advocate, Supreme Court of India and President Confederation of Indian Bar has preside over the lecture.Mr Pareekh Said that Right to information as a tool for good governance and against corruption: Corruption thrives on secrecy. Individuals and institutions become corrupt only when there is no public scrutiny of their actions. The more they operate in the public gaze the less corrupt and more efficient they are likely to be. In this respect, the right to information can be utilised as a tool to fight the widespread corruption in India. In 2006, India received a score of just 3.3 (out of a maximum of ten) in Transparency International’s Corruption Perceptions Index, ranking it 70th out of 163 countries. This reflects the serious corruption problem in India - a problem that…

केन्द्रीय कृषि मंत्री हरीश रावत ने 16 महिला रत्नों को सम्मानित किया

‘‘विश्व मित्र परिवार’’ संस्था की अंगीभूत इकाई ‘‘विश्व महिला परिवार’’ द्वारा विश्व महिला दिवस के अवसर पर ;आजाद भवन, आईसीसीआर, आईटीओ, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत ने राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 16 महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया। गुजरात की श्रीमती संस्कृति रानी देसाई को अत्याध्ुनिक बहुमुखी विचार प्रवाहिका के रूप में तथा मुंबई (महाराष्ट्र) की डॉ. अलका ईरानी को अत्याधुनिक सूचना तकनीक के आलोक में ‘‘विलक्षण महिला रत्न’’ से एवं उत्तर प्रदेश से डॉ. पल्लवी मिश्रा को उच्च शिक्षा व समाज सेवा, झुंझनू (राजस्थान) की श्रीमती रूक्मणी भेड़ा को समाज सेवा के आलोक में ‘‘समाजरत्न’’ सम्मान से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ की डॉ. विभा दूबे को समाज सेवा, मुंबई (महाराष्ट्र) की श्रीमती तारा सिंह को साहित्य सेवा, उड़ीसा की श्रीमती जयंती साहू को समाजसेवा, दिल्ली की साध्वी श्रीकृष्णप्रिया डॉ. अंजू को भारतीय विद्या पर शोध, श्रीमती रमेश कुमारी भारद्वाज तथा श्रीमती रामवती, बिहार की श्रीमती सीमा कुमारी का शिक्षा एवं समाजसेवा, दिल्ली …

MORE THAN 30 CRORE RUPEES SCANDAL BY NAME OF BIODIVERSITY PARKS PROJECT IN DU

MORE THAN 30 CRORE RUPEES SCANDAL BY NAME OF BIODIVERSITY PARKS PROJECT
IN CEMDE, DELHI UNIVERSITY BY RETIRED PROF. C. R. BABU
Prof. C. R. Babu worked as a Professor in the Dept of Botany, University of Delhi and retired at the superannuated age of 65 years on 30/06/2005. During his service period he had been designated as the Director of a small centre named CEMDE (Centre for Environmental Management of Degraded Ecosystems) in 1990, Pro Vice Chancellor (PVC) in 2000 and Acting Vice Chancellor (VC) of the University of Delhi in 2005. He continued his service in the university as the Director-CEMDE from 24/01/1990 to 29/06/2005, PVC from 08/08/2000 to 29/06/2005 and Acting VC from 16/05/2005 to 29/06/2005.
Prof. C. R. Babu before retirement as serving professor and PVC, a verbal proposal for conferment of the dignitary title Professor Emeritus to himself was made approved in the Academic Council (AC) meeting on 23/04/2005 and decision taken in the Executive Council (EC)meeting on 29/04…

भ्रष्टाचार ,मंहगाई और व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह का आगाज

हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार और मंहगाई है परन्तु इसके समाधान हेतु व्यवस्था परिवर्तन के जंग का आगाज़ करना होगा . दुःख की बात यह है कि इस क्रांति के लिए जनचेतना का अभाव है. सोनिया गाँधी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए बड़े- बड़े वायदे किए, परन्तु वे वायदे इतने खोखले हैं कि न केवल केन्द्रीय नेता भ्रष्ट हैं बल्कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी जमकर पैसा बनाने में लगे हैं. पिछले कुछ दिनों में केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा किए गए करोड़ों रूपए घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है. देश कि जनता मंहगाई और गरीबी से कराह रही है , लेकिन नेता करोड़ों हड़पकर मजे लूट रहे हैं .पूर्वोत्तर में 58 हजार करोड़ का घोटाला ,76 हजार करोड़ का टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला, 70 हजार करोड़ का कॉमनवेल्थ गेम घोटाला ,आदर्श सोसाईटी घोटाला , जल विद्युत घोटाला , अनाज घोटाला ,भ्रष्ट सीवीसी अधिकारी नियुक्ति और विदेशों में जमा अरबों रूपए का कालाधन आदि के खिलाफ आम आदमी काफी चिंतित है, जो अब आन्दोलन करना चाहता है. राजधानी सहित देश के करीब 62 शहरों में छात्रों -युवाओं -महिलाओं ने लाखों कि संख्या में प्…