रविवार, 4 मार्च 2012

गीत एवं नाटक प्रभाग से ऑडीशन टेस्ट की सीडी गायब

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले गीत एवं नाटक प्रभाग के
मुख्यालय सूचना भवन से दिल्ली क्षेत्र की प्राईवेट रजिस्टर्ड पार्टियों
के ऑडीशन टेस्ट की सीडी गायब है तथा अब तक उच्चाधिकारियों ने इस गोलमाल
एवं अनियमितताओं पर कोई कारवाई नहीं की है, जिसका खुलासा सूचना का अधिकार
के तहत हुआ है.
सूचना का अधिकार कार्यकर्त्ता गोपाल प्रसाद ने १४ फरवरी २०११ को
गीत एवं नाटक प्रभाग से सूचना का अधिकार के तहत कई जानकारियां मांगी थी ,
जिसमें दिल्ली क्षेत्र की प्राईवेट रजिस्टर्ड पार्टियों के ऑडीशन टेस्ट
की सीडी व ऑडीशन टेस्ट की प्रक्रिया तथा नियमावली की मांग की थी .इसका
जबाब विभाग ने नियत समय एक माह के बजे पूरे तीन माह बाद १६ मई २०११ को
आधे अधूरे रूप में दिया.
विभागीय उत्तर से असंतुष्ट श्री प्रसाद ने २ जून २०११ को विभाग के निदेशक
एवं प्रथम अपीलीएट अधिकारी एल.आर.विश्वनाथ के समक्ष अपील डाली . इस अपील
में श्री प्रसाद ने कहा की उन्हें प्राईवेट रजिस्टर्ड पार्टियों को दिए
गए कार्य का सम्पूर्ण ब्यौरा माँगा था , परन्तु उन्हें पार्टीवार ,
निर्गत राशि की चेक क्रमांकवार जानकारी नहीं दी गई , जिससे यह स्पष्ट हो
सके की किन -किन पार्टियों को अलग- अलग कितनी राशि के कितने कार्यक्रम
दिए गए. ऑडीशन टेस्ट में शामिल जजों के नाम एवं ब्यौरे के सम्बन्ध में दो
जजों भालनाथ मिश्रा एवं एम.एल.मयुरा का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया गया.
वीडीओग्राफर को बुलानेवाले अधिकारी के सम्पूर्ण जानकारी के एवज में केवल
पदनाम की जानकारी दी गई;जबकि अधिकारी का नाम व संपर्क नंबर नहीं बताया
गया.
गोपाल प्रसाद ने कहा की इस विभाग के जनसूचना अधिकारी को नियमों
के जानकारी नहीं है. इस विभाग में आरटीआई का जबाब तीन चार महीने में दिया
जता है एवं यहाँ पारदर्शिता का घोर अभाव है. २०१०-२०११ में हुए वीडीयो
एवं मार्किंग सहित सभी स्क्रीनिंग का ब्यौरा रखनेवाले अधिकारी के जानकारी
तो विभाग ने उपलब्ध ही नहीं कराई जबकि इसी आरटीआई आवेदन के क्रमांक ६ के
सम्बन्ध में ९-११ नवम्बर २०१० को दिल्ली क्षेत्र के प्राईवेट रजिस्टर्ड
पार्टियों के विभाग द्वारा स्क्रीनिंग के बाद बने वीडीओ को मार्किंग करने
के बाद लॉक करके गीत एवं नाटक प्रभाग के उपनिदेशक ध्रुव अवस्थी को
सुपुर्द करने की सूचना दी गई.
विभाग द्वारा आरटीआई एक्ट के धारा ४ के तहत लंबित करवाई , कारण
एवं समयसीमा की जानकारी भी देना विभाग ने आवश्यक नहीं समझा. आरटीआई
नियमावली की धारा १९(१) के अनुसार तत्कालीन जनसूचना अधिकारी निखिलेश
चटर्जी द्वारा नियमानुसार अपीलीएट अथॉरिटी की जानकारी भी नहीं दी गई.
दिलचस्प बात यह है की श्री प्रसाद ने जनसूचना अधिकारी के पत्र के आलोक
में मांगी गई जानकारियों से सम्बंधित कागजात के एवज में २८ रु. जमा कर
दिए परन्तु निदेशक को संबोधित अपीली आवेदन में लिखा की जनसूचना अधिकारी
ने चूंकि एक महीने के बाद आरटीआई का जबाब दिया है , अतः आरटीआई नियमावली
के अंतर्गत धारा ७(६) के अनुसार उन्हें मांगी गई सभी कागजातों की
प्रतिलिपि मुफ्त उपलब्ध कराया जाना चाहिए परन्तु दो आरटीआई से सम्बंधित
कागजात के एवज में २८ रु. तथा ६० रु. जमा करवाए गए , जिससे यह प्रतीत
होता है की या तो जनसूचना अधिकारी को नियमों की जानकारी नहीं है या वे
आरटीआई नियमावली की उपेक्षा कर रहे हैं. दोनों ही स्थिति चिंताजनक है, जो
विभाग के ढीले-ढाले रवैए एवं असंतोषजनक स्थिति का द्योतक है. इस पूरे
प्रकरण में विभागीय कृपापात्र बने फनकार ग्रुप के प्रमुख ए. सिद्दीकी को
बर्ष २००९-२०११ में सर्वाधिक २४९ कार्यक्रम के एवज में ९ लाख ९६ हजार का
भुगतान किया गया ,जो स्वयं इसी विभाग के सेवानिवृत कर्मी हैं. खास बात यह
है की आरटीआई में फनकार ग्रुप प्रमुख श्री सिद्दीकी के पेंशन राशि ,
सेवानिवृति तिथिवा बर्ष तथा पदनाम और विभागीय पेंशन पानेवाले व्यक्ति की
पार्टी उसी विभाग से पंजीकृत हो सकती है या नहीं , से सम्बंधित नियमावली
की जानकारी भी नहीं दी गई. दिलचस्प बात यह भी है की ऑडीशन परिणाम में
महिलाओं के सभी ग्रुपों को सी ग्रेड दे दिया गया. इस सन्दर्भ में हरिओम
शरणम् ग्रुप की संचालक नंदा सावंत द्वारा ऑडीशन टेस्ट में पार्टी के
ग्रेडिंग के मूल्यांकन में भ्रष्टाचार की जांच की मांग के आवेदन के
प्रत्युत्तर में उपनिदेशक सुरेन्द्र प्रसाद ने कहा कि आरोपित बिषय की
अत्यंत सतर्कता के साथ जांच की गई है और जांच के पश्चात यह पाया गया है
कि आपको जो परिणाम प्राप्त हुआ है वह नियमानुसार सही एवं मान्यता प्राप्त
है. महत्वपूर्ण पहलू यह भी है की विभाग ने १० मार्च २०११ के शिकायत की
जांच १ अप्रैल २०११ को ही करके उत्तर भी दे दिया.
सावंत ने इस सन्दर्भ में कहा है की विभाग ने मुझे अप्रैल
फूल बनाना चाह है , परन्तु मैं हार माननेवाली महिला नहीं हूँ. महिला के
नेतृत्व वाले मंत्रालय में महिला द्वारा विभागीय लालफीताशाही को उजागर
करने हेतु उन्होंने सूचना अधिकार कार्यकर्त्ता गोपाल प्रसाद का सहयोग
लेकर अब तक दर्जनों आरटीआई दाखिल करवा चुकी हैं. श्रीमती सावंत ने कहा की
न्याय पाने हेतु वे कोइ कोर कसर नहीं छोरेंगी, उन्होंने यह भी कहा की इस
मामले को ज्यादा टूल नहीं देने का उनपर काफी दबाब है.
पुनः विभाग ने २० जून २०११ को श्री प्रसाद को अपने कार्यालय
में उपलब्ध रिकार्डों के निरीक्षण की सलाह भेजी परन्तु विभाग ने उस दिन
भी उन्हें पूरी जानकारी ना तो उपलब्ध कराई और ना ही निरीक्षण का मौका
दिया . हाँ जानकारी देने तथा कर्मियों के कमीं का बहाना बनाने का दिखाबा
जरूर किया गया . गौरतलब है कि गीत एवं नाटक प्रभाग ने इनको जानकारी
उपलब्ध करने के दरम्यान काफी चालाकी बरती तथा इनको टालू जबाब देकर टरकाना
चाहा, जो प्राप्त जबाब से स्पष्ट होता है
इस पूरे प्रकरण के सबसे महत्वपूर्ण भाग ऑडीशन की सीडी के मसले पर
विभागीय अपील के एवज में विभागीय सहायक निदेशक एवं वर्तमान जनसूचना
अधिकारी सुश्री मनोज बंसल ने २० जुलाई 2011 के आरटीआई आवेदन के आलोक में
अपने विभाग के उपनिदेशक ध्रुव अवस्थी एवं उनके मातहत सहयोगी उच्चवर्गीय
लिपिक संजय राठौर के ऑडीशन की सीडी रखने की जिम्मेवारी वहां नहीं करने की
सूचना दी है , जिससे स्पष्ट होता है की एक दूसरे को जिम्मेवारी
स्थानांतरित करने की परंपरा का निर्वहन मात्र इस विभाग में किया जा रहा
है. गीत एवं नाटक प्रभाग की समस्त अनियमितताओं की सभी जानकारी के बाबजूद
निदेशक एल. आर.विश्वनाथ द्वारा जिम्मेवार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक
कारवाई अब तक नहीं की गई है.

केजरीवाल के बयान पर आपति करने के बजाय संसद की गरिमा कायम करने में दें योगदान

आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के महासचिव एवं सूचना अधिकार कार्यकर्त्ता
गोपाल प्रसाद ने अरविन्द केजरीवाल के भाषण पर राजनैतिक दलों के नेताओं के
अनर्गल बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. श्री प्रसाद ने कहा कि
विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा अपराधियों , दुष्कर्मियों एवं
भ्रष्टाचारियों को चुनाव में टिकट देकर अपना प्रतिनिधि बनाने की गलत एवं
प्रतिस्पर्धी परंपरा को रोके बिना स्वच्छ ईमानदार एवं पारदर्शी शासन की
कल्पना ही बेमानी है. राजनैतिक दलों के कथनी और करनी में कोई सामंजस्य
नहीं है. चुनाव में राजनैतिक दल घोषणा पत्र में जो दावे और वादे करते हैं
, वह जीतने पर भूल जाते हैं; जिस पर चुनाव आयोग भी बेबस है क्योंकि उसके
सीमित अधिकार हैं.सभी राजनैतिक दल कहते हैं कि वे भ्रष्टाचार ख़त्म कर
देंगे, परन्तु स्वयं पहल कोई नहीं करता और पहल किए बिना भ्रष्टाचार ख़त्म
नहीं हो सकता . आजादी के 62 साल बाद भी देश की मौलिक समस्याएँ जस की तस
हैं. बुनियादी सुविधाओं का आभाव , बेकारी , भुखमरी , मंहगाई व्
भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है और इसका मूल कारण संसद एवं विधानसभा में
ईमानदार जन प्रतिनिधियों का नहीं होना है.चारों तरफ निराशा ही निराशा है.
ऐसी स्थिति में श्री अरविन्द केजरीवाल के बयान पर आपत्ति करनेवाले, अपने
दलों कि शुचिता पर ध्यान देकर कठोर कदम उठाए होते और वर्तमान चुनाव में
केवल और केवल साफ सुथरी छवि के उम्मीदवारों को ही टिकट दिए होते तो
उन्हें ऐसे बयान देने की स्थिति ही नहीं आती.
ट्रांस्पैरेंसी इंटरनेशनल एवं इलेक्शन वाच के आंकड़ों से बिलकुल स्पष्ट हो
चुका है कि राजनैतिक दल संसद के प्रतिनिधि एवं संसद कि गरिमा के चिन्तक
भ्रष्टाचार के मूल कारणों के हल के बजाय केवल उपरी बात करने का दम भरते
हैं और वे चाहते ही नहीं है कि स्वच्छ एवं ईमानदार व्यक्ति राजनीति में
आएं , जिसके बिना राजनैतिक भ्रष्टाचार ख़त्म करने कि बात बेमानी है . इसी
कारण राईट टू रिजेक्ट बिल ये राजनैतिक दल पास नहीं होने देना चाहते.
भाजपा, कांग्रेस , सपा और राजद द्वारा अरविन्द केजरीवाल के बयान को संसद
का अपमान बतानेवाले तथा उनपर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज करने की मांग
करनेवालों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए गोपाल प्रसाद ने दावा
किया है कि वे सभी राजनैतिक दलों के भ्रष्टाचार एवं कुकर्मों का पर्दाफास
करते रहेंगे तथा सूचना का अधिकार कार्यकर्ताओं पर किसी भी तरह की
असंवैधानिक कृत्य पर कानून के दायरे में माकूल जबाब देंगे. सम्पूर्ण देश
में आरटीआई कार्यकर्ताओं , स्वयंसेवी संगठनों एवं क्रांतिकारी शक्तियों
को आज एकत्रित होकर अन्ना हजारे एवं अरविन्द केजरीवाल के सभी सकारात्मक
आन्दोलन में कदम से कदम मिलकर चलेंगे .श्री प्रसाद ने कहा है कि अब आरपार
की लडाई ही बाकी बची है और हमलोग उसके लिए तैयार हैं . उन्होंने कहा की
संसद की गरिमा कायम करने हेतु हमलोग भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लडाई में
उन्हें अपने जीवन का मोह नहीं है क्योंकि वास्तव में हमलोग अंग्रेजों की
गुलामी से आजाद होकर भ्रष्ट राजनेताओं , अफसरों व कॉर्पोरेट के गुलाम हो
गए हैं , जिसके विरुद्ध जंग स्वाभाविक है.
"समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध ,
जो तटस्थ है समय लिखेगा उसका भी अपराध."