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भ्रष्टाचार विरोधी अभियान /आरटीआई जनजागरूकता अभियान

भ्रष्टाचार विरोधी अभियान आरटीआई जनजागरूकता अभियान हेल्पलाइन नंबर : 09910341785 सूचना का अधिकार ( RTI) जनजागरूकता कार्यशाला ......................................................................…………………………………………। लोकतंत्र के सशक्तिकरण में आरटीआई का महत्वपूर्ण योगदान है। पारदर्शिता एवं जबाबदेही ही लोकतंत्र लोकतंत्र का आधार है। सरकार एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं और प्रतिष्ठानों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार अब सभी भारतवासियों को प्राप्त हो गया है. संसद में सूचना का अधिकार विधेयक 11 मई 2005 को पारित किया गया तथा 13 अक्टूबर 2005 को यह कानून के रूप में पूरे देश में लागू कर दिया गया है. इस क़ानून के दायरे में सरकारी , अर्धसरकारी संस्थाओं तथा विभागों के अतिरिक्त ऐसे और सरकारी संगठन भी आते हैं ,जिन्हे सरकार द्वारा वित्तीय सहायता मिली है। RTI द्वारा मानवाधिकार के उल्लंघन के मामलों एवं किसी जांच प्रक्रिया के पूर्ण हो जाने पर उसके बारे में सूचना प्राप्त की जा सकती है.. ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत , जिला पंचायत , नगर पंचायत , विधायक, सांसद, विधान परिषद् सदस्य इत्यादि के कार्यनिधियों एवं आय -व्यय का ब्यौरा भी प्राप्त किया जा सकता है। इसके माध्यम से सूचनाएं सामग्री के रूप में भी प्राप्त करने का हक़ है. सभी दस्तावेजों की फ़ोटो प्रति या इलेक्ट्रॉनिक रूप ( फलॉपी, सीडी ,वीडिओ कैसेट ,टेप ) में भी प्राप्त किया जा सकता है। किसी रिपोर्ट , निर्णय, नए कानून , किसी मीटिंग कि कार्यवाही तथा पत्रावली पर की गई टिप्पणियों की नक़ल भी मांगी जा सकती है। किसी सूचना के न मिलने या कार्य न हो पाने के कारण एवं इसके लिए दोषी व्यक्ति का नाम भी पूछा जा सकता है। भ्रष्टाचार कि निर्वाध धारा को रोकने एवं अपने अधिकार को पाने के लिए " सूचना का अधिकार " रूपी अधिकार का प्रयोग करने की परम आवश्यकता है. वास्तव में संगठित होकर इस अधिकार के प्रयोग द्वारा " सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन " का आगाज किया जा सकता है। दुर्भाग्य से आज देश की अधिकांश जनता अपने अधिकारों से ही अनभिज्ञ है , जिससे वह अपने अधिकारों का स्वहित , समाजहित एवं राष्ट्रहित में उपयोग नहीं कर पाती है। इस अनभिज्ञता को ख़त्म करने एवं आरटीआई क़ानून के सम्बन्ध में जानकारी देकर आम नागरिक को सशक्त कर सरकारी योजनाओं , परियोजनाओं कि वास्तविक स्थिति से अवगत करवाना हमारा मकसद है. सरकारी विभागों कि कार्यप्रणाली पर जनता की मॉनीटरिंग आरटीआई द्वारा सम्भव है। हमारे टैक्स का पैसा कहाँ, कैसे और कितना खर्च हुआ का हिसाब RTI द्वारा लिए बिना भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता। जनता का उसके अधिकार एवं कर्तव्य , समस्या एवं समाधान के प्रति जब तक जागरूक नहीं किया जाएगा तब तक स्थिति में परिवर्तन नहीं होगा। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु हम आपकी मदद कर सकते हैं। यदि आपका विभाग संस्था उपरोक्त मकसद हेतु आम नागरिक को RTI क़ानून से जागरूक करने हेतु इच्छुक एवं कार्यक्रम संयोजन की सारी व्यवस्था करने/ करवाने हेतु सक्षम हो तो हैम आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार हैं। आपका सकारात्मक सहयोग एवं सुझाव अपेक्षित है। चाँद मुट्ठीभर भ्रष्टाचारियों ने भ्रष्ट तंत्र व क़ानून का सहारा लेकर आम जनता का हर क्षेत्र में शोषण किया है और जनता के मौलिक अधिकारों को क़ानून के भंवरजाल में उलझकर जनता का शोषण कर रहे हैं , परन्तु इन चंद भ्रष्टाचारियों की दौलत जनता की ताकत के आगे कुछ भी नहीं है। अतः हमें उन भ्रष्ट लोगों द्वारा किए जा रहे शोषण का क़ानून के दायरे में रहकर विरोध करना होगा। आइए हमसे जुड़ें और " भ्रष्टाचार के खिलाफ हल्ला बोल " अभियान का हिस्सा बनकर अपनी समस्याओं का निदान स्वयं निकालें ! नव वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ................ गोपाल प्रसाद ( आरटीआई एक्टिविस्ट) राष्ट्रीय संयोजक , भ्रष्टाचार विरोधी अभियान दिल्ली पता : मकान नंबर -210, गली नंबर -3, पाल मोहल्ला निकट मोहनबाबा मंदिर , मंडावली, दिल्ली- 110092 मोबाइल : 09910341785 ईमेल : sampoornkranti@gmail.com ब्लॉग : http://sampoornkranti.blogspot.in फेसबुक : www.facebook.com/gopal.prasad.102 अमेठी पता : अवध निवास, प्रथम तल, निकट विंध्याचल मंदिर , गंगागंज, अमेठी (उ. प्र.)

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शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बच्चों को एक परिपक्व इन्सान बनाना होता है, ताकि वो कल्पनाशील, वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और देश का भावी कर्णधार बन सकें, किन्तु भारतीय शिक्षा पद्धति अपने इस उद्देश्य में पूर्ण सफलता नहीं प्राप्त कर सकी है, कारण बहुत सारे हैं । सबसे पहला तो यही कि अंगूठाछाप लोग डिसा‌इड करते हैं कि बच्चों को क्या पढ़ना चाहिये, जो कुछ शिक्षाविद्‍ हैं वो अपने दायरे और विचारधारा‌ओं से बंधे हैं, और उनसे निकलने या कुछ नया सोचने से डरते हैं, ऊपर से राजनीतिज्ञों का अपना एजेन्डा होता है, कुल मिलाकर शिक्षा पद्धति की ऐसी तैसी करने के लिये सभी लोग चारों तरफ से आक्रमण कर रहे हैं, और ऊपर से तुर्रा ये कि ये सभी लोग समझते हैं कि सिर्फ वे ही शिक्षा का सही मार्गदर्शन कर रहे हैं, जबकि दर‌असल ये ही लोग उसकी मां बहन कर रहे हैं । मैं किसी एक पर दोषारोपण नहीं करना चाहता, शिक्षा पद्धति की रूपरेखा बनाने वालों को खुद अपने अन्दर झांकना चाहिये और सोचना चाहिये, कि क्या उसमें मूलभूत परिवर्तन की जरूरत है। आज हम रट्टामार छात्र को पैदा कर रहे हैं, लेकिन वैचारिक रूप से स्वतन्त्र और परिपक्व छात्र नहीं, क्या यही हमा…

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भ्रष्टाचार और राजनीति का एक गहरा संबंध है । जहां हम विकास की एक नई गाथा को रचने का सपना संजोए हुए हैं वहीं दुनिया के सामने हमारी गरीबी की सच्चाई को स्लमडॉग मिलेनियर जैसी फिल्मों के सहारे परोसा जा रहा है । आज हम भ्रष्टाचार के मामले में बंग्लादेश, श्रीलंका से भी आगे हैं ।
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काले धन एवं नकली नोटों से छुटकारा - भ्रष्टाचार पूर्णत: खत्म

प्राय: सभी देशों की सरकारों का एक रोना साझा है और वो भी अति भयंकर रोना! देश की अर्थ व्यवस्था में काला धन । यह काला धन बहुत से देशों को, बहुत सी सरकारों को बहुत रुलाता है और बुद्धिजीवी वर्ग को अत्यंत चिंतित करता है । अर्थशास्त्रियों की नाक में दम करके रखता है । रोज न‌ए-न‌ए सुझाव दि‌ए जाते हैं, विचार कि‌ए जाते हैं कि किस तरह इस काले धन पर रोक लगा‌ई जा‌ए. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट तो छापों में विश्वास रखता है, जहाँ कहीं सुंघनी मिली नहीं कि पहुँच ग‌ए दस्ता लेकर । अजी! काले धन की बात तो छोड़ि‌ए! नोटों को लेकर इससे भी बड़ी समस्या का सामना क‌ई देशों को करना पड़ता है, और वो है नकली नोटों की समस्या । दूसरे देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करना हो या बेहाल करना हो, प्रिंटिंग प्रेस में दूसरे देश के नोट हूबहू छापि‌ए और पार्सल कर दीजि‌ए उस देश में, बस फ़िर क्या है - बिना पैसों के तमाशा देखि‌ए उस देश का । अब तो उस देश की पुलिस भी परेशान, गुप्तचर संस्था‌एं भी परेशान और सरकार भी परेशान! नकली नोट कहां-कहाँ से ढ़ूंढ़े और किस जतन से? बड़ी मुश्किल में सरकार ।
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