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Showing posts from January, 2013

तिरंगे और संविधान का हो दिल से सम्मान ! : गोपाल प्रसाद

प्रधान मंत्री जी ! पिछले 60 साल से हर साल 26 जनवरी को हमारे देश में गणतंत्र  दिवस मनाया जाता है। ये किस लिए और क्यों मनाया जाता है, मैं आज तक नहीं समझ पाया। हर साल दिखावे के लिए सेना के सारे अस्त्र  और शस्त्र  का  प्रदर्शन किया जाता है .  हमारे अदने  से  पड़ोसी मुल्क पाक ने  पिछले 64 साल(1948 से अब तक) से हमारे नाक में दम कर रखा है .हमारी 78000 वर्ग किलोमीटर  जमीन पर कब्ज़ा है। विशेष तौर पर 1971 के लड़ाई  में बांगलादेश बनने के बाद उसका मकसद देश को अस्थिर करना है और वो अपने मकसद में कुछ हद तक कामयाब रहा है . चाहे 26/11का मुंबई हमला हो चाहे कारगिल हो।  सीधे युद्ध  में तो वो भारत से मुकाबला नहीं कर सकता  मगर इस छद्म /अघोषित युद्ध में वो भारत का सिरदर्द बनकर चुनौती  दे रहा है। उसके  हौसले  इतने  बढ़ गए  है  कि  संसद पर हमले  की भी जुर्रत कर दी,  मगर हम कुछ न  कर सके । पीओके से  उग्रवाद के ट्रेनिंग कैंप चला  रहा है। हम सब जानते हैं , मगर कुछ नहीं कर सकते और  अपनी  साख नहीं बचा पा रहे  हैं। हमें अमेरिका का मुंह देखना पड़ता है। संसद पर हमला होता है और ये गणतंत्र सम्प्रुभूता संपन्न देश कुछ नह…

नव बर्ष में लें नव संकल्प : गोपाल प्रसाद

वर्तमान स्थिति एवं परिस्थिति के अनुसार  सभी नागरिकों को नव बर्ष में नव संकल्प लेने  हेतु अग्रसर होना चाहिए। आज आवश्यकता है कि  नीति के साथ नीयत भी बदले। इसके लिए हम स्वयं से करें बदलाव की शुरुआत और सबकी जिम्मेवारी तय हो। प्रत्येक नागरिक को उसके अधिकार और कर्तव्य की जानकारी सरकारी एवं सामाजिक स्तर  से हो, ऐसी व्यवस्था बने। अंग्रेजों के समय से चले आ रहे  साम्राज्यवादी , शोषक कानून की समीक्षा तथा संशोधनों पर अबिलम्ब कारवाई हो। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु अतिशीघ्र कड़े कानून बनाकर उसपर त्वरित अमल हो। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने हेतु अतिशीघ्र कड़े कानून बनाकर त्वरित कारवाई हो। कालाधन वापस लाकर सभी कालाधन जमाकर्ताओं के नाम उजागर किये जाए तथा इससे सम्बंधित समयसीमा ख़त्म हो।       महिलाओं की सुरक्षा हेतु हर संभव उपाय सुनिश्चित किए जाय एवं यौन हिंसा से सम्बंधित अब तक के सभी मामलों की सुनवाई फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में हो। पूर्व राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल द्वारा बलात्कारियों के मृत्युदंड माफ करने के जघन्यतम फैसले पर वर्तमान राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी विचार करें, इसका दबाब जनता द…

बलात्कार और अश्लील विज्ञापनों में मीडिया की भूमिका : गोपाल प्रसाद

मीडिया का नैतिक कर्तव्य है की समाज में फैली हुई कुरीतियों से समाज को सजग करे, देश और समाज के हित के लिए जनता को जागरूक करे ; परन्तु ऐसा लगता है की धन कमाने की अंधी दौड़ में लोकतंत्र का यह चौथा स्तंभ अपनी सभी मर्यादाओं को लाँघ रहा है। सभी समाचार पत्रों में संपादक प्रतिदिन  बड़ी-बड़ी पांडित्यपूर्ण सम्पादकीय लिख कर जनमानस को अपनी लेखनी की शक्ति से अवगत करते हैं परन्तु व्यावहारिक रूप में ऐसा लगता है की पैसा कमाने के लिए सभी कायदे कानूनों को तक पर रख दिया गया है . सभी समाचारपत्रों में अश्लील एवं अनैतिक विज्ञापनों की भरमार है , जिससे समाज के लोग गुमराह होते हैं . समाचारपत्र केवल एक लाइन लिखकर लाभान्वित हो जाता है . क्या कभी किसी समाचारपत्र ने ऐसे विज्ञापनों की सत्यता को जांचने की कोशिश की ? क्या ऐसे अश्लील और अनैतिक विज्ञापनों को समाचारपत्रों में छपने भर से वह अपनी जिम्मेवारी से मुक्त हो सकता है?
 ऐसे बहुत से विज्ञापन हैं जिनमें कोई पता नहीं होता , केवल मोबाईल नंबर दे दिया जाता है क्योंकि लाख कोशिश करने के बाबजूद भी ऐसे विज्ञापनदाताओं ने अपना पता नहीं बताया। इस तरह की कई शिकायतें थाने में …