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Showing posts from September, 2011

समर्थ एवं सशक्त जन लोकपाल के कार्यकलाप संबंधी कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव

सरकारी मशीनरी सरकारी धन के दुरुपयोग रोकने में सक्षम नहीं है , इसलिए जन लोकपाल के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग रोकने के उपाय किए जांय और इस हेतु एक मॉनीटरिंग प्रणाली विकसित करे . हर व्यक्ति जो सरकार से वेतन पाता है , की जिम्मेदारी तय हो . आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर उसके विरुद्ध समयसीमा के अंतर्गत कानूनी कारवाई की जाए और उस संपत्ति को सरकारी संपत्ति घोषित की जाए. इस सम्बन्ध में बिहार सरकार के मॉडल को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए.

जन लोकपाल द्वारा इंडियन सिविल सर्विस के सभी कैडरों (IAS /IPS /IRS /IFS आदि) पर विशेष निगरानी रखी जाए. इनसे सम्बंधित शिकायतों की अबिलम्ब जाँच की जाए तथा उस पर त्वरित करवाई हो , साथ ही जाँच होने तक उन अधिकारीयों को संवेदनशील पदों से मुक्त किया जाना चाहिए. ये जनता के सेवक हैं न की देश को लूटने के लिए नियुक्त किए गए हैं.

सभी राजनैतिक घराने /वंश, जिनके पास आजादी के बाद अकूत संपत्ति आई है और वास्तव में जो देश का पैसा है , उसे सरकारी खजाने में लाया जाए तथा उसका उपयोग देश के बुनियादी आवश्यकताओं/ समस्याओं, आधारभूत संरचनाओं एवं सुविधाओं के विकास पर खर्च हो…

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता

मजदूरों के हकों एवं हितों के लिए उन्हें सशक्त किए बिना भारत की आज़ादी का कोई मतलब नहीं है. आज देश में नीति एवं नियम के बजाय साफ नीयत की जरूरत है और इसके लिए हमें जागरूक और संगठित होना पड़ेगा. सरकारों की नीतियों में दूरदर्शिता एवं क्रियान्वयन का अभाव रहता है . आर्थिक उदारीकरण के इस दौर में सरकारों की भूमिकाएँ बदल चुकीं हैं . राज्य-व्यवस्था अपनी जिम्मेदारियों से कतराती नजर आ रही हैं. सरकारें निजी कंपनी की तरह हो गेई हैं और वह लाभ देनेवाली एक एजेंसी के तौर पर कम कर रही है. वह सामान्य जन के लिए कल्याणकारी न रहकर कई मायनों में विनाशकारी भूमिका निभा रही है . वर्तमान दौर में सभी दलों की अर्थनीति एक जैसी हो गयी है. प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों के सुझावों की और प्रधानमंत्री कार्यालय ने बहुत सरे मामलों की अनदेखी की है. विश्वसनीय आंकड़ों के अनुसार पिछले बीस बर्षों में नगरों की जनसँख्या में डेढ़ गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है . देश में बीस बर्ष पहले मात्र एक अरबपति था , आज लगभग पचास हैं. भारतीय संविधान और लोकतंत्र इन्हीं कारणों से कमजोर हुआ है.
दुनियां के पैमाने पर मजदूरों और कर्मचारियों की सामा…

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सूचना सही नहीं

भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालय सूचना एवं प्रसारण की सूचना सही नहीं है क्योंकि सरकारी वेबसाईट nic .in ने इसका समय पर अपग्रेडेशन ही नहीं किया है .सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तो मात्र एक उदाहरण है , इस तरह के कई ऐसे मंत्रालय/विभाग हैं, जिनके वेबसाईट का समय पर अपग्रेडेशन नहीं हुआ है. इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के बाबजूद अपग्रेडेशन की गति कछुआ चल की भांति एवं पुरानी तकनीक पर ही आधारित है. nic .in समय पर अपग्रेडेशन हेतु सक्षम नहीं है. विश्वसनीय सूत्र के अनुसार nic कई विभागों को स्वयं समाधान देने के बजाय अपने पैनल के आईटी कंपनियों की सेवा की संस्तुति कर रही है, जो एक लम्बी प्रक्रिया है. पुरानी एवं गलत सूचना या जानकारी होने से आम नागरिक के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई चिट्ठियों को विभाग द्वारा इसलिए वापस भेज दिया जाता है, क्योंकि वह पुराने अधिकारी / कर्मचारी के नाम प्रेषित होता है.कई अधिकारियों के नाम स्थानांतरण एवं सेवानिवृति के वाबजूद वेबसाईट में प्रदर्शित अधिकारियों की लिस्ट में शोभा बढ़ा रहे हैं. इससे सम्बंधित विभाग की अकर्मण्यता , गैर जिम्मेदारी तथ…