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Showing posts from April, 2011

निजी क्षेत्र में आरटीआई का प्रावधान क्यों नहीं ?--गोपाल प्रसाद

(नई दिल्ली,14 अप्रैल 2011 ) बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के जयन्ती के अवसर पर " आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ इण्डिया " द्वारा लक्ष्मी नगर में आयोजित "यदि आज आंबेडकर जीवित होते " बिषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में संस्था के महासचिव गोपाल प्रसाद (आरटीआई एक्टिविस्ट)ने कहा कि यदि आज आंबेडकर जीवित होते तो वे निश्चित रूप से दलितों को सूचना का अधिकार प्रयोग करने ,आरटीआई एक्ट को सशक्त करने तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून में कठोर प्रावधान अवश्य करते. वास्तव में सूचना का अधिकार (RTI) का अधिकाधिक प्रयोग करके ही भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को उजागर किया जा सकता है. भ्रष्टाचारियों को नकेल डालकर ही कानून का भय बनाया जा सकता है. जब तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनहित हेतु आरटीआई एक्ट को और अधिक शक्ति नहीं दिया जायेगा तब तक कानून तोड़नेवालों के दिल में कानून के प्रति सम्मान कैसे हो सकता है? वास्तव में कानून का सम्मान ही भारतीय संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर का सम्मान है और यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजली होगी. कालाधन वापस लाने एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन का सबसे अधिक फायदा दलितों…

कैसे करें भ्रष्टाचार का सामना ? --गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट

भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना हजारे के आमरण अनशन रुपी शंखनाद के बाद दिल्ली के प्रीत विहार इलाके में एक विचार गोष्ठी में "भ्रष्टाचार का सामना कैसे करें" विषय पर चर्चा हुई. "आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया " के महासचिव गोपाल प्रसाद ने कहा कि यूपीए सरकार अब तक की सबसे भ्रष्टतम सरकार है. वास्तव में सोनिया गाँधी ने संसद, प्रधानमंत्री को हाईजैक कर लिया है . राष्ट्रीय सलाहकार समिति (NAC ) बनाकर अपनी महत्ता साबित करने तथा मंत्रीमंडल को पंगु करने के सिवा इसका कोई दूसरा काम नहीं है.जनता अब पहले के बनिस्पत जागरूक हो चुकी है. भ्रष्टाचार और कमरतोड़ मंहगाई ने जनता का जीना मुहाल कर रखा है. देश की जनता की पीड़ा अब असहनीय हो चुकी है और उसे अब हर हाल में बदलाव चाहिए . प्रख्यात योग गुरु स्वामी रामदेव के कालाधन को वापस लाने एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ जनजागरण के बाद जनता पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा है. बाद में भाजपा द्वारा संसद के बाहर एवं संसद के भीतर आन्दोलन चलाने के बाद इस मुहिम ने और रंग पकड़ा. निराश जनता के मन में आशा की किरण प्रस्फुटित हो गई. तीसरे चरण में अन्ना हजारे के आमरण अ…

मेघनाद साहा का पत्र गोपाल प्रसाद आरटीआई एक्टिविस्ट के नाम

नई दिल्ली 14 .02 .2011 . समीपेषु : श्री गोपाल प्रसाद बाबुसाहब, तुम याद तो आते ही हो मगर आज मुझे विवश करते हुए बहुत याद आ रहे हो . इसलिए वार्तालाप से अपारग होकर मैंने लेखनी उठाई है .दरअसल बीते दिन रविवार को टी.वी. पर एक कार्यक्रम देखा और गहन मनोयोग के साथ सुना .हाँ ,दूरदर्शन राष्ट्रीय प्रसारण के कार्यक्रम "जानने का हक " दोपहर के तीन बजे से देख रहे थे . अधीर आग्रह के साथ साँस रोककर हमलोग इंतिजार कर रहे थे. अंततः जो सूचना मिली थी ,उसकी सच्चाई भरी इंटरव्यू के जरिए पाए. जो खबरें अंगरेजी और हिंदी समाचारपत्रों में आई थी वह सब पढ़कर हमलोग अत्यंत दुखी हुए थे -"अशोक विहार के सत्यवती कॉलेज के हाते में जघन्य रूप से हरे - भरे जीवंत पेड़ों को काटा गया." एक शैक्षिक प्रतिष्ठान के अधिकारी ऐसा कैसे कर सकते हैं-सोचना हमारे लिए संभव नहीं हो पा रहा था . मगर जान लो ,सुन लो -हम खुश थे ,क्योंकि तुम परमेश्वर की असीम अनुकम्पा से कुछ आक्रमणकारियों के हाथों से बच पाए. हम देशवासी वाकई खुश हुए थे , इसके लिए और उस साहसी महिमामयी नारी के लिए भी जो उस दिन उसी समय उन दुष्कर्मियों के हाथों हत्या होते…