गुरुवार, 31 मार्च 2011

आरटीआई के सशक्तिकरण से ही लोकतंत्र सशक्त होगा : गोपाल प्रसाद




आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सेमिनार हॉल में लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका " विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन बार के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष प्रवीण एच पारीख ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री पारीख ने कहा की लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई एक्ट एक बेहतर टूल साबित हो सकता है . अमीरों के लिए आरटीआई का कोइ खास महत्त्व बेशक न हो परन्तु गरीबों के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कार्टूनिस्ट आर .के.लक्षमण का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग कुछ खास करने के लिए संकल्पवद्ध होते हैं .वैसे लोग शरीर और मन दोनों से कठोर परिश्रम करने वाले होते हैं, जिनमें से एक गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. आज आरटीआई आन्दोलन को ऐसे ही संकल्प शक्ति वाले उर्जावान लोगों की आवश्यकता है. इंडिया ऑन फ़ोन के सीईओ इ.के.झा ने संस्था के साथ मिलकर आरटी आई ऑन फोन के माडल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला एवं टेलीफोन के माध्यम से आरटीआई आन्दोलन को गति देने का संकल्प लिया .उन्होंने कहा की आज आरटीआई को गाँव तक एवं देश के अंतिम पायदान पर खड़े जमात तक पहुँचाने की आवश्यकता है. इसे पूरा करने हेतु उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपील की .उन्होंने कहा की इंडिया ऑन फोन के हेल्पलाइन नंबर 9891919135 पर देश के किसी भाग का नागरिक अतिशीघ्र आरटीआई कार्यकर्ताओं एवं आरटीआई से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है .नई टेक्नोलोजी के बिना आरटी आई आन्दोलन की गति तेज एवं प्रभावी नहीं हो सकती है. सोशल कम्युनिटी साईट फेसबुक पर सूचना का अधिकार कम्युनिटी चलनेवाले न्यूज प्रोड्यूसर हसन जावेद ने आरटीआई के बढ़ते प्रभाव एवं ब्यूरोक्रेसी की मानसिकता को बड़े अच्छे तरीके से प्रस्तुत किया. पर्सनालिटी डेवलप[मेंट विशेषज्ञ निखिल त्यागी ने अमेरिका एवं चीन के अग्रणी रहने का उदहारण देते हुए कहा की अगर हमें पारदर्शिता चाहिए तो सबसे पहले हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी. हमें अग्रणी बनाने हेतु आक्रामक भूमिका में आना होगा तभी हम वर्तमान भ्रष्ट व्यवस्था से लडाई लड़ सकते हैं. संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद ने आरटी आए क्षेत्र के अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान प्राप्त अनुभव एवं कठिनाईयों पर प्रकाश डाला . अपने संबोधन में उन्होंने कहा की आरटीआई ड्राफ्टिंग अपने आप में एक महत्वपूर्ण कला है, जिसे सीखने एवं सिखाने की आवश्यकता है. जब तक प्रश्न पूछने की कला नहीं आएगी तब तक आपको सही जबाब नहीं मिलेगा. आरटी आई के प्रश्नों में क्या, कब, कहाँ ,कैसे क्यों आदि प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करने के बजे उसे जानकारी का रूप देकर बगैर प्रश्न वाली शैली में प्रयोग किया जाना चाहिए, अधिकांश लोग ऐसी गलती किया करते हैं. उन्होंने कहा की उनके संस्था गठन करने का लक्ष्य सर्वप्रथम आरटीआई एक्टिविस्टों के अधिकार की लड़ाई लादना है. इसके लिए सर्वप्रथम सामूहिक प्रयास से अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का लाभ आरटीआई आवेदकों को दिलाना है . इस हेतु तंत्र विकसित कर आरटीआई क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण एवं जनजागरण के अतिमहत्वपूर्ण पक्ष की चुनौती संस्था वहन करेगी .अतिशीघ्र राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर राज्य समन्यकों के माध्यम से प्रत्येक राज्य के राजधानी में आरटीआई विषयों पर विचारगोष्ठी एवं सम्मलेन आयोजित की जायेगी व्यवस्था से पीडीत लोग ही आन्दोलन का हिस्सा बन सकते हैं . लोगों को उसके नैतिक कर्त्तव्य के साथ-साथ अधिकार के बारे में जानकारी देने पर स्वतः क्रांति हो जायेगी. उन्होंने कहा की कौन कहता है की जयप्रकाश नारायण मर गए?आज जयप्रकाश नारायण आरटीआई एक्टिविस्टों के रूप में तथा उनका सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन आरटीआई आन्दोलन का नया स्वरुप है जो अब रंग ला रहा है. संस्था के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा की देश के ज्यादातर आरटीआई एक्टिविस्ट माध्यम वर्ग के ही हैं . उन्होंने लॉयर्स ऑफ़ द वर्ल्ड एसोसिएशन संस्था एवं आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के एक साथ रणनीति बनाने पर बल दिया तथा कहा की वे इसके लिए आगे विचार -विमर्श करेंगे ताकि इसे शीघ्र क्रियान्वित किया जा सके. . इंडियन इंस्टीचयुट ऑफ़ पोलिटिकल लीडरशिप के निदेशक शाहनवाज ने आरटीआई एक्टिविस्टों को दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया . अपने वक्तव्य में उन्होनेव कहा की वे आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साथ मिलकर लम्बी दूरी तय करने के प्रति आशान्वित हैं. संस्था के चेयरमैन धनीराम एवं संरक्षक अनिल कुमार मित्तल ने जनहित की भावना से आरटीआई फाईल करने की आवश्यकता पर जोर दिया. तृप्ति सोनकर के सरस्वती वंदना एवं अलीगढ के कवी एवं पत्रकार गाफिल स्वामी द्वारा भ्रष्टाचार पर केन्द्रित कविता को मुक्तकंठ से सराहना मिली.

सोमवार, 28 मार्च 2011

लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका

आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के सेमिनार हॉल में लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई की भूमिका " विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता इंडियन कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन बार के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष प्रवीण एच पारीख ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री पारीख ने कहा की लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई एक्ट एक बेहतर टूल साबित हो सकता है . अमीरों के लिए आरटीआई का कोइ खास महत्त्व बेशक न हो परन्तु गरीबों के लिए यह प्रमुख हथियार हो सकता है .टाइम्स ऑफ़ इंडिया के कार्टूनिस्ट आर .के.लक्षमण का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा की कुछ लोग कुछ खास करने के लिए संकल्पवद्ध होते हैं .वैसे लोग शरीर और मन दोनों से कठोर परिश्रम करने वाले होते हैं, जिनमें से एक गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं. आज आरटीआई आन्दोलन को ऐसे ही संकल्प शक्ति वाले उर्जावान लोगों की आवश्यकता है. इंडिया ऑन फ़ोन के सीईओ इ.के.झा ने संस्था के साथ मिलकर आरटी आई ऑन फोन के माडल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला एवं टेलीफोन के माध्यम से आरटीआई आन्दोलन को गति देने का संकल्प लिया .उन्होंने कहा की आज आरटीआई को गाँव तक एवं देश के अंतिम पायदान पर खड़े जमात तक पहुँचाने की आवश्यकता है. इसे पूरा करने हेतु उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं से सहयोग की अपील की .उन्होंने कहा की इंडिया ऑन फोन के हेल्पलाइन नंबर 9891919135 पर देश के किसी भाग का नागरिक अतिशीघ्र आरटीआई कार्यकर्ताओं एवं आरटीआई से सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है .नई टेक्नोलोजी के बिना आरटी आई आन्दोलन की गति तेज एवं प्रभावी नहीं हो सकती है. सोशल कम्युनिटी साईट फेसबुक पर सूचना का अधिकार कम्युनिटी चलनेवाले न्यूज प्रोड्यूसर हसन जावेद ने आरटीआई के बढ़ते प्रभाव एवं ब्यूरोक्रेसी की मानसिकता को बड़े अच्छे तरीके से प्रस्तुत किया. पर्सनालिटी डेवलप[मेंट विशेषज्ञ निखिल त्यागी ने अमेरिका एवं चीन के अग्रणी रहने का उदहारण देते हुए कहा की अगर हमें पारदर्शिता चाहिए तो सबसे पहले हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी. हमें अग्रणी बनाने हेतु आक्रामक भूमिका में आना होगा तभी हम वर्तमान भ्रष्ट व्यवस्था से लडाई लड़ सकते हैं. संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद ने आरटी आए क्षेत्र के अपने नौ महीने के कार्यकाल के दौरान प्राप्त अनुभव एवं कठिनाईयों पर प्रकाश डाला . अपने संबोधन में उन्होंने कहा की आरटीआई ड्राफ्टिंग अपने आप में एक महत्वपूर्ण कला है, जिसे सीखने एवं सिखाने की आवश्यकता है. जब तक प्रश्न पूछने की कला नहीं आएगी तब तक आपको सही जबाब नहीं मिलेगा. आरटी आई के प्रश्नों में क्या, कब, कहाँ ,कैसे क्यों आदि प्रश्नवाचक शब्दों का प्रयोग करने के बजे उसे जानकारी का रूप देकर बगैर प्रश्न वाली शैली में प्रयोग किया जाना चाहिए, अधिकांश लोग ऐसी गलती किया करते हैं. उन्होंने कहा की उनके संस्था गठन करने का लक्ष्य सर्वप्रथम आरटीआई एक्टिविस्टों के अधिकार की लड़ाई लादना है. इसके लिए सर्वप्रथम सामूहिक प्रयास से अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का लाभ आरटीआई आवेदकों को दिलाना है . इस हेतु तंत्र विकसित कर आरटीआई क्षेत्र से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण एवं जनजागरण के अतिमहत्वपूर्ण पक्ष की चुनौती संस्था वहन करेगी .अतिशीघ्र राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर राज्य समन्यकों के माध्यम से प्रत्येक राज्य के राजधानी में आरटीआई विषयों पर विचारगोष्ठी एवं सम्मलेन आयोजित की जायेगी व्यवस्था से पीडीत लोग ही आन्दोलन का हिस्सा बन सकते हैं . लोगों को उसके नैतिक कर्त्तव्य के साथ-साथ अधिकार के बारे में जानकारी देने पर स्वतः क्रांति हो जायेगी. उन्होंने कहा की कौन कहता है की जयप्रकाश नारायण मर गए?आज जयप्रकाश नारायण आरटीआई एक्टिविस्टों के रूप में तथा उनका सम्पूर्ण क्रांति आन्दोलन आरटीआई आन्दोलन का नया स्वरुप है जो अब रंग ला रहा है. संस्था के अध्यक्ष एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संदीप दुबे ने कहा की देश के ज्यादातर आरटीआई एक्टिविस्ट माध्यम वर्ग के ही हैं . उन्होंने लॉयर्स ऑफ़ द वर्ल्ड एसोसिएशन संस्था एवं आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के एक साथ रणनीति बनाने पर बल दिया तथा कहा की वे इसके लिए आगे विचार -विमर्श करेंगे ताकि इसे शीघ्र क्रियान्वित किया जा सके. . इंडियन इंस्टीचयुट ऑफ़ पोलिटिकल लीडरशिप के निदेशक शाहनवाज ने आरटीआई एक्टिविस्टों को दिशा देने की आवश्यकता पर जोर दिया . अपने वक्तव्य में उन्होनेव कहा की वे आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साथ मिलकर लम्बी दूरी तय करने के प्रति आशान्वित हैं. संस्था के चेयरमैन धनीराम एवं संरक्षक अनिल कुमार मित्तल ने जनहित की भावना से आरटीआई फाईल करने की आवश्यकता पर जोर दिया. तृप्ति सोनकर के सरस्वती वंदना एवं अलीगढ के कवी एवं पत्रकार गाफिल स्वामी द्वारा भ्रष्टाचार पर केन्द्रित कविता को मुक्तकंठ से सराहना मिली.

रविवार, 27 मार्च 2011

Right to information as a tool for good governance and against corruption-P.H.Parekh

"RTI ACTIVISTS ASSOCIATION OF INDIA” organized a lecture on " ROLE OF RTI FOR EMPOWERMENT OF INDIAN DEMOCRACY" at Seminar Hall, Ramjas College Delhi University . Hon'ble Mr.Pravin.H Parekh Senior Advocate, Supreme Court of India and President Confederation of Indian Bar has preside over the lecture.Mr Pareekh Said that Right to information as a tool for good governance and against corruption: Corruption thrives on secrecy. Individuals and institutions become corrupt only when there is no public scrutiny of their actions. The more they operate in the public gaze the less corrupt and more efficient they are likely to be. In this respect, the right to information can be utilised as a tool to fight the widespread corruption in India. In 2006, India received a score of just 3.3 (out of a maximum of ten) in Transparency International’s Corruption Perceptions Index, ranking it 70th out of 163 countries. This reflects the serious corruption problem in India - a problem that affects not only businesspeople, but a wide range of individuals. In India, tax revenue meant for investment in public services is an attractive target for abuse. In addition, Indian citizens - especially the poor ones - frequently face corruption in public service delivery via the solicitation of bribes or speed money. A.K.Jha,CEO India on Phone said that there is a great challenge to connect each villages of India for RTI through phone. Revival of collapsed systems and sorting out people's problems is possible through this right, he said adding it is necessary for the common people to properly understand and use their democratic rights and responsibilities and exercise their franchise under the democratic set up. But, he said, the people's democratic responsibilities did not begin or end with casting their votes only since they are also required to nurture the democratic system in the day-to-day functioning. Mr Hasan Javed, News Producer said that Right to information as a tool for the fulfillment of economic and social rights. Anil Kumar Mittal Vice President said that , Citizens do not need to go to any office or even telephone anybody. They can enforce good governance from their homes. In the event, the public servant treats an RTI requisition with contempt or indifference, he faces the threat of paying a personal penalty. Dhani Ram ,Chairman and Assit.Professor Ramjas College Said that In its true sense, the RTI is a citizen's search for the truth about how his government functions -- a satyagraha. The movement is growing relentlessly and will lead India to the 'Swaraj' which we missed in 1947. A quiet peaceful revolution called the 'Right To Information' campaign is sweeping across the Nation. Sahnawaj Director institute of political leadership Said that I help this NGO to start a new segment on RTI. Sandeep Dubey President & Advocate Supreme Court of India said adding that the RTI Act was the outcome of the arguments of legal luminaries that freedom of speech depended on a derived right to information. If right to speech should be effective, there should be right to information. The right to live also meant right to live in decency and this included right to know. “Equality brings an obligation to share information,” he said. Gopal Prasad RTI Activist & General Secretry today said that- This programme aims at improving the Right to Information legislation, the implementation and enforcement of such legislation and the utilization of the Right to Information as a tool for Democracy. Motto of our organization is fight for the right of RTI Activist of India. We start statewise training campaign and awareness programme for RTI Activists. Saraswati vandana by Tripti sonkar and Poem on corruption by Gaphil swami appeariciated by audience.

शुक्रवार, 18 मार्च 2011

केन्द्रीय कृषि मंत्री हरीश रावत ने 16 महिला रत्नों को सम्मानित किया
















‘‘विश्व मित्र परिवार’’ संस्था की अंगीभूत इकाई ‘‘विश्व महिला परिवार’’ द्वारा विश्व महिला दिवस के अवसर पर ;आजाद भवन, आईसीसीआर, आईटीओ, नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत ने राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 16 महिलाओं को उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया। गुजरात की श्रीमती संस्कृति रानी देसाई को अत्याध्ुनिक बहुमुखी विचार प्रवाहिका के रूप में तथा मुंबई (महाराष्ट्र) की डॉ. अलका ईरानी को अत्याधुनिक सूचना तकनीक के आलोक में ‘‘विलक्षण महिला रत्न’’ से एवं उत्तर प्रदेश से डॉ. पल्लवी मिश्रा को उच्च शिक्षा व समाज सेवा, झुंझनू (राजस्थान) की श्रीमती रूक्मणी भेड़ा को समाज सेवा के आलोक में ‘‘समाजरत्न’’ सम्मान से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ की डॉ. विभा दूबे को समाज सेवा, मुंबई (महाराष्ट्र) की श्रीमती तारा सिंह को साहित्य सेवा, उड़ीसा की श्रीमती जयंती साहू को समाजसेवा, दिल्ली की साध्वी श्रीकृष्णप्रिया डॉ. अंजू को भारतीय विद्या पर शोध, श्रीमती रमेश कुमारी भारद्वाज तथा श्रीमती रामवती, बिहार की श्रीमती सीमा कुमारी का शिक्षा एवं समाजसेवा, दिल्ली की पहली महिला ऑटो ड्राईवर सुश्री सुनीता चौध्री को चुनौतीपूर्ण कार्यक्षेत्र चुनने, राजस्थान की श्रीमती विद्या पुरोहित को महिला एवं बाल कल्याण, आसाम की श्रीमती अफसाना बेगम को समाजसेवा पाथ र्फाइंडर वेलफेयर सोसाइटी दिल्ली से जुड़ी श्रीमती नीलम व सुनीता को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु ‘‘महिला रत्न’’ सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह गौरव की बात है कि विश्व महिला दिवस के अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों में जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्रवाद एवं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उत्कृष्ट योगदान हेतु अग्रणी भूमिका निभाने वाली 16 महिलाओं को भारतीय संस्कृति के संरक्षण में कार्यरत संस्था विश्व मित्र परिवार की अंगीभूत इकाई विश्व महिला परिवार के माध्यम से सम्मानित करके मुझे कापफी प्रसन्नता हो रही है देश भर से आए 148 नामांकन में से 16 महिलाओं के निष्पक्ष चुनाव हेतु संस्था की निर्णायक मंडली धन्यवाद की पात्र है। विश्व मित्र परिवार संस्था निरंतर रूप से प्रतिभाओं को खोजने, मूल्यांकन करने एवं सम्मानित करके राष्ट्र के सशक्तिकरण हेतु प्रमुख आधर स्तभं बनाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। वास्तव में नारी को सशक्त एवं सम्मानित करके ही राष्ट्र को सशक्त किया जा सकता है। उक्त अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष एवं तरंग मीडिया प्रा. लि. के निदेशक ‘भू त्यागी भारतीय’ने कहा कि केवल भारतीय महिलाएं ही समस्त विश्व की रक्षक ‘‘वसुध्ैव कुटुम्बकम’’ वाली भारतीय संस्कृति को पुनः विश्वव्यापी बनाकर विध्वंसक बारूद के ढेर पर बैठी विश्व की मानव सभ्यता को बचा सकती है। संस्था की अध्यक्ष भावना त्यागी ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय वैज्ञानिक संस्कृति, सभ्यता, भारतीय विद्याएं, जैविक एवं गौधन द्वारा कृषि, पर्यावरण, वृक्षारोपण, अहिंसा एवं जीव दया, अहिंसा, शाकाहार, सामाजिक, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद एवं भारत की सभी चिकित्सा पद्धति, राजनैतिक, प्रशासनिक, कला, साहित्य, अहिंसा, शाकाहार, साहित्य, लोक कला, दूरदर्शन ;टी.वी. चैनल), पत्रकारिता, प्रकाशन, शिक्षा, प्रशिक्षण, संचार, सूचना, राष्ट्र भाषा संवर्धन, उद्यमिता, व्यवसाय, एवं सांस्कृतिक जगत के मूर्धन्य महिला हस्ताक्षरों की उपस्थिति ने हमें उत्साहित किया है। उपरोक्त सभी विषयों पर प्राचीन से अर्वाचीन तक महिलाओं द्वारा किये गये रचनात्मक कार्य, संघर्ष, सपफलता, साहसिक कार्यों से सम्बंधित एवं देशभक्त महिला बलिदानियों के चरित्र, कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर एक स्मृति-अंक का प्रकाशन किया जायेगा। इस अंक को अधिकाधिक संख्या में जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता है, क्यांेकि आज भारतीय स्वाभिमान, सभ्यता, संस्कृति, मानसिकता, राष्ट्र भाषा, एवं समस्त क्षेत्रीय भाषाओं का पाश्चात्य सभ्यता, संस्कृति द्वारा अपमान हो रहा है। यह समस्त विश्व के लिए घातक है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं अकावि के कुलाधिपति डॉ. मदन मोहन बजाज ने कहा कि परित्यक्त महिलाओं एवं किन्नरो को समाज में सम्मान मिलना अनिवार्य है। उक्त अवसर पर हुए रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर केन्द्रित प्रतिभा विकास गुरूकुल द्वारा प्रस्तुत नृत्य एवं गायन के माध्यम से सरस्वती व गणेश वंदना, शिक्षा भारती पब्लिक स्कूल द्वारा प्रस्तुत लद्दाख नृत्य को दर्शकों ने कापफी सराहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदनमोहन बजाज तथा मंच संचालन कमल शर्मा ने किया। संस्था के निर्णायक मंडल में गोपाल प्रसाद (आरटीआई एक्टिविस्ट), नरेश शर्मा (कॉरपोरेट व फायनांसियल एडवाइजर), अभय सिंह, श्रीमती ऋतु सिंह, उद्योगपति एवं निर्यातक वी. सी. जैन, बाबा रामकृष्णदेव तोमर, उद्योगपति एवं समाजसेवी लक्ष्मी नारायण मोदी, समाजसेवी दीपक भारद्वाज, हृदेश पचौरी, राष्ट्रीय खिलाड़ी भावना पचौरी, सुश्री ज्योति, विपिन, एवं आशीष गुप्ता आदि की उल्लेखनीय भूमिका रही। इस कार्यक्रम में एक नन्ही बालिका द्वारा प्रस्तुत काव्य धरा में श्रोतागण भावविह्नल हो गएः-मैं ही माँ मैं ही बेटी फिर भी ना जाने क्यूँ इस संसार में आने से रोकी जाती हूँ।मैं ही बहन मैं ही पत्नीमैं ही जगत जननी कहलाती हूँफिर भी ना जाने क्यूँ इस संसार मेंआने से रोकी जाती हूँ।मैं ही लोरी मैं ही गीत सुनाती हूँमैं ही उंगली पकड़ चलना सिखाती हूँफिर भी न जाने क्यूँ इस संसार में आने से रोकी जाती हूँ।मैं ही इंदिरा, मैं ही कल्पना, मैं ही प्रतिभा पाटिल कहलाती हूँ।मैं ही घर, राज्य और देश चलाती हूँ।

गुरुवार, 10 मार्च 2011

MORE THAN 30 CRORE RUPEES SCANDAL BY NAME OF BIODIVERSITY PARKS PROJECT IN DU

MORE THAN 30 CRORE RUPEES SCANDAL BY NAME OF BIODIVERSITY PARKS PROJECT
IN CEMDE, DELHI UNIVERSITY BY RETIRED PROF. C. R. BABU
Prof. C. R. Babu worked as a Professor in the Dept of Botany, University of Delhi and retired at the superannuated age of 65 years on 30/06/2005. During his service period he had been designated as the Director of a small centre named CEMDE (Centre for Environmental Management of Degraded Ecosystems) in 1990, Pro Vice Chancellor (PVC) in 2000 and Acting Vice Chancellor (VC) of the University of Delhi in 2005. He continued his service in the university as the Director-CEMDE from 24/01/1990 to 29/06/2005, PVC from 08/08/2000 to 29/06/2005 and Acting VC from 16/05/2005 to 29/06/2005.
Prof. C. R. Babu before retirement as serving professor and PVC, a verbal proposal for conferment of the dignitary title Professor Emeritus to himself was made approved in the Academic Council (AC) meeting on 23/04/2005 and decision taken in the Executive Council (EC)meeting on 29/04/2005 where he himself was a party to recommending by the AC and EC without any written proposal and formal document of recommendation of the then VC on record, and the conferred the title on 01/07/2005 very next day after his retirement. This is a fact of primae facie and clear violation of the Ordinance XII-B under the Delhi University Act, 1922.
Just 18 days before retirement Prof C. R Babu on a Saturday (holiday in the university) on 11 June, 2005 off record directed to issue a purported letter vide Ref. No.R/2005/1915 in his favor by Shri Kanwar Manjit Singh, the Finance Officer (on deputation from C&AG) as the Registrar & Finance Officer despite presence of the full time Registrar, Dr. A. K. Dubey, IAS in the university on a specially printed letter head addressed to the Vice Chairman, Delhi Development Authority (DDA) and mentioned “The projects for establishment and management of (a) Yamuna Biodiversity park and (b) Aravalli Biodiversity Park have been entrusted by the DDA to Prof C.R. Babu, PVC, ……… The University of Delhi has empowered Prof. C.R Babu to personally operate, pursue and settle all transactions of financial and administrative in nature of the projects” without any office notings, valid documents or university approval/ order/ EC resolution on record for approval of multi crore rupees biodiversity park project for financial grants and Prof Babu’s lifetime involvement in the project with all financial & administrative powers. Based on the letter DDA sanctioned the projects as the funding agency and release funds from time to time to the university by the name of the Registrar but crores of rupees funds is being utilized by retired Prof. Babu.
Immediate next day of retirement, Prof. Babu again started functioning in the CEMDE violating Delhi University Act 1922 by claimed himself as the Project Incharge till date without any office approval/ authorization/ order/ notification or entrusting letter neither from the University of Delhi nor from the DDA. Under this project two biodiversity parks namely Aravalli Biodiversity Park at Vasant Kunj and Yamuna Biodiversity Park at Wazirabad, Delhi are being developed. Till 2010 DDA released grants of Rs.3257 Lakhs.. Another four new mega parks projects are further approved by DDA for development in the hand of Prof. C. B. Babu.
Sl No
INTERVIEW QUESTIONNAIRES
RESPONSE
1.
For the period from 16 May, 2005 to 29th June, 2005 who was the Pro Vice Chancellor (PVC), Acting Vice Chancellor (VC) and Director- CEMDE of the University of Delhi?
Prof. C. R. Babu
2.
When the Biodiversity Park Projects started by the University of Delhi?
Yamuna Biodiversity Park in 2003
Aravalli Biodiversity Park in 2004
3.
What are the university or DDA guidelines are applicable to run the development projects? Whether any MoU has been signed between DDA & DU?
No guidelines available/ exists
No MoU has been signed between DDA and Delhi University
4.
Who had prepared & submitted the biodiversity parks project proposal to DDA for approval of the project. Copy of the DDA approval letter?
No information and copy of project approval letter available except copy of a letter No.R/2005/1915 dated 11 June, 2005
5.
Name of the funding agency and project authority? How much amount of grants released by DDA to university till 2010?
Delhi Development Authority.
More than 3257 lakhs rupees
6.
For the period from 16th May, 2005 to 29th June, 2005 who was the Registrar of the university
Dr. A. K. Dubey, IAS was the Registrar
7.
Name of the authority under whose direction and office order/ EC resolution the letter dated 11 June, 2005 was issued to VC, DDA
No information or document available except a short note on a plain paper by PVC, Prof. Babu authorized Sh Manjit Singh to work as Registrar for 10 to 12 June, 2005
8.
What was the urgency to issue the particular letter without any office order/ EC resolution/ Notification on 11th June, 2005 by Sh Manjit Singh,FO as the Registrar & FO despite presence of Dr AK Dubey, IAS Registrar
No information or documents available except the short note on a plain paper by PVC Prof Babu
9.
Was 11 June, 2005 a working day of the university to issue that letter?
No, it was Saturday, a regular holiday of the university.
10.
As per contents of that particular letter copy of the special provision made by the university for smooth execution of financial as well admn issues of these projects?
No such documents of special provision available in the university record.
11.
Name of the university authority empowered Prof. C. R Babu to operate, pursue and settle all transactions of financial & admn nature of the projects? Copy of the university authorization/ empowering letter.
No information or copy of such copy of any university documents available on record
12.
As per contents of the letter name of the authority entrusted or appointed/ authorized retd Prof Babu as the Project In-charge of the said projects and copy of the appointment/ entrusting/ authorization letter issued to Prof. Babu to work in the university/ projects after his retirement?
As per information by Delhi University the Projects were entrusted to Prof. Babu but no document/ copy of entrusting letter available and as per information by DDA Prof. Babu was appointed by Delhi University but no document/ copy of appointment letter on record available except copy of the letter dated 11 June, 2005
13.
When approval by AC & decision by EC for conferment of the title Professor Emeritus to Prof. Babu done. Copy of the written proposal with recommendation of the VC
Before retirement of Prof. Babu approval by AC on 23/4/2005 & decision by EC on 29/4/2005 for conferment of title Professor Emeritus to Prof Babu done. No copy of written proposal with recommendation of VC available on record
14.
Was the PVC, Prof Babu a party of the AC and EC meeting to recommending for approval & decision for conferment of the title of Professor Emeritus to Prof Babu? Was it violation of the Delhi University Ordinance or Act, 1922?
PVC, Prof CR Babu was a party in both AC and EC meeting recommending for approval & decision for conferment of the title to Professor Babu. Yes, It was a fact of primae facie and violation of the Ordinance XII-B of the Delhi University Act, 1922.
15.
What was the urgency for approval of the title Professor Emeritus to Prof CR Babu before his retirement?
No information is available rather to advance claim of the unauthorized dignitary title to mention in that letter addressed to VC, DDA
16.
As per Delhi University Ordinance XII-B can a professor be eligible for forwarding & processing for approval of proposal for conferment of title Professor Emeritus before retirement?
No, violation of the Ordinance XII-B
17.
As per Ordinance XII-B can a Professor Emeritus may pursue academic work within the framework of other dept to which he was not attached after retirement and is provided facilities like personal office or independent library & will carry with financial commitment for the university?
No, violation of the Ordinance XII-B
18.
Name of the present Director-CEMDE of Delhi University after retirement of Prof. Babu? What is the role of present Director-CEMDE in the said projects?
Prof. Inderjit. After retirement of Prof Babu from the position of Director Prof. Inderjit has no role in the project except Prof Babu till date
19.
How many post of Scientists and Scientist-in Charges exist in the said projects and appointed?
No post of Scientist and Scientist-in Charge exists in the project nor appointed any Scientist or Scientist-in Charge.