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Showing posts from March, 2012

गीत एवं नाटक प्रभाग से ऑडीशन टेस्ट की सीडी गायब

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाले गीत एवं नाटक प्रभाग के
मुख्यालय सूचना भवन से दिल्ली क्षेत्र की प्राईवेट रजिस्टर्ड पार्टियों
के ऑडीशन टेस्ट की सीडी गायब है तथा अब तक उच्चाधिकारियों ने इस गोलमाल
एवं अनियमितताओं पर कोई कारवाई नहीं की है, जिसका खुलासा सूचना का अधिकार
के तहत हुआ है.
सूचना का अधिकार कार्यकर्त्ता गोपाल प्रसाद ने १४ फरवरी २०११ को
गीत एवं नाटक प्रभाग से सूचना का अधिकार के तहत कई जानकारियां मांगी थी ,
जिसमें दिल्ली क्षेत्र की प्राईवेट रजिस्टर्ड पार्टियों के ऑडीशन टेस्ट
की सीडी व ऑडीशन टेस्ट की प्रक्रिया तथा नियमावली की मांग की थी .इसका
जबाब विभाग ने नियत समय एक माह के बजे पूरे तीन माह बाद १६ मई २०११ को
आधे अधूरे रूप में दिया.
विभागीय उत्तर से असंतुष्ट श्री प्रसाद ने २ जून २०११ को विभाग के निदेशक
एवं प्रथम अपीलीएट अधिकारी एल.आर.विश्वनाथ के समक्ष अपील डाली . इस अपील
में श्री प्रसाद ने कहा की उन्हें प्राईवेट रजिस्टर्ड पार्टियों को दिए
गए कार्य का सम्पूर्ण ब्यौरा माँगा था , परन्तु उन्हें पार्टीवार ,
निर्गत राशि की चेक क्रमांकवार जानकारी नहीं दी गई , जिससे यह स्पष्ट हो
सके की किन…

केजरीवाल के बयान पर आपति करने के बजाय संसद की गरिमा कायम करने में दें योगदान

आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के महासचिव एवं सूचना अधिकार कार्यकर्त्ता
गोपाल प्रसाद ने अरविन्द केजरीवाल के भाषण पर राजनैतिक दलों के नेताओं के
अनर्गल बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. श्री प्रसाद ने कहा कि
विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा अपराधियों , दुष्कर्मियों एवं
भ्रष्टाचारियों को चुनाव में टिकट देकर अपना प्रतिनिधि बनाने की गलत एवं
प्रतिस्पर्धी परंपरा को रोके बिना स्वच्छ ईमानदार एवं पारदर्शी शासन की
कल्पना ही बेमानी है. राजनैतिक दलों के कथनी और करनी में कोई सामंजस्य
नहीं है. चुनाव में राजनैतिक दल घोषणा पत्र में जो दावे और वादे करते हैं
, वह जीतने पर भूल जाते हैं; जिस पर चुनाव आयोग भी बेबस है क्योंकि उसके
सीमित अधिकार हैं.सभी राजनैतिक दल कहते हैं कि वे भ्रष्टाचार ख़त्म कर
देंगे, परन्तु स्वयं पहल कोई नहीं करता और पहल किए बिना भ्रष्टाचार ख़त्म
नहीं हो सकता . आजादी के 62 साल बाद भी देश की मौलिक समस्याएँ जस की तस
हैं. बुनियादी सुविधाओं का आभाव , बेकारी , भुखमरी , मंहगाई व्
भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है और इसका मूल कारण संसद एवं विधानसभा में
ईमानदार जन प्रतिनिधियों का नहीं होना है.चारों तरफ निराशा ही निराशा…